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फिर FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में जाने वाला है पाकिस्तान? ऑपरेशन सिंदूर के सबूत पेश करेगा भारत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

FATF बैठक में पाकिस्तान को फिर ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने के लिए भारत तैयार। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीडियो और पुख्ता सबूतों के साथ नई दिल्ली करेगी टेरर फंडिंग पर बड़ी घेराबंदी, बढ़ेगी इस्लामाबाद की टेंशन।

आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा झटका लग सकता है। भारत अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक में पाकिस्तान को फिर से ‘ग्रे लिस्ट’ में धकेलने की पूरी तैयारी कर चुका है। नई दिल्ली इस बैठक में वीडियो और अन्य पुख्ता सबूत पेश करने वाली है, जिनसे यह साबित होता है कि पाकिस्तान का आतंकी संगठनों को समर्थन लगातार जारी है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीडियो बनेंगे बड़ा हथियार

भारत के पास कई ऐसे सबूत हैं जो पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए काफी हैं। भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मारे गए आतंकियों के जनाजे में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।

सोशल मीडिया पर मौजूद इन वीडियो को भारत FATF की अगली पूर्ण बैठक में पेश कर सकता है। इन सबूतों के अलावा अन्य साक्ष्य भी यह साबित करेंगे कि पाकिस्तान के ‘स्टेट एक्टर्स’ खुद आतंकी संगठनों की सभाओं में सीधे तौर पर हिस्सा ले रहे हैं।

भारत कैसे बनाएगा दबाव?

पेरिस स्थित एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और काउंटर-टेररिस्ट फाइनेंसिंग (CTF) वॉचडॉग FATF की इस बैठक में भारत का रुख बेहद आक्रामक रहने वाला है।

संस्कृति मंत्रालय में सचिव विवेक अग्रवाल को FATF का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। नई दिल्ली की कोशिश है कि FATF पर दबाव बनाकर पाकिस्तान को अपनी धरती पर सक्रिय ‘नॉन-स्टेट एक्टर्स’ और आतंकी गतिविधियों के लिए अपने वित्तीय सिस्टम के इस्तेमाल पर जवाबदेह बनाया जाए।

‘ग्रे लिस्ट’ में जाने से पाकिस्तान पर क्या होगा असर?

अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को 34-सूत्रीय एक्शन प्लान लागू करने का हवाला देकर ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर कर दिया गया था। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फंडिंग को रोकने और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी जैसे सुधारों के दावे शामिल थे। अगर भारत के सबूतों के आधार पर पाकिस्तान फिर से इस लिस्ट में जाता है, तो उसकी मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।

‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल होने वाले देशों की FATF द्वारा कड़ी निगरानी की जाती है और उनके सिस्टम की समय-समय पर समीक्षा होती है। ऐसे देशों को वैश्विक वित्तीय संस्थानों से फंड या कर्ज हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जो कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका होगा।

शांतिदूत बनने का दिखावा, लेकिन आतंकवाद का दाग बरकरार

पाकिस्तान दुनिया भर में सनसनीखेज आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले जिहादी गुटों का घर होने के लिए बदनाम रहा है। हालांकि, हाल ही में इस्लामाबाद ने खुद को ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश करते हुए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाने की सफल कोशिश की है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को फिर से ‘ग्रे लिस्ट’ में लाने की भारत की इस मुहिम का क्या नतीजा निकलता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN