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शांति करवाने गए पाकिस्तान का बन गया मजाक, ईरान की तरफ से आया तीखा तंज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में पाकिस्तान के शांतिदूत बनने की कोशिश अब मजाक का कारण बन रही हैं। ईरान के एक वरिष्ठ सांसद ने पाकिस्तान का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वह मध्यस्थ की भूमिका के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।

अमेरिका और ईरान के बीच जंग जारी है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि ईरान पर कुछ समय तक कोई हमला नहीं होगा। लेकिन अभी भी होर्मुज में बिछी समुद्री माइन्स जहाजों के लिए खतरा बनी हुई है। शनिवार को ईरान की तरफ से बताया गया कि एक तेल टैंकर माइन्स का शिकार हुआ है। इन सब धमाकों और हिंसा के बीच शांति करवाने गया पाकिस्तान एक बार फिर से मजाक का पात्र बन गया है। ईरान की तरफ से उसकी मध्यस्थ बनने की क्षमता पर सवाल उठाए गए हैं। ईरान के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि पाकिस्तान की डिप्लोमैटक विश्वसनीयता कड़े सवालों के घेरे में है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सांसद मोहसेन जंगनेह ने इस्लामाबाद की शांति की कोशिशों का मजाक उड़ाते हुए उनके निष्पक्ष होने पर सवाल उठाया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस्लामाबाद की विदेशनीति पर साफ तौर से अमेरिका का असर रहता है। बता दें, यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी पाकिस्तान की निष्पक्षता के ऊपर ईरान की तरफ से सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच में

पाकिस्तानियों का ट्वीट भी अमेरिकी लिखते हैं-जंगनेह

ईरानी सांसद ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का जिक्र करते हुए कहा कि उनके द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट भी अमेरिकियों द्वारा लिखे जाते हैं। दरअसल, जंगनेह यहां उस ट्वीट का जिक्र कर रहे थे, जिसमें पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गई पोस्ट में सबसे आखिर में एक ऐसी लाइन लिखी हुई थी, जिसे देखकर यह साफ समझ आ रहा था कि शहबाज शरीफ द्वारा पोस्ट किया गया ट्वीट कहीं और से उन्हें भेजा गया है। उस समय इस ट्वीट को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी और मजाक भी बना था।

ईरान ने अफगानिस्तान को बताया सच्चा दोस्त

पाकिस्तान के साथ दोस्ती पर संदेह जताते हुए जंगनेह ने अफगानिस्तान के साथ दोस्ती की तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देश भरोसेमंद क्षेत्रीय सहयोगी हैं। दोनों के बीच संबंधों में भी लगातार सुधार हो रहा है।

बता दें, डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर लगातार उनकी गुड बुक्स में रहने की कोशिश करते हुए नजर आए हैं। फिर चाहें ट्रंप को शांति के नोबेल के लिए नामांकन करना हो या उनके द्वारा बनाए गए संगठन में खुलकर शामिल होना हो। पाकिस्तान लगातार अमेरिका की गोद में बैठा हुआ नजर आया है। ईरान के साथ जारी अमेरिकी युद्ध में मध्यस्थता करवाने के लिए भी वाशिंगटन ने इस्लामाबाद को ही चुना। क्योंकि उन्हें यकीन था कि पाकिस्तान उनका ही साथ देगा। ईरान की तरफ से भी इस मुद्दे को समय के साथ कई बार उठाया। परिणीति यह रही कि अभी भी दोनों के बीच युद्ध जारी है।

विशेषज्ञों की मानें तो ईरान की तरफ से आ रहे ऐसे बयान तेहरान और इस्लामाबाद के बीच बढ़ते अविश्वास को दिखाते हैं। इस तीखी प्रतिक्रिया से मध्य-पूर्व के मामलों में खुद को मुख्य शांतिदूत के तौर पर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिशें और मुश्किल हो गई हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN