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चना, मूंग, मसूर और अरहर, दाल कई तरह की होती हैं। लेकिन इन सब में से सबसे अच्छी दाल कौन सी है, ये सवाल अक्सर लोगों का बना रहता है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ शुभम वात्स्य ने सभी पॉपुलर दालों को 10 में से रेट किया है, आइए जानते हैं कौन सी बेस्ट है।
दाल भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है। दोपहर के लंच से ले कर डिनर तक, रोटी या चावल के साथ ज्यादातर घरों में दाल ही परोसी जाती है। ज्यादातर वेजिटेरियन लोगों के लिए भी दाल प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। लेकिन अब सवाल है कि कौन सी दाल सबसे अच्छी है? दाल कई तरह की होती हैं, जिनमें से कुछ आसानी से पच जाती हैं और कुछ को पचाना मुश्किल होता है। न्यूट्रिशन और प्रोटीन के मामले में भी दालें अलग-अलग होती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आपके लिए भला कौन सी दाल खाना सबसे बेहतर रहेगा। जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ शुभम वात्स्य ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए सभी दालों को 10 में से रेट किया है। आइए जानते हैं।
सबसे अच्छी दाल कौन सी है? डॉक्टर ने किया रेट
मूंग दाल- 9.5/10
मूंग दाल को डॉक्टर 10 में से 9.5 रेट करते हैं। ये काफी हल्की और आसानी से पचने वाली होती है। इसमें अच्छी क्वालिटी का प्लांट प्रोटीन और फाइबर का कॉम्बिनेशन होता है। जिन लोगों का गट सेंसेटिव है, उनके लिए भी ये एक अच्छा ऑप्शन है।
मसूर दाल- 9/10
डॉ शुभम कहते हैं कि मसूर दाल में प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही आयरन, फोलेट और पोटेशियम का भी ये अच्छा सोर्स है। कुल मिलाकर कहें तो ये रोजाना खाने के लिए एक शानदार ऑल राउंडर विकल्प है, क्योंकि इसमें कई पोषक तत्व बॉडी को मिल जाते हैं।
तूर/अरहर की दाल – 8.5/10
अरहर की दाल डेली डाइट में शामिल करने के लिए एक अच्छा ऑप्शन है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, फोलेट और बहुत सारे मिनरल्स मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
चने की दाल – 8.5/10
डॉक्टर कहते हैं कि चने की दाल में फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। साथ में आयरन, फोलेट और प्रोटीन भी मिलता है। हालांकि ज्यादा मात्रा में खाने पर कुछ लोगों में गैस और ब्लोटिंग की शिकायत भी हो सकती है। इसलिए क्वांटिटी का ध्यान रखना काफी जरूरी है।
उड़द दाल – 7/10
उड़द दाल को डॉ शुभम 10 में से 7 रेट करते हैं। ये प्रोटीन, फाइबर, आयरन और मैग्नीशियम से भरपूर होती है लेकिन बाकी दालों की तुलना में ये थोड़ी हेवी होती है। इसलिए सेंसेटिव गट यानी कमजोर पाचन वालों को ब्लोटिंग या गैस की शिकायत हो सकती है।
राजमा – 7.5/10
डॉ शुभम कहते हैं कि राजमा तकनीकी रूप से दाल नहीं, बल्कि लेग्यूम्स यानी फलियों की श्रेणी में आता है। हालांकि इसे इग्नोर भी नहीं किया जा सकता है। ये प्रोटीन, फाइबर और आयरन एब्जॉरपशन और पोटेशियम का शानदार ऑप्शन है। लेकिन ये पचाने में थोड़ा हेवी हो सकता है इसलिए कई लोगों में राजमा खाने के बाद गैस बनना कॉमन है।
डाइट में शामिल करें अलग-अलग दाल
डॉ शुभम वात्स्य कहते हैं कि दाल इंडियन डाइट में प्लांट बेस्ड प्रोटीन, फाइबर, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फोलेट और अन्य जरूरी पोषक तत्व शामिल करने का सबसे आसान विकल्प हैं। इसलिए अपनी डाइट में अलग-अलग तरीके की दालें शामिल करें क्योंकि हर दाल की न्यूट्रीशन प्रोफाइल अलग-अलग होती है।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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