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रिलायंस और 7-Eleven की 5 साल पुरानी साझेदारी खत्म, भारत में बंद होंगे करीब 60 स्टोर्स; ये है कारण

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) और 7-Eleven की 5 साल पुरानी फ्रेंचाइजी साझेदारी खत्म होने जा रही है
  • रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में संचालित करीब 60 स्टोर में से ज्यादातर बंद हो सकते हैं
  • वित्त वर्ष 2025-26 में 7-India कंविएंसेस रिटेल का रेवेन्यू लगभग ₹92 करोड़ रहा, जबकि नेट लॉस करीब ₹90 करोड़ था

भारत में रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) और 7-Eleven की 5 साल पुरानी फ्रेंचाइजी साझेदारी खत्म होने जा रही है। दोनों कंपनियों ने 2021 में भारत में 7-Eleven के कन्वीनियंस स्टोर शुरू करने के लिए हाथ मिलाया था, लेकिन कारोबार को पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल सका। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, दोनों कंपनियां करीब 60 स्टोर में से ज्यादातर को बंद करने की तैयारी कर रही हैं। कुछ आउटलेट्स पर बचा हुआ स्टॉक बेचने के बाद उन्हें बंद किया जा सकता है। आइए इसको जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

भारत में 7-Eleven का बिजनेस क्यों नहीं चला?

भारत में 7-Eleven को उतारने का मकसद ग्राहकों को पड़ोस में रोजमर्रा की जरूरत का सामान जल्दी उपलब्ध कराना था। लेकिन, इस मॉडल को बड़े पैमाने पर फैलाना मुश्किल साबित हुआ। ब्रांडेड स्टोर चलाने में किराया, कर्मचारियों, इन्वेंट्री और लॉजिस्टिक्स जैसे खर्च काफी ज्यादा होते हैं। इसके मुकाबले भारत में करोड़ों किराना स्टोर कम लागत के साथ ग्राहकों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं।

क्विक कॉमर्स ने बढ़ाई मुश्किल

कन्वीनियंस स्टोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) कंपनियां भी हैं। ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (Zepto) और स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) जैसे प्लेटफॉर्म ग्राहकों को स्नैक्स, किराना और रोजमर्रा की दूसरी चीजें कुछ ही मिनटों में घर पहुंचा रहे हैं, यानी जिस सुविधा के लिए ग्राहक कन्वीनियंस स्टोर तक जाता था, उसका बड़ा हिस्सा अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे मिल रहा है। इससे फिजिकल स्टोर के लिए पर्याप्त बिक्री हासिल करना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।

आंकड़े भी बताते हैं कारोबार का दबाव

वित्त वर्ष मार्च 2026 में खत्म होने वाले साल के दौरान 7-India कंवेंस रिटेल (Convenience Retail) ने करीब 92 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि कंपनी का नेट लॉस लगभग 90 करोड़ रुपये रहा। इससे संकेत मिलता है कि स्टोर नेटवर्क उस स्तर की बिक्री और प्रोडक्टिविटी हासिल नहीं कर पाया, जो बढ़ती ऑपरेशनल लागत को कवर करने के लिए जरूरी थी। हालांकि, 7-Eleven भारत से पूरी तरह बाहर होगा या किसी नए स्थानीय पार्टनर के साथ दोबारा कारोबार शुरू करेगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

भारत में छोटे फॉर्मेट की रिटेलिंग पहले भी चुनौतीपूर्ण

भारत में संगठित कन्वीनियंस रिटेल के लिए यह चुनौती नई नहीं है। EasyDay, More और Spencer’s जैसे ब्रांड भी छोटे फॉर्मेट वाले स्टोर नेटवर्क को कम कर चुके हैं या कई जगहों से बाहर निकल चुके हैं। इसके बावजूद देश में छोटे पड़ोस के स्टोर की पकड़ मजबूत बनी हुई है। पैकेज्ड कंज्यूमर गुड्स कंपनियों की बिक्री का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अभी भी छोटे रिटेलर्स के जरिए आता है।

रिलायंस के लिए क्या मायने रखता है?

रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) देश में कई तरह के रिटेल फॉर्मेट में मौजूद है, लेकिन 7-Eleven का मॉडल अलग था। कन्वीनियंस स्टोर तभी बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं, जब किसी इलाके में स्टोर की पर्याप्त संख्या हो, हर स्टोर से अच्छी बिक्री हो और सप्लाई चेन मजबूत हो। साथ ही फ्रेश फूड, प्राइवेट लेबल या ऐसी अलग पेशकश जरूरी होती है, जो किराना और क्विक कॉमर्स से अलग अनुभव दे। भारत में 7-Eleven का सीमित नेटवर्क इन चुनौतियों के बीच जरूरी स्केल हासिल नहीं कर सका। यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत में सिर्फ ग्लोबल ब्रांड और बड़े रिटेल नेटवर्क के दम पर कन्वीनियंस स्टोर मॉडल को सफल बनाना आसान नहीं है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN