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सदी का सबसे दुखद गाना जिसे एक पत्नी ने अपने पति की प्रेमिका के लिए गाया, फ्लॉप हुई फिल्म, अमर हो गया गीत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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हिंदी सिनेमा में एक ऐसा गाना भी बना है जिसे सदी के सबसे दुखद गानों में से एक कहा जाता है। एक ऐसा गाना जिसके लिए एक पत्नी ने अपने पति की प्रेमिका के लिए गाया था। पत्नी के मन के अंदर का दर्द इस गाने में सुना जा सकता है।

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं जिन्हें सुनने के बाद आपकी आंखों से आंसू जरूर आए होंगे। कुछ प्यार में धोखा खाए लोगों को पसंद आए तो कुछ के शब्दों ने जहन में गहरा असर छोड़ दिया। लेकिन क्या आपने सदी के सबसे दुखद गाने को सुना है? 50 के दशक में हिंदी सिनेमा और म्यूजिक तेजी से आगे बढ़ रहा था। नए तरह के गाने बन रहे थे। गीतकार अपनी कलम से समाज और रिश्तों की सच्चाई पन्ने पर उतार रहे थे, म्यूजिक डायरेक्टर्स इस सच्चाई को धुनों में पिरोते और सिंगर की आवाज में वो गाने अमर हो जाते। एक ऐसा ही गाना जिसे सदी के सबसे दुखद गानों में से एक माना जाता है। वो गाना है ‘वक्त ने किया क्या हसीं सितम’। इस गाने के पीछे की सच्चाई आपको उदास कर देगी।

सदी का सबसे दुखद गाना

साल 1959 में एक फिल्म आई थी ‘कागज के फूल’। इस फिल्म में गुरु दत्त और वहीदा रहमान ने लीड किरदार निभाया था। इस फिल्म की कहानी गुरु दत्त की अपनी जिंदगी से इंस्पायर्ड बताई गई। फिल्म के दुखद गाने के बारे में बात करने से पहले फिल्म और असली जीवन की कहानी को समझ लेते हैं। फिल्म में सुरेश सिन्हा नाम का किरदार होता है जो पेशे से फिल्म डायरेक्टर है। सुरेश की शादीशुदा जिंदगी सही नहीं चल रही होती है। इस दुखद जिंदगी में उनकी मुलाकात शांति होती है। फिल्म में शांति का किरदार वहीदा रहमान ने निभाया था। शांति को पहली बार देखने के बाद सुरेश उसे अपनी फिल्म में काम देता है और समय के साथ वो बहुत बड़ी स्टार बन जाती है। लेकिन फिर सुरेश के परिवार की खातिर वो फिल्मों को छोड़ देती है। अंत में सुरेश डायरेक्टर की कुर्सी पर ही दम तोड़ देता है। ये कहानी फिल्म कागज के फूल की थी। एक ऐसी लव स्टोरी जिसमें दोनों तरफ प्यार की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन ऐसे प्यार को अपनाया नहीं जा सकता है।

फिल्म कागज के फूल की कहानी

फिल्म की ये कहानी गुरु दत्त के जीवन से प्रेरित मानी गई। गीता दत्त से उनकी शादीशुदा जिंदगी ठीक ही तो नहीं थी। रिश्ते में कडवाहट का असर उनके जीवन पर दिखने लगा था। जीवन नीरस होता जा रहा था फिर डायरेक्टर की जिंदगी में होती है वहीदा रहमान की एंट्री। ऐसा कहा जाता है कि गुरु दत्त ने जब वहीदा को पहली बार देखा था तब ही उन्हें फिल्म में कास्ट करने के बारे में सोच लिया था। बतौर डायरेक्टर उन्होंने 1956 में आई फिल्म CID में मौका दिया। इसके बाद 1957 में आई फिल्म प्यासा दोनों ने बतौर लीड काम किया। इस समय तक दोनों एक दूसरे के नजदीक आ चुके थे। इंडस्ट्री में इनके प्यार के चर्चे थे। ऐसे में गुरु दत्त ने वहीदा को लेकर एक और फिल्म बनाई ‘कागज के फूल’। इसकी कहानी हमने आपको ऊपर बताई है। इस फिल्म के लिए गुरु दत्त ने SD बर्मन से म्यूजिक तैयार करवाया था।

एक पत्नी ने पति की प्रेमिका के लिए गाया ये गाना

गुरु दत्त की पत्नी गीता दत्त पति के नए प्यार वहीदा रहमान के बारे में जान चुकी थीं। वो जानती थीं कि पति गुरु दत्त की हर फिल्म की हीरोइन अब वहीदा क्यों हैं। इसके बावजूद उन्होंने फिल्म कागज के फूल के लिए गाना गया। एक ऐसा गाना जो हिंदी सिनेमा के इतिहास का सबसे दुखद गानों में से एक माना जाता है। कैफी आजमी के लिखे बोल और गीता दत्त की दर्दभरी आवाज में वो गाना था ‘वक्त ने किया ये हसीं सितम, तुम रहे न तुम, हम रहे न हम’। ये गाना उनके पति की प्रेमिका वहीदा रहमान पर फिल्माया गया था। गाने में एक बहुत ही इमोशनल सीन है, दो प्रेमी एक दूसरे के सामने होते हैं और बैकग्राउंड में प्रेमी की पत्नी की आवाज में ये दुखद गाना बजता है। ये स्थिति किसी के लिए भी समझ पाना मुश्किल होगी।

ये है एक अमर गीत

एक पत्नी ने अपने पति की प्रेमिका के लिए ये गाना फिल्म में रिकॉर्ड किया था। ये फिल्म तो फ्लॉप हो गई लेकिन ये गीत हमेशा के लिए अमर हो गया। साल 2006 में बेस्ट हिंदी सॉन्ग की एक लिस्ट में ये गाना नंबर 3 पर था। इसके अलावा ये फिल्म भी हिंदी सिनेमा के इतिहास की सबसे खास मानी जाती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN