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अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों ने SEBI को दिए ₹1.50 करोड़, क्या है मामला?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

बाजार नियामक सेबी ने संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन के खुलासे, ऑडिट और सीमित समीक्षा रिपोर्ट से जुड़े कथित नियम उल्लंघन के मामले में अडानी समूह की पांच कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही का सैटलमेंट कर दिया है। इस पांच कंपनियों में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अडानी टोटल गैस लिमिटेड, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड (पूर्व में अडानी विल्मर लिमिटेड), अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (पूर्व में अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड) शामिल हैं। अडानी की इन कंपनियों ने कुल 1.50 करोड़ रुपये का सैटलमेंट चार्ज दिया है। सैटलमेंट की शर्तों के तहत अडानी एंटरप्राइजेज ने 76.05 लाख रुपये और अडानी ग्रीन एनर्जी ने 45.50 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं, अडानी टोटल गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 9.75-9.75 लाख रुपये दिए।

क्या है मामला?

ये मामला सेबी की उस पड़ताल से जुड़ा था, जो अमेरिका के हिंडनबर्ग रिसर्च की जनवरी 2023 में प्रकाशित रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों और कॉरपोरेट संचालन से जुड़े मुद्दों की जांच के तहत की गई थी। इसमें सूचीबद्धता नियमों और तत्कालीन सूचीबद्धता समझौते के संभावित उल्लंघनों की भी जांच की गई थी। बाजार नियामक ने फरवरी, 2024 में इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि कथित उल्लंघनों के संबंध में जांच क्यों न की जाए और जुर्माना क्यों न लगाया जाए।

अडानी एंटरप्राइजेज पर आरोप क्या था?

समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज पर आरोप था कि उसने वित्त वर्ष 2012-13 की वार्षिक रिपोर्ट में अपनी सब्सिडयरी अडानी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित पक्ष वाकोडर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के बीच कुछ संबंधित-पक्ष लेनदेन का खुलासा लागू लेखा मानकों के तहत नहीं किया था। आरोप था कि कंपनी की वित्त वर्ष 2014-15 की ऑडिट रिपोर्ट और जून, 2015 तिमाही की सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर ऐसी ऑडिट फर्म ने हस्ताक्षर किए थे जिसके पास वैध पीयर रिव्यू प्रमाणपत्र नहीं था। कंपनी की जून, 2017, सितंबर, 2017 और दिसंबर, 2021 तिमाहियों की सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर भी ऐसी ही ऑडिट फर्म ने हस्ताक्षर किए थे। अडानी टोटल गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस से जुड़ी कार्यवाही भी ऐसी ऑडिट या सीमित समीक्षा रिपोर्ट से संबंधित थी, जिन पर वैध प्रमाणपत्र नहीं रखने वाली ऑडिट फर्म ने हस्ताक्षर किए थे।

सेबी के आदेश के मुताबिक, इन कंपनियों ने तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों और कानूनी निष्कर्षों को स्वीकार या खारिज किए बिना मामला निपटाने का प्रस्ताव दिया था। सेबी की उच्चाधिकार-प्राप्त सलाहकार समिति ने जून, 2026 में निपटान की शर्तों की अनुशंसा की थी, जिसे 13 अगस्त को पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल ने मंजूरी दी थी।

इसके पहले सितंबर, 2025 में सेबी ने हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में लगाए गए हेरफेर के आरोपों की जांच के बाद कहा था कि उसे अडानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों में फंड भेजने के लिए संबंधित पक्षों के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN