Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारत की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की उस याचिका पर विचार करने से मना कर दिया, जिसमें उसने DXC टेक्नोलॉजी के पक्ष में दिए गए 16.8 करोड़ डॉलर के हर्जाने को चुनौती दी थी। इस मामले की जड़ में जीवन बीमा से जुड़े सॉफ्टवेयर के ट्रेड सीक्रेट्स की कथित चोरी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
दरअसल, डीएक्ससी की पूर्ववर्ती कंपनी कंप्यूटर साइंसेज कॉर्प (CSC) ने 1990 के दशक में बीमा कंपनी ट्रांसअमेरिका को अपना सॉफ्टवेयर लाइसेंस दिया था। साल 2019 में डलास की एक फेडरल कोर्ट में दायर मुकदमे में डीएक्ससी ने आरोप लगाया कि टाटा ने ट्रांसअमेरिका के 2,200 कर्मचारियों को नौकरी पर रख लिया और उनके जरिए सीएससी के सॉफ्टवेयर तक मौजूदा पहुंच तथा मालिकाना जानकारी का इस्तेमाल कर एक प्रतिस्पर्धी लाइफ इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया।
टाटा आरोपों से करता रहा है इनकार
दूसरी ओर, टाटा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। कंपनी ने अदालत को बताया कि विवादित जानकारी कोई सीक्रेट नहीं थी और उसने संबंधित सॉफ्टवेयर तक कानूनी रूप से पहुंच बनाई थी।
जूरी की सलाह और जज का फैसला
वर्ष 2023 में एक जूरी ने अपने फैसले में कहा कि टाटा ने जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स चुराए, इसलिए उसे डीएक्ससी को 21 करोड़ डॉलर का भुगतान करना चाहिए। हालांकि, यह एक गैर-बाध्यकारी सलाह थी।
अमेरिकी जिला जज ब्रैंटली स्टार ने 2024 में इस प्रस्तावित हर्जाने को घटाकर 16.8 करोड़ डॉलर कर दिया। इस राशि में 5.6 करोड़ डॉलर हर्जाना और 11.2 करोड़ डॉलर दंडात्मक हर्जाना शामिल था। न्यू ऑरलियन्स स्थित पांचवीं सर्किट अपील कोर्ट ने 2025 में जज स्टार के इस फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट में टाटा की दलील
टाटा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया कि अमेरिकी कानून के तहत डीएक्ससी को केवल अन्यायपूर्ण एनरिचमेंट के आधार पर हर्जाना नहीं मिलना चाहिए था, जब तक कि वह यह साबित न करती कि उसे वास्तविक नुकसान भी हुआ है। कंपनी का यह भी कहना था कि दंडात्मक हर्जाने की रकम बहुत ज्यादा है और इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।
DXC का पक्ष और अंतिम रिजल्ट
वहीं डीएक्ससी की ओर से कहा गया कि अपील अदालत ने पहले से तय कानूनी सिद्धांतों को तथ्यों पर सही तरीके से लागू किया है, इसलिए इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के और हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई से इनकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को अंतिम रूप दे दिया। अब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को डीएक्ससी टेक्नोलॉजी को पूरे 16.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करना होगा।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN







