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देश के करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सब्सक्राइबर्स से जुड़ी एक बड़ी खबर है। दरअसल, EPFO ने ‘सेंट्रलाइज्ड IT इनेबल्ड सर्विसेज’ (CITES) प्रोजेक्ट के तहत अपने सभी मेंबर्स का डेटाबेस एक सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर कर दिया है। इसके जरिए EPFO की सर्विसेज को ना सिर्फ रफ्तार मिलेगी बल्कि पारदर्शी भी रहेगा। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताय कि CITES प्रोजेक्ट यह उस पुराने सिस्टम की जगह ले रहा है जिसमें EPFO का हर फील्ड ऑफिस अपना अलग डेटाबेस रखता था। अब इसकी जगह एक ही सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म ने ले ली है। अब ईपीएफओ से जुड़े कई काम बेहद आसान हो गए हैं। आइए इसकी डिटेल जान लेते हैं।
क्या कुछ बदला?
CITES लागू होने के बाद EPFO मेंबर्स की सर्विस रिक्वेस्ट को देश में किसी भी अधिकृत जगह से प्रोसेस किया जा सकता है। केद्रीय मंत्री मंडाविया ने बताया, “EPFO मेंबर पोर्टल पर लॉग इन करने पर, सदस्यों को अपनी मेंबरशिप की जानकारी, प्रोविडेंट फंड बैलेंस, क्लेम का स्टेटस, पेंशन वाली सर्विस का रिकॉर्ड और लिए गए फायदों को देखने के लिए एक यूनिफाइड डिजिटल इंटरफेस मिलेगा। इससे उनके PF अकाउंट और क्लेम जमा करने के बारे में जानकारी पाने में आसानी होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।” बता दें कि पहले ऐसा नहीं था। पहले मेंबर्स की जानकारी अलग-अलग सिस्टम में बिखरी हुई होती थी और एक ही पोर्टल पर उपलब्ध नहीं थी।
अब सदस्यों के क्लेम प्रोसेस होने से पहले ऑटोमेटेड प्री-वैलिडेशन से गुजरते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “इसके तहत, किसी भी कमी या गड़बड़ी की पहचान पहले ही हो जाएगी और सदस्यों को सही सलाह दी जाएगी।
इससे क्लेम रिजेक्ट होने के मामलों में काफी कमी आएगी और पहली बार में ही क्लेम मंजूर होने की दर बेहतर होगी। सदस्य यह भी जान सकेंगे कि वे कितनी रकम निकालने के हकदार हैं। वे PF अकाउंट से अलग-अलग तरह से पैसे निकालने के लिए अप्लाई कर सकते हैं और सही फैसले ले सकते हैं।” पुराने सिस्टम की बात करें तो सदस्यों को अक्सर यह पता नहीं होता था कि वे अलग-अलग कैटेगरी में कितनी रकम निकाल सकते हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट हो जाते थे।
- ₹5 लाख तक के एडवांस क्लेम अब ऑटोमैटिक रूप से प्रोसेस किए जाएंगे। पहले ऑटो-सेटलमेंट की सीमा ₹1 लाख थी।
- EPFO ने क्लेम प्रोसेसिंग के लिए एक ऑनलाइन क्वेरी सिस्टम भी शुरू किया है। अगर और जानकारी या स्पष्टीकरण की जरूरत होगी, तो सदस्यों को ऑनलाइन सूचित किया जाएगा और वे डिजिटल रूप से जवाब दे सकेंगे।
- क्लेम का पेमेंट एक सेंट्रलाइज्ड पेमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा और इसे तेज इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट चैनलों से भेजा जाएगा। इससे यह पक्का होगा कि सेटलमेंट की रकम सुरक्षित और समय पर सीधे सदस्यों के बैंक अकाउंट में जमा हो जाए।
- PF सेटलमेंट पर ब्याज की गिनती अब पेमेंट मंज़ूरी की तारीख तक की जाएगी, न कि पिछले महीने के आखिरी दिन तक। इससे सदस्यों को बीच के समय का भी एक्स्ट्रा ब्याज मिल सकेगा।
- इसके अलावा, पैसे निकालने के प्रोसेस को समझने में आसान बनाने के लिए, पहले के 13 मुश्किल नियमों को तीन आसान कैटेगरी में बांटा गया है। वहीं, EPFO सदस्य अब अपने कुल PF बैलेंस का 75% तक निकाल सकेंगे।
- आधार से जुड़े यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) वाले PF अकाउंट अब नौकरी बदलने पर अपने-आप ट्रांसफर हो जाएंगे, जिससे अलग से ट्रांसफर एप्लीकेशन देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) के तहत पेंशनभोगियों को अब सर्विस या लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने के लिए किसी भी PF ऑफिस में जा सकते हैं। किसी भी रीजनल ऑफिस में प्रोसेस किए गए पेंशन क्लेम का पैसा भारत में कहीं भी किसी भी बैंक अकाउंट में जमा किया जा सकता है। पहले, पेंशनभोगी अपनी पेंशन सिर्फ उसी ब्रांच ऑफिस से ले सकते थे जिससे उनका पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जुड़ा होता था।
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