Source :- LIVE HINDUSTAN

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अहमद अल-शरआ को हिजबुल्लाह के प्रति सख्त रुख रखने वाले नेता के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि शरआ हिजबुल्लाह को बिल्कुल पसंद नहीं करते और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को जी-7 शिखर सम्मेलन में हिजबुल्लाह को लेकर प्लान बी पेश किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने इजरायल को सुझाव दिया है कि अगर वह लेबनान की तेहरान समर्थित हिजबुल्लाह मिलिशिया के खिलाफ अभियान में हताहतों को रोक नहीं पाता है तो सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरआ इस काम को संभाल लें।’ ट्रंप ने शरआ की तारीफ करते हुए उन्हें अद्भुत काम करने वाला बताया। उन्होंने कहा, ‘अगर इजरायल बिना दूसरों को मारते हुए यह काम नहीं कर सकता, तो शरआ यह काम करेंगे। सीरिया यह काम करेगा।’ ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष में बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौत हो रही है।

डोनाल्ड ट्रंप ने शरआ को हिजबुल्लाह के प्रति कठोर रुख रखने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि शरआ हिजबुल्लाह को पसंद नहीं करते और उनके साथ अच्छा व्यवहार कर सकते हैं। पूर्व जिहादी पृष्ठभूमि वाले शरआ बशर अल-असद के पतन के बाद सत्ता में आए हैं। ट्रंप के अनुसार वह कोई बॉय स्काउट नहीं हैं, लेकिन वे इस काम के लिए सक्षम हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ बहुत लंबे समय से लड़ रहा है और इसमें बहुत अधिक लोग मारे जा रहे हैं।

इजरायल से क्या चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैंने इजरायल को सुझाव दिया कि सीरिया को हिजबुल्लाह से निपटने दें, क्योंकि ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि वे बेहतर काम करेंगे।’ यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और क्षेत्रीय शक्तियां एक-दूसरे के रुख पर नजर रखे हुए हैं। ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना भी की। हालिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप और नेतन्याहू के संबंधों में गिरावट आई है। ट्रंप ने कहा, ‘बीबी (नेतन्याहू) को लेबनान के मामले में ज्यादा जिम्मेदार होना चाहिए।’ उन्होंने इजरायल की रणनीति पर असंतोष जताते हुए कहा कि वे लेबनान और हिजबुल्लाह के साथ जिस तरीके से पेश आए हैं, उससे वे खुश नहीं हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि इजरायल को यह काम तेजी से पूरा करना चाहिए था। उनके अनुसार इजरायली अभियान में अनावश्यक देरी और हताहतों की संख्या बढ़ने से स्थिति जटिल हो गई है। यह बयान इजरायली नेतृत्व के लिए चुनौती भरा है, क्योंकि अमेरिका लंबे समय से इजरायल का प्रमुख सहयोगी रहा है। ट्रंप के इस सुझाव से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई दिशा मिल सकती है। सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद शरआ की भूमिका अहम हो गई है। अगर सीरिया हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करता है तो क्षेत्र में शक्ति संतुलन प्रभावित होगा।

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