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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/15/1200x900/15_june_asha_parekh_1781550509518_1781550514355_3c64fa36-f701-4ae0-9560-915bb378a2ec.jpgबॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस को एक शादीशुदा फिल्ममेकर से प्यार हो गया था, लेकिन उनका घर नहीं तोड़ना चाहती थीं इसलिए कभी अपने प्यार का इजहार हीं किया। जानिए इस महान अभिनेत्री के त्याग की अनसुनी कहानी।
हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक अभिनेत्री ऐसी भी रहीं, जिन्होंने शादीशुदा मर्द से प्यार तो किया, लेकिन प्यार की खातिर दूसरी औरत का घर नहीं उजाड़ा। उन्होंने अपने प्यार की गरिमा बनाए रखी और ताउम्र शादी नहीं की। जी हां, हम बात कर रहे हैं 60 और 70 के दशक की उस सदाबहार अदाकारा आशा पारेख की, जिन्होंने अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज किया।
इस तरह हुआ प्यार
हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की ‘जुबली गर्ल’ आशा पारेख की। ये किस्सा शुरू होता है साल 1959 से, जब मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक नासिर हुसैन ने आशा पारेख को फिल्म ‘दिल देके देखो’ से बॉलीवुड में एक बड़ा ब्रेक दिया। फिल्म सुपरहिट रही और इसके बाद दोनों ने एक साथ कई शानदार फिल्में कीं। काम करते-करते आशा पारेख कब नासिर हुसैन को अपना दिल दे बैठीं, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। नासिर हुसैन भी उनसे प्यार करने लगे।
‘घर तोड़ने वाली’ का दाग नहीं था मंजूर
नासिर हुसैन से बेइंतहा मोहब्बत के बावजूद आशा पारेख ने कभी उनसे शादी करने या उनके साथ घर बसाने की जिद नहीं की। वजह सिर्फ इतनी थी कि नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। आशा पारेख नहीं चाहती थीं कि उनके प्यार की वजह से नारिस हुसैन का एक हंसता-खेलता परिवार बिखर जाए और समाज की नजरों में वो ‘घर तोड़ने वाली’ कहलाएं।
अपनी ऑटोबायोग्राफी में बयां किया था दर्द
सालों तक अपनी खामोश मोहब्बत को दिल में दबाए रखने के बाद आशा पारेख ने साल 2017 में आई अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘द हिट गर्ल’ में इस बात का खुलासा किया था। उन्होंने लिखा था, ‘हां, नासिर हुसैन ही एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिनसे मैंने प्यार किया। मैं उनसे बेइंतहा मोहब्बत करती थी, लेकिन मैं कभी भी किसी का घर नहीं उजाड़ना चाहती थी। यही वजह थी कि मैंने कभी उनपर शादी के लिए दबाव नहीं बनाया और ताउम्र कुंवारी रहने का फैसला किया।’
फैसले पर नहीं है कोई पछतावा
पूरी जिंदगी अकेले गुजारने के बाद भी आशा पारेख के मन में अपने इस फैसले को लेकर कोई पछतावा या कड़वाहट नहीं है। उनका मानना है कि किसी के घर को उजाड़कर मिली खुशी कभी सच्ची नहीं हो सकती। आज आशा 83 पार की उम्र में भी अपनी जिंदगी को पूरी गरिमा, सुकून और अकेलेपन के सुकून के साथ जी रही हैं। बता दें, उन्होंने बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था और साल 2002 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
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