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‘भारत की सैन्य क्षमताओं का सम्मान करते हैं’, पाकिस्तानी सेना बोली- हम उनके साथ रेस में नहीं

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत की बढ़ती सैन्य और मिसाइल क्षमताओं पर पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं है।

पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को स्वीकार किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान नई दिल्ली के साथ किसी तरह की हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं है।

अल अरेबिया इंग्लिश को दिए इंटरव्यू में चौधरी से भारत की एयर डिफेंस, मिसाइल और पारंपरिक स्ट्राइक क्षमताओं में हो रहे विकास को लेकर पाकिस्तान की चिंता के बारे में पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत की सैन्य क्षमताओं का “सम्मान” करता है और नई दिल्ली के अपने रक्षा भंडार को मजबूत करने के प्रयासों को समझता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का फोकस रक्षात्मक क्षमताओं पर है और किसी भी देश के खिलाफ उसका “कोई आक्रामक इरादा” नहीं है।

‘भारतीय सैन्य क्षमताओं का सम्मान करते हैं’

लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा, “हम भारतीय सैन्य क्षमताओं का सम्मान करते हैं। हम उनकी अपनी सैन्य ताकत और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बड़ी मात्रा में पैसा और संसाधन खर्च करने की इच्छा को समझते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हम भारतीयों के साथ किसी भी तरह की हथियारों की दौड़ में हैं।”

ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत अपने घरेलू रक्षा विनिर्माण आधार को लगातार मजबूत कर रहा है। साथ ही, भारत उन्नत सैन्य प्लेटफॉर्म के लिए अपने स्थापित रक्षा साझेदारों के साथ भी काम कर रहा है।

मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमता बढ़ा रहा भारत

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के इस प्रयास को और गति मिली है। मई 2025 में भारत ने 1,460 करोड़ रुपये की नवदुर्गा डिफेंस टेस्टिंग रेंज की आधारशिला रखी। जुलाई 2026 में प्रोजेक्ट कुशा के तहत भारत ने स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल कार्यक्रम का पहला फ्लाइट टेस्ट किया। इस कार्यक्रम में मिसाइल की अधिकतम मारक क्षमता 400 किलोमीटर तक रखने की योजना है। पिछले महीने सरकार ने पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों से जुड़ी डीआरडीओ तकनीकों को भारतीय कंपनियों को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी। इससे ऐसी प्रणालियों के विकास और उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ेगी।

भारत के एयर डिफेंस नेटवर्क में आकाश, आकाश-एनजी, क्यूआरएसएएम और वीएसएचओआरएडीएस जैसी प्रणालियां शामिल हैं। वहीं, ब्रह्मोस भारत-रूस का संयुक्त कार्यक्रम है, जबकि एमआरएसएएम को भारत और इजरायल के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

अग्नि सीरीज और के-सीरीज की पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें रणनीतिक प्रणालियां हैं। ये भारत के परमाणु प्रतिरोध का हिस्सा हैं और उन पारंपरिक मिसाइल तकनीकों से अलग हैं, जिन्हें व्यापक औद्योगिक भागीदारी के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

रूस के साथ रक्षा सहयोग भी बढ़ा रहा भारत

स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों के साथ-साथ भारत रूस समेत प्रमुख साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग का भी विस्तार कर रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान, जो 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए हुई थी, रिपोर्टों में कहा गया कि मॉस्को ने भारत के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के बेड़े के आधुनिकीकरण में मदद के लिए एक एडवांस इंजन की पेशकश की थी।

भारत और रूस करीब 260 Su-30MKI विमानों से जुड़े अनुमानित 11 अरब डॉलर के ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड कार्यक्रम पर चर्चा कर रहे हैं। इसके शुरुआती चरण में 84 विमानों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

रूस ने भारत में Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के संयुक्त उत्पादन का भी प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और नए S-500 सिस्टम की भी पेशकश की गई है। मॉस्को ने भारत में S-400 के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित करने की भी पेशकश की है। वहीं, भारत स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के जरिए अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर भी काम कर रहा है।

दोनों देशों के रक्षा दृष्टिकोण में यह अंतर महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान अभी भी बाहरी सैन्य साझेदारियों, खासकर चीन और तुर्किये, पर काफी हद तक निर्भर है। इसके विपरीत भारत विदेशी सहयोग को अपने लगातार बढ़ते घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN