Source :- LIVE HINDUSTAN
Parenting Tips: हर चीज क ी एक सह ी उम्र होत ी है । अगर उम्र स े पहल े चीजो ं क ा दवाब बनाय ा जाए त ो बात बिगड ़ सकत ी है । यह ी ठीक पेरेंटिंग पर भ ी लाग ू होत ा है । बच्च े क ो अलग सुलान े स े ल े कर डेल ी हैबिट्स क ी एक उम्र है, ज ो पैरेंट्स क ो जरूर जानन ी चाहिए ताक ि सह ी समय पर सह ी फैसल ा लिय ा ज ा सके।
हर माता-पित ा चाहत े है ं क ि उनक ा बच्च ा जल्द ी समझदार बने, खुद स े काम कर े और अच्छ ी आदते ं सीखे । लेकिन बच्चो ं क ी परवरिश मे ं सबस े जरूर ी बात यह समझन ा ह ै क ि हर आदत और हर जिम्मेदार ी क ी एक सह ी उम्र होत ी है । कई बार हम बच्चो ं स े बहुत जल्द ी उम्मीदे ं लगान े लगत े हैं, जिसक ी वजह स े व े दबाव महसूस करन े लगत े हैं । पेरेंटिंग एक्सपर्ट अंबिक ा अग्रवाल क े मुताबिक बच्च े धीरे-धीर े सीखत े है ं और हर उम्र मे ं उनक ा दिमाग और व्यवहार अलग तरीक े स े विकसित होत ा है । ऐस े मे ं अगर आप सह ी समय पर सह ी चीज सिखात े हैं, त ो बच्च ा बिन ा डर और तनाव क े बेहतर तरीक े स े सीखत ा है । इसलिए बच्चो ं क ी ग्रोथ क ो समझन ा और उनक ी उम्र क े हिसाब स े उम्मीद रखन ा बेहद जरूर ी है । चलिए जानत े है ं पेरेंटिंग एक्सपर्ट अंबिक ा अग्रवाल क े मुताबिक बच्चो ं क े लिए सह ी चीज क ी सह ी उम्र क्य ा है।
बच्च े क ो अलग सुलान े क ी सह ी उम्र
कई माता-पित ा सोचत े है ं क ि बच्च े क ो बहुत जल्द ी अलग कमर े मे ं सुलान ा चाहिए । लेकिन पेरेंटिंग कोच अंबिक ा क े मुताबिक ज्यादातर बच्च े 7 साल क े आसपास य ा उसक े बाद खुद अपन ी अलग जगह क े लिए तैयार होन े लगत े हैं । इस उम्र तक व े इमोशनल ी थोड़ ा स्ट्रांग ह ो जात े है ं और अकेल े सोन े मे ं सेफ फील करन े लगत े हैं । अगर बच्च ा अभ ी भ ी आपक े साथ सोन ा चाहत ा है, त ो इस े गलत आदत मानकर डांटन े क ी जरूरत नही ं है । धीरे-धीर े उस े उसक ी अपन ी जगह क े लिए तैयार करें । जब बच्च ा खुद स े सहज महसूस करेगा, तब यह बदलाव आसान ह ो जाएगा।
एक जगह पर कॉन्सन्ट्रेट होन े क ी सह ी उम्र
पेरेंटिंग एक्सपर्ट क ा कहन ा ह ै क ि 5 स े 6 साल क ी उम्र स े पहल े बच्चो ं क ा ध्यान ज्याद ा समय तक एक जगह टिकान ा आसान नही ं होता । इस उम्र मे ं बच्च े खेलते-कूदत े हुए ज्याद ा सीखत े हैं । उनक ा शरीर और दिमाग दोनो ं एक्टिव रहत े हैं, इसलिए बार-बार उठना, इधर-उधर घूमन ा य ा जल्द ी बोर होन ा सामान्य बात है । अगर बच्च ा पढ़ाई क े दौरान बार-बार हिलता-डुलत ा है, त ो इस े जिद य ा बदतमीज ी न समझें । इस उम्र मे ं मूवमेंट भ ी सीखन े क ा हिस्स ा होत ा है । बच्च े को छोटे-छोट े समय क े लिए बैठाकर पढ़ाए ं और बीच-बीच मे ं ब्रेक दें।
अपन ा सामान समेट कर रखन े क ी आदत
करीब 3 स े 4 साल क ी उम्र मे ं बच्च े आसान निर्देश समझन ा शुर ू कर देत े हैं । यह ी वह समय होत ा ह ै जब उन्हे ं खिलौन े वापस जगह पर रखन ा सिखाय ा ज ा सकत ा है । शुरुआत मे ं बच्च ा खुद स े सब कुछ सह ी तरीक े स े नही ं करेगा, लेकिन रोज थोड़ा-थोड़ ा अभ्यास करान े स े यह आदत बन जात ी है । बच्च े क ो डांटन े क े बजाय उसक े साथ मिलकर खिलौन े समेटें । जब वह थोड़ ा भ ी सह ी करे, त ो उसक ी तारीफ जरूर करें । इसस े बच्च ा खुद स े जिम्मेदार ी लेन ा सीखत ा है।
होमवर्क मे ं मदद कम करन े क ा सह ी समय
पेरेंटिंग कोच क े अनुसार 7 स े 8 साल क ी उम्र मे ं बच्च े धीरे-धीर े जिम्मेदार ी समझन े लगत े हैं । इस समय आप उनक ी पढ़ाई मे ं लगातार साथ बैठन े क े बजाय थोड़ ा पीछ े हट सकत े हैं । इसक ा मतलब यह नही ं क ि आप पूर ी तरह ध्यान देन ा बंद कर दें, बल्क ि बच्च े क ो खुद कोशिश करन े क ा मौक ा दें । अगर बच्च ा हर छोट ी चीज ़ मे ं मदद मांगत ा है, त ो तुरंत जवाब देन े क े बजाय उस े सोचन े दें । इसस े उसक ा आत्मविश्वास बढ़त ा ह ै और वह खुद समस्याए ं हल करन ा सीखत ा है।
शेयर करन ा बच्च े समय क े साथ सीखत े है ं
एक्सपर्ट क े मुताबिक करीब 4 स े 5 साल क ी उम्र मे ं बच्च े दूसरो ं क ी भावनाए ं थोड़ ा बेहतर समझन े लगत े हैं । इस ी समय व े शेयरिंग क ा मतलब भ ी समझन ा शुर ू करत े हैं । अगर छोट ा बच्च ा अपन ी चीजे ं किस ी क ो नही ं देन ा चाहता, त ो इस े स्वार्थ ी व्यवहार मानन ा सह ी नही ं है । बच्च े क ो प्यार स े समझाए ं क ि दूसरो ं क े साथ चीज़े ं बांटन ा अच्छ ी आदत है । जब वह शेयर करे, त ो उसक ी तारीफ करें। धीरे-धीर े यह आदत उसक ी नैचुरल बिहेवियर क ा हिस्स ा बन जात ी है।
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