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स्मोकिंग से लेकर उंगलियां चटकाने तक, जोड़ों की बीमारी आर्थराइटिस से जुड़े 5 मिथ, जिनके बारे में डॉक्टर ने बताई सच्चाई

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Source :- LIVE HINDUSTAN

हड्डियों के जोड़ों में दर्द और सूजन आर्थराइटिस होता है और काफी सारे लोगों के मन में आर्थराइटिस को लेकर कई सारे भ्रम रहते हैं। ऐसे ही कुछ मिथ की सच्चाई बताई डॉक्टर अंकुर सिंह ने, आप भी जानें…..

हड्डियों के जोड़ों में दर्द और सूजन का मतलब आर्थराइटिस होता है। अक्सर लोगों को लगता है कि आर्थराइटिस बुढ़ापे की बीमारी है, जो उम्र बढ़ने पर आती है। लेकिन ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है क्योंकि आर्थराइटिस की समस्या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है और इसमे अलग-अलग समस्याएं हड्डियों के ज्वाइंट्स से जुड़ी हो सकती हैं। आर्थराइटिस से जुड़ी कई सारे भ्रम यानि मिथ भी लोगों के मन में होते हैं। जिनके बारे में ऑर्थोपेडिक स्पेशलिस्ट डॉक्टर अंकुर सिंह ने एचटी लाइफस्टाइल के साथ बातचीत में बताया। आर्थराइटिस से जुड़े 5 कॉमन मिथ है, जो अक्सर लोगों के मन में रहते हैं, आप भी जान लें…

स्मोकिंग का आर्थराइटिस से नहीं कोई कनेक्शन

लोगों को लगता है कि स्मोकिंग केवल फेफड़ों को बीमार करती है। जबकि ऐसा नहीं है, हकीकत में स्मोकिंग से ह्रयूमेटाइड आर्थराइटिस का रिस्क रहता है और धीरे-धीरे ये बीमारी और जोड़ों में सूजन बढ़ती चली जाती है। डॉक्टर का कहना है कि स्मोकिंग से टिश्यू में ब्लड सप्लाई कम हो जाती है, जिससे हड्डियों की हेल्थ खराब होती है और हड्डियों के ट्रीटमेंट का असर भी कम होता है। अगर जोड़ों की मजबूती चाहते हैं तो स्मोकिंग छोड़ना जरूरी है।

उम्र के साथ आता है आर्थराइटिस

काफी सारे लोगों को लगता है कि उम्र बढ़ने के साथ ही आर्थराइटिस आता है और इसे रोका नहीं जा सकता है। लेकिन डॉक्टर का कहना है कि कुछ टाइप के आर्थराइटिस का रिस्क उम्र के साथ बढ़ता है लेकिन ऐसा नहीं कि इसे झेला ना जा सके। अगर हेल्दी वेट मेटेंन रखा जाए, फिजिकली एक्टिव रहा जाए, चोट-चपेट से ज्वाइंट्स को प्रोटेक्ट किया जाए और सही समय पर सही मेडिकल एडवाइज ली जाए तो आर्थराइटिस के लक्षणों को कम किया जा सकता है और आराम से बढ़ती उम्र गुजारी जा सकती है।

एक्सरसाइज के ज्वाइंट्स डैमेज होते है

एक मिथ लोगों में देखा गया है कि लोग समझते हैं कि एक्सरसाइज करने से आर्थराइटिस ज्वाइंट्स डैमेज होते हैं, जबकि काफी सारी केसेज में सही एक्सरसाइज कराने पर आर्थराइटिस में फायदा होता है। स्विमिंग, साइकिलिंग, वॉकिंग, स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मसल्स की स्ट्रेंथ बढ़ाती है, फ्लेक्सिबिलिटी लाती है और साथ ही जोड़ों के मूवमेंट को भी सही रखती है। हालांकि ध्यान देन वाली बात है कि आपका एक्सरसाइज प्रोग्राम पूरी तरह से आपके आर्थराइटिस के दर्द के हिसाब से हो।

ज्वाइंट पेन है तो बेड रेस्ट करो

बूढ़े हो गए जोड़ों में दर्द हो रहा तो बेड रेस्ट करो, ये पूरी तरह से मिथ है। अगर लंबे टाइम तक बेड पर ही बैठे रहा जाए और इनएक्टिव रहे तो इससे हड्डियां स्टिफ हो जाती है, मसल्स कमजोर होती है और चलने फिरने में दिक्कत होती है। जब दर्द और सूजन बढ़ जाए तो थोड़े दिन के लिए एक्सरसाइज और एक्टीविटी में बदलाव ले आएं।

उंगलियां चटकाने से आर्थराइटिस हो जाता है

थकान महसूस होने पर उंगलियां चटकाते हैं और डर रहता है कि आर्थराइटिस ना हो जाए, डॉक्टर का कहना है उंगलियां चटकाने से आर्थराइटिस होगा ऐसा कोई केस या स्टडी नहीं है। इसलिए अगर आप हाथ की पैर की या फिर शरीर के किसी और अंग की हड्डियां चटकाते हैं तो उससे आर्थराइटिस नहीं होता।

ध्यान देने वाली बात है कि आर्थराइटिस में कई तरह की समस्याए होते हैं जैसे गाउट की समस्या,ह्रयूमेटाइट आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस,ऑटोइम्यून कंडीशन या फिर जोड़ों में किसी और तरह का दर्द या सूजन। इन सबका ट्रीटमेंट और सावधानी अलग-अलग होती है। जिसके बारे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN