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राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को नोटिस, और क्या कहा

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Source :- BBC INDIA

राहुल गांधी

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पढ़ने का समय: 6 मिनट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया.

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा और इस याचिका को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न (एसआईआर) की वैधता को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का आदेश दिया.

अदालत ने चुनाव आयोग के अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी नोटिस जारी किया है.

हालांकि, नोटिस जारी करते हुए बेंच ने एक याचिकाकर्ता के व्यवहार को लेकर सवाल भी उठाया.

लाइव लॉ के मुताबिक़ बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई पर वह याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके व्यवहार के बारे में जवाब मांगेगी. अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसकी टिप्पणी किस याचिकाकर्ता को लेकर थी.

अदालत ने यह भी साफ़ किया कि नोटिस जारी किए जाने का मतलब यह नहीं है कि वह किसी बात की निंदा कर रही है.

राहुल गांधी और विपक्ष की याचिका में क्या मांग की गई है?

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने 12 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया था. याचिका में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जाने और चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, याचिका में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए या उसमें बदले गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की गई है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में तकनीकी विशेषज्ञों और दूसरे प्रतिष्ठित लोगों की एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है.

याचिका में चुनाव आयोग से एसआईआर से जुड़े आंतरिक रिकॉर्ड, फाइलें, बैठकों के मिनट्स, दर्ज आपत्तियां और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है.

इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम बूथ के हिसाब से सार्वजनिक किए जाएं और यह भी बताया जाए कि उनका नाम किस वजह से हटाया गया.

हटाए गए मतदाताओं का उम्र और लिंग के आधार पर ब्यौरा जारी करने और योग्य मतदाताओं का नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है.

याचिका में यह सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है कि किसी मतदाता का नाम उसे नोटिस दिए और अपनी बात रखने का उचित मौक़ा दिए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए. इसके साथ ही मामले पर फ़ैसला आने तक राज्यों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है.

ज्ञानेश कुमार के फ़ैसलों पर क्या सवाल हैं?

इस विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग के भीतर फ़ैसले लेने की प्रक्रिया भी है.

ये आरोप ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ अख़बार की एक इन्वेस्टिगेशन के बाद और तेज़ हुए हैं.

अख़बार ने दस्तावेज़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के नाम पर लिए गए कुछ फ़ैसलों और जारी आदेशों पर औपचारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई थी. दोनों आयुक्तों की आपत्तियां नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन, मतदाताओं के नाम हटाने और दोबारा जोड़ने और वोटर डेटाबेस की सुरक्षा जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं.

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SOURCE : BBC NEWS