Source :- LIVE HINDUSTAN
बता दें कि ट्रंप सरकार ने मार्च 2025 में हूतियों को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद लाल सागर में जबरदस्त युद्ध चला। हालांकि मई 2025 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था। इसकी कीमत सऊदी चुकाएगा?
ऐसे दोस्त से तो दुश्मन ही भले! पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के जंग में अमेरिका की भूमिका को देख कर आप भी शायद ऐसा ही कहें। अमेरिका के साथी सऊदी अरब पर इस वक्त मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। पहले वह अमेरिका और ईरान की जंग में बलि का बकरा बना। ईरान ने अमेरिका से बदला लेने के लिए सऊदी के तेल ठिकानों पर मिसाइलें दाग तगड़ा नुकसान पहुंचाया। और अब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यहां तक कि जंग की आंच पवित्र स्थल मक्का के पास तक पहुंच गई है। इन सब के बाद भी अमेरिका मदद तो दूर, आस-पास भी नजर नहीं आ रहा। इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने हूतियों संग ही सेटिंग कर ली है।
खबर है कि हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों की हूती विद्रोहियों संग एक मीटिंग हुई है। इस मीटिंग के बाद ही अमेरिका ने जंग में सऊदी अरब का साथ ना देने का फैसला किया है। इस दौरान हूती विद्राेहियों ने अमेरिकी अधिकारियों को आश्वासन दिया है कि वे अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे और अमेरिका के साथ 2025 में हुए युद्धविराम समझौते को नहीं तोड़ेंगे।
सीकेट्र मीटिंग में क्या हुआ?
टाइम्स ऑफ इजराइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते रविवार को अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान में एक सीक्रेट मीटिंग हुई। बैठक में अमेरिका की तरफ से दूतावास के अधिकारी शामिल थे, वहीं हूती प्रतिनिधिमंडल में मस्कट स्थित वरिष्ठ नेता मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्दुलमलिक अल-अजरी शामिल थे। इस बैठक में कई बड़े फैसले हुए। एक यमनी सूत्र के मुताबिक हूतियों ने बैठक में कहा कि वे सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को छोड़कर, अमेरिकी या इजराइली जहाजों और दूसरे वाणिज्यिक पोतों को निशाना नहीं बनाएंगे। इसके बाद ही अमेरिका ने सऊदी का साथ न देने का आश्वासन दिया।
2025 में हुआ था समझौता
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने मार्च 2025 में हूतियों को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया था। इसके बाद लाल सागर में जबरदस्त युद्ध शुरू हो गया। हूतियों के खिलाफ अमेरिका ने मोर्चा खोल दिया और दो महीने तक बमबारी की। हालांकि बाद में मई 2025 में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम समझौता हो गया था। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि हूतियों ने अमेरिका से संपर्क कर यमन युद्ध से अलग रहने का अनुरोध किया था। वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हूतियों के साथ सीधे संपर्क की पुष्टि की थी।
मक्का तक पहुंची जंग की आग
इधर सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों की जंग भयावह होती जा रही है। हूतियों ने हाल ही में लाल सागर के पास कुछ अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया है। वहीं जंग की आग इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र स्थल मक्का तक पहुंच गई है। सऊदी अरब के रक्षा बलों ने दावा किया है कि उन्होंने मक्का शहर के दक्षिण में हूतियों के एक ड्रोन को मार गिराया। इस दौरान इतिहास में पहली बार मक्का में हवाई हमले की चेतावनी वाले सायरन बजे। हालांकि हूती विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने के दावों से साफ इनकार किया है।
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