Source :- LIVE HINDUSTAN

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इस्लामी बैंक पीएलसी के नए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न विवाद अब हिंसक रूप ले लिया है। बैंक मुख्यालय के सामने ग्राहकों और कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ जोरदार झड़प हुई।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इस्लामी बैंक पीएलसी के नए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न विवाद अब हिंसक रूप ले लिया है। बैंक मुख्यालय के सामने ग्राहकों और कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ जोरदार झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में दर्जनों लोग घायल हो गए।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी ‘सचेत ग्राहक मंच’ के बैनर तले बैंक के मुख्य द्वार पर बैठे थे। पुलिस ने पहले चेतावनी दी, लेकिन प्रदर्शनकारियों के हटने से इनकार करने पर आक्रामक कार्रवाई की गई। आंसू गैस के धुएं से पूरा इलाका भर गया और पानी की तेज धार से कई महिलाएं व बुजुर्ग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि, घायलों की सटीक संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या है पूरा मामला?

बांग्लादेश सरकार ने कुछ दिन पहले बांग्लादेश बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर खुर्शीद आलम को इस्लामी बैंक पीएलसी का नया चेयरमैन नियुक्त किया था। इस फैसले का बैंक के कर्मचारियों, अधिकारियों और ग्राहकों ने जमकर विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शेख हसीना के शासनकाल में खुर्शीद आलम डिप्टी गवर्नर रहते हुए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार में संलिप्त थे। उन्होंने देश के प्रमुख व्यापारी एस. आलम के साथ मिलीभगत कर बैंकों से हजारों करोड़ रुपये के गबन में मदद की थी।

कर्मचारी यूनियन और ग्राहक संगठनों का कहना है कि खुर्शीद आलम का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव इतना ज्यादा है कि उनकी नियुक्ति बैंक की विश्वसनीयता और शरिया अनुपालन को गंभीर खतरे में डाल देगी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह नियुक्ति न सिर्फ इस्लामी बैंक बल्कि पूरे इस्लामी बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा है। हम किसी भी कीमत पर इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

बता दें कि इस्लामी बैंक पीएलसी बांग्लादेश का सबसे बड़ा निजी शरिया-आधारित बैंक है, जो पूरे देश में सैकड़ों शाखाओं के जरिए लाखों ग्राहकों को सेवाएं देता है। इस बैंक पर लंबे समय से विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव माना जाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान प्रदर्शन के पीछे जमात-ए-इस्लामी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन हो सकता है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद इस्लामी बैंकिंग क्षेत्र में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें तेज हुई हैं। कुछ लोग खुर्शीद आलम की नियुक्ति को अवामी लीग के बचे-खुचे प्रभाव को खत्म करने की कवायद मान रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं।

अभी क्या हैं हालात?

ढाका ट्रिब्यून समेत स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैंक परिसर के बाहर बड़े बैनर और पोस्टर लगाए थे, जिन पर लिखा था कि खुर्शीद आलम इस्तीफा दो… मनी लॉन्ड्रर को चेयरमैन मत बनाओ… इस्लामी बैंक बचाओ। बताया जा रहा है कि विरोध-प्रदर्शन के कारण अभी भी बैंक मुख्यालय और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। सड़कें बंद हैं और यातायात पूरी तरह प्रभावित है।

दूसरी ओर प्रदर्शनकारी तितर-बितर होकर आसपास की गलियों में खड़े हैं और नारेबाजी जारी रखे हुए हैं। बैंक के अंदर कामकाज ठप पड़ा हुआ है। स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और आगे बड़े प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही है।

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