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सब उसकी मर्जी से हुआ… 7 लड़कों ने की दरिंदगी, फिर छात्रा पर ही मढ़ा गया दोष; कॉर्नेल यूनिवर्सिटी का वो सच

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Source :- LIVE HINDUSTAN

‘छात्रा ने एक बीयर की बोतल खोली। इसके बाद वह एक आरोपी युवक के साथ डांस करने लगी। युवक उसे एक शांत जगह पर ले गया और 2 पुरुषों के साथ संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा।’

रात के करीब 2 बज रहे थे। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी का ‘ची फाई’ फ्रेटरनिटी हाउस बाहर से बिल्कुल शांत दिख रहा था। लेकिन अंदर एक 20 साल की छात्रा के साथ उस रात जो हुआ, उसने उसे जिंदगी भर के लिए झकझोर कर रख दिया। उस रात के कुछ घंटे धुंधले थे, लेकिन वहां जो खौफनाक घटना घटी वह उसके वजूद को हमेशा के लिए तोड़ देने के लिए काफी थी। शराब, गांजा और केटामाइन जैसी नशीली दवाओं के बीच, उसे बेसुध कर दिया गया। जब वह विरोध करने या चीखने तक की हालत में नहीं रही, तब एक के बाद एक सात लड़कों ने उसकी लाचारी और बेबसी का फायदा उठाया।

घटना के कुछ ही दिनों बाद वह अपनी बिखरी हुई जिंदगी को समेटने की कोशिश की। उसने पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। लेकिन एक हकीकत यह भी है कि जब कोई पीड़िता किसी गहरे सदमे से गुजरती है, तो उसके लिए उन काली रातों के एक-एक पल को शब्दों में पिरोना आसान नहीं होता। शुरुआत में पुलिस और यूनिवर्सिटी के सामने दिए गए बयानों में कई विरोधाभास आ गए। अपनी मानसिक स्थिति और डर के कारण वह कानूनी उलझनों में ऐसी उलझी कि उसकी ‘सहमति’ का ताना-बाना बुन लिया गया। न्यूयॉर्क राज्य के कानून में ऐसी खामी सामने आई, जिसने दरिंदों को बचाने और पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा करने का काम किया।

यूनिवर्सिटी प्रशासन, जिसे बच्चों के लिए एक महफूज आशियाना होना चाहिए था, उसने इस संगीन अपराध पर ऐसी असंवेदनशीलता दिखाई कि कुछ आरोपियों को महज ‘निबंध लिखने’ जैसी औपचारिक सजा देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई। छात्रा टूट चुकी थी। पढ़ाई बीच में छूट गई, सपने बिखर गए और वह गुमनामी के अंधेरे में चली गई। दो साल बीत गए। लेकिन जख्म नहीं भरा। पीड़िता ने हार नहीं मानी। अब उसने ‘जेन डो’ के नाम से यूनिवर्सिटी और उन सात आरोपियों के खिलाफ एक 101 पन्नों की याचिका दायर की है। उसने चिल्ला-चिल्लाकर दुनिया से कहा, “मैं 100 फीसदी यकीन से कह सकती हूं कि मेरे साथ गलत हुआ था, मैं उस रात न तो सोचने की स्थिति में थी और न ही बोलने की!”

लेकिन जब उसने इंसाफ की गुहार लगाई, तो कानूनी सिस्टम की संवेदनहीनता एक बार फिर सामने आ गई। सरकारी वकील ने पीड़िता के दो साल पुराने अधूरे बयानों को सार्वजनिक कर दिया और दावा किया कि सब कुछ सहमति से हुआ था। एक पीड़िता, जो पहले ही अपनी अस्मत और मानसिक शांति गंवा चुकी थी, उसे एक बार फिर समाज के सामने नंगा कर दिया गया। महिला अधिकार संगठनों और जनता ने इसे सीधे तौर पर ‘विक्टिम ब्लेमिंग’ की घिनौनी मानसिकता बताया है।

19 अक्टूबर 2024 की रात आखिर क्या हुआ था?

पीड़िता तब अंडरग्रेजुएट छात्रा थी। 19 अक्टूबर 2024 की रात वह ची फाई फ्रेटरनिटी हाउस में अपने एक पुरुष मित्र से मिलने पहुंची। आरोप है कि वहां उस लड़के ने उसे गांजा, शराब और ‘केटामाइन’ नाम का ड्रग्स दिया, जिससे वह पूरी तरह बेसुध हो गई। इस दौरान आरोपी ने फ्रेटरनिटी के ग्रुप चैट में अश्लील मैसेज भेजकर अन्य लड़कों को ऊपर कमरे में बुलाया। रात करीब 1:42 बजे से सुबह 5:45 बजे तक सात लड़कों ने बारी-बारी से बेसुध पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया।

पुराने बयान को कर दिया गया सार्वजनिक

मामले में आपराधिक केस ना दर्ज करने पर घिरे डीए मैथ्यू वैन हाउटन ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर पीड़िता का 6 पन्नों का पुराना बयान जारी कर दिया। डीए का कहना है कि नवंबर 2024 में पुलिस को दिए बयान में लड़की ने खुद अपनी मर्जी से नशा करने और तीन लोगों के साथ एकसाथ यौन संबंध में शामिल होने की बात कही थी। डीए का कहना है कि पुराने बयान में जबरन ड्रग्स देने या गैंगरेप का आरोप नहीं था, इसलिए तब केस नहीं बना।

लेकिन हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में लीक हुए चैट्स और पुलिस इंटरव्यू की ट्रांसक्रिप्ट ने डीए के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैंपस पुलिस के साथ इंटरव्यू की ट्रांसक्रिप्ट से खुलासा हुआ है कि लड़की ने पुलिस को साफ कहा था, “मैं 100% विश्वास के साथ कह सकती हूं कि मेरा रेप हुआ था।” उसने बताया कि ज्यादा नशे के कारण वह कोई फैसला लेने में हिचक रही थी और लड़कों ने उसकी स्थिति का फायदा उठाया।

यूनिवर्सिटी की ‘निबंध’ लिखने की सजा पर गुस्सा

पीड़िता के वकील थॉमस गिउफ्रा का आरोप है कि पुलिस और यूनिवर्सिटी ने आरोपियों को बचाने की कोशिश की। 7 में से केवल 2 आरोपियों को यूनिवर्सिटी से निकाला गया, जबकि बाकी को सस्पेंशन और यहां तक कि निबंध लिखने जैसी मामूली सजा दी गई। किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। अब न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल के दखल के बाद यूनिवर्सिटी स्वतंत्र बाहरी जांच के लिए तैयार हो गई है।

कानून को लेकर छिड़ी बहस

इस केस ने न्यूयॉर्क के कानून पर फिर से बहस छेड़ दी है। कानून के मुताबिक, अगर कोई पीड़ित अपनी मर्जी से अत्यधिक शराब या नशा कर लेता है और उस हालत में उसके साथ यौन संबंध बनाया जाता है, तो सहमति ना दे पाने के बावजूद दुष्कर्म का मुकदमा चलाना बेहद मुश्किल होता है। इसे ‘वॉलंटरी इंटॉक्सिकेशन लूपहोल’ कहा जाता है। फिलहाल चौतरफा दबाव के बाद डीए ने केस दोबारा खोल दिया है और वे इसे ग्रैंड जूरी के सामने ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN