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मिडिल-ईस्ट पर ट्रंप सरकार में ही खटपट? ट्रंप से उलट बोले जेडी वेंस; डटा रहेगा अमेरिका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मिडिल ईस्ट पर ट्रंप सरकार में खटपट के संकेत सामने आए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख से अलग बोलते हुए कहा है कि अमेरिका इस क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगा, वरना दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।

अमेरिकी प्रशासन में सब ठीक है या अंदरखाने खींचतान शुरू हो गई है? यह सवाल अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के एक बयान के बाद उठ रहा है। दरअसल, जेडी वेंस ने साफ संकेत दिया है कि मिडिल ईस्ट से अमेरिका फिलहाल पीछे नहीं हटेगा। यह बयान इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से कहते रहे हैं कि अमेरिका दुनिया के झगड़ों में कम फंसे। और जल्द से जल्द मिडिल ईस्ट से निकले। लेकिन वेंस के शब्दों से लगता है कि ट्रंप सरकार के अंदर इस मुद्दे पर सोच एक जैसी नहीं है। अगर रहती तो वेंस इस तरह का बयान नहीं देते।

क्यों बोले जेडी वेंस?

बुधवार को ऑल-इन समिट में बोलते हुए वेंस ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका मिडिल ईस्ट से निकल गया, तो दुनियाभर में ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान अब भी व्यापारिक जहाजों पर हमला कर रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका कह दे कि अब क्षेत्र अपने भरोसे है, तो तेल और गैस की आपूर्ति बिगड़ जाएगी। वेंस ने कहा कि जो लोग इस समय नाराज हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि विकल्प यही है। अगर अमेरिका हट गया, तो वैश्विक ऊर्जा संकट आ जाएगा। ईरान जहाजों पर गोलीबारी जारी रखेगा। यह बात हम जानते हैं।

इस दौरान उन्होंने माना कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका विदेशी मामलों में कम उलझे। लेकिन वेंस ने साथ ही यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि जरूरत पड़ने पर सेना का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने देगा। वेंस के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पारंपरिक सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। इसके बावजूद ईरानी सेना शांति वार्ता के दौरान भी व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने जिम्मेदारी भरा फैसला लिया है। मकसद यही है कि ईरान की हरकतों के बावजूद दुनिया के बाजारों तक तेल और गैस पहुंचता रहे।

इजरायल पर भी वेंस का रूस साफ

वहीं, इजरायल पर भी वेंस का रुख साफ था। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति सिर्फ इजरायल के हिसाब से नहीं चलेगी। अमेरिका के अपने हित सबसे आगे रहेंगे। इजरायल सैन्य तकनीक और खुफिया जानकारी में अहम साथी है, लेकिन दोनों सरकारें हर मुद्दे पर सहमत नहीं होतीं। वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप जरूरत पड़ने पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से असहमत होने को तैयार हैं।

ट्रंप यह मान सकते हैं कि नेतन्याहू अपने देश के हित में सही हों, फिर भी अमेरिका को अलग रास्ता अपनाना पड़ सकता है। उन्होंने इसकी तुलना नाटो से की। यूरोपीय देशों के साथ साझेदारी जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिकी विदेश नीति सिर्फ सहयोगियों के कहने पर तय हो।

मिडिल ईस्ट से हटने का सवाल ही नहीं

कुल मिलाकर कहा जाए तो वेंस का संदेश साफ है। ट्रंप सरकार फिलहाल मिडिल ईस्ट से पूरी तरह पीछे नहीं हटने वाली नहीं है। मौजूदगी बनी रहेगी, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा और ईरान को काबू में रखना वाशिंगटन के लिए अब भी बड़ा मुद्दा है। यही वजह है कि ट्रंप के ‘कम दखल’ वाले रुख और वेंस के बयान के बीच फर्क साफ दिख रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN