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‘अस्सलामु अलैकुम’ और ‘इंशाअल्लाह’ कहने पर महिला अधिकारी के ट्रांसफ़र का आरोप, क्या है पूरा मामला

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Source :- BBC INDIA

विवाद के बीच 2021 बैच की आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी बुशरा बानो का तबादला किया गया (फ़ाइल फ़ोटो)

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पढ़ने का समय: 7 मिनट

पश्चिम बंगाल की महिला आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो इन दिनों चर्चा में हैं. बीते दिनों सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उनके ‘अस्सलामु अलैकुम’, ‘इंशाअल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे इस्लामी अभिवादन और शब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद हुआ. और इसी बीच उनका तबादला कर दिया गया.

14 सितंबर के सरकारी आदेश के मुताबिक़, 2021 बैच की आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी बुशरा बानो को पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की ज़िम्मेदारी से हटाकर राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन का डिप्टी कमांडेंट बनाया गया है.

इसी आदेश में दो और पुलिस अधिकारियों के तबादले का ज़िक्र है. सरकारी आदेश में इन तबादलों को ‘जनहित में’ लिया गया प्रशासनिक फ़ैसला बताया गया है.

सरकारी अधिकारियों ने इसे ‘रूटीन ट्रांसफ़र’ बताया है. लेकिन इंडियन सेक्युलर फ़्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीक़ी का आरोप है कि बुशरा बानो को ग़लत तरीके से ‘गैरेज पोस्टिंग’ दी गई है. यानी उन्हें ऐसी ज़िम्मेदारी दी गई है, जिसे उनकी पिछली पोस्टिंग की तुलना में कम अहम माना जा रहा है.

कुछ दिन पहले बुशरा बानो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इसमें उन्हें भारत की प्रतियोगी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के बारे में बात करते सुना जा सकता है.

उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेज़िडेंशियल कोचिंग एकेडमी अल्पसंख्यक समुदाय, महिलाओं और अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की मदद करती है.

उन्होंने यह भी बताया कि बतौर पूर्व छात्रा इस कोचिंग एकेडमी ने उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में काफ़ी मदद की थी.

इस वीडियो में उनकी बातों को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि वर्दी पहने एक सरकारी अधिकारी सार्वजनिक तौर पर ‘अस्सलामु अलैकुम’, ‘इंशाअल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल कर सकती हैं या नहीं.

कुछ लोगों ने यह भी सवाल किया कि उन्होंने ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम्’ जैसे अभिवादन का इस्तेमाल क्यों नहीं किया.

'हिंदू लीगल फ़ंड' नाम के एक संगठन ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव से बुशरा बानो के ख़िलाफ़ शिकायत की है

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‘अस्सलामु अलैकुम’ या ‘इंशाअल्लाह’ क्यों, ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम्’ क्यों नहीं?

वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. हालांकि, न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में इस वीडियो का ज़िक्र बुशरा बानो की सोशल मीडिया पोस्ट के तौर पर किया गया है. अब बुशरा बानो के सोशल मीडिया अकाउंट पर यह वीडियो नहीं मिल रहा है.

सुदर्शन न्यूज़, जयपुर डायलॉग्स समेत कुछ हिंदुत्ववादी प्लेटफ़ॉर्म पर भी इस वीडियो को लेकर चर्चा और आलोचना हुई.

‘हिंदू लीगल फ़ंड’ नाम के एक संगठन ने 13 सितंबर को एक्स पर बताया कि उसने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव से बुशरा बानो के ख़िलाफ़ शिकायत की है और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है.

13 सितंबर को हिंदू लीगल फ़ंड के एक्स हैंडल पर लिखा गया, “उन्होंने अपनी बात ‘अस्सलामु अलैकुम’ से शुरू की, ‘इंशाअल्लाह’ का इस्तेमाल किया और ‘जज़ाकल्लाह’ कहकर अपनी बात ख़त्म की. लेकिन ‘वंदे मातरम्’ या ‘जय हिंद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया.”

पोस्ट में आगे लिखा गया, “भारतीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक सरकारी अधिकारी को निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए और सार्वजनिक संवाद में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए, जो राष्ट्रीय भावना को दर्शाते हों. इस मामले की उचित समीक्षा और कार्रवाई का अनुरोध किया जाता है.”

इसके अगले ही दिन, 14 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार के गृह विभाग ने बुशरा बानो के तबादले का आदेश जारी किया.

दोनों घटनाओं के बीच सिर्फ़ एक दिन का अंतर होने के कारण सवाल उठ रहे हैं कि क्या बुशरा बानो के तबादले का हिंदुत्ववादी संगठन की शिकायत से कोई संबंध है.

ट्रांसफ़र के बारे में जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से पूछा गया, तो उन्होंने बीबीसी से कहा, “इस तरह के तबादले एक सामान्य प्रक्रिया हैं और किसी भी समय किए जा सकते हैं. इस तबादले के आदेश का किसी हालिया विवाद से कोई संबंध है या नहीं, इस पर मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता.”

इंडियन सेक्युलर फ़्रंट (आईएसएफ़) के विधायक नौशाद सिद्दीक़ी (फ़ाइल फ़ोटो)

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विपक्ष का दावा- ‘मुस्लिम महिला होने की वजह से हुआ ट्रांसफ़र’

एक तरफ़ जहां हिंदुत्ववादी संगठन सोशल मीडिया पर बुशरा बानो के भाषण पर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं ऑनलाइन कई मुस्लिम संगठनों ने उनके तबादले पर सवाल उठाए हैं.

बुशरा बानो के वायरल वीडियो के अलावा अब दूसरे राज्यों के कई पुलिस अधिकारियों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं. इनमें उन्हें वर्दी में पूजा के कार्यक्रमों में शामिल होते देखा जा सकता है. इन वीडियो को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है. हालांकि, बीबीसी ने इन वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की है.

पश्चिम बंगाल के विपक्षी विधायक नौशाद सिद्दीक़ी सवाल उठा रहे हैं कि एक तरफ़ बीजेपी सरकार राज्य में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करते हुए यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू करने का प्रस्ताव रख रही है.

वहीं, एक ऐसी मुस्लिम महिला अधिकारी का ‘ग़लत तरीके से’ तबादला किया जा रहा है, जो ‘पढ़ी-लिखी और प्रतिष्ठित पद पर सम्मान के साथ नौकरी कर रही हैं’.

उनका दावा है, “उन्होंने सिर्फ़ तीन शब्दों का इस्तेमाल किया है. इन शब्दों से किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को ठेस नहीं पहुंचती. ये शब्द देश-विरोधी भी नहीं हैं.”

राजनीतिक दल ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम या ‘मीम’) के प्रवक्ता और पूर्व विधायक वारिस पठान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से सवाल किया, “क्या इसलिए कि वो एक मुस्लिम आईपीएस अधिकारी हैं, एक महिला हैं, आपने उनका तबादला कर दिया?”

वो आगे कहते हैं, “हमने देखा है कि कितने लोगों ने वर्दी पहनकर पूजा-आरती की है. कितने लोगों को वर्दी में कांवड़ियों पर फूल बरसाते देखा गया है. तब किसी ने आपत्ति नहीं की?”

उनका दावा है कि भारत के संविधान में लोगों को ‘जय हिंद’ कहने का अधिकार है, तो उसी तरह ‘अस्सलामु अलैकुम’ कहने का भी अधिकार है.

बुशरा बानो के तबादले को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “एक तरफ़ ब्रिक्स सम्मेलन में ‘प्रार्थना कक्ष’ बनाकर बीजेपी सरकार धर्मनिरपेक्ष छवि पेश कर रही है. दूसरी तरफ़ सिर्फ़ ‘अस्सलामु अलैकुम’ और ‘जज़ाकल्लाह’ कहने की वजह से मुस्लिम महिला आईपीएस अधिकारी डॉ. बुशरा बानो को किनारे किया जा रहा है. इससे ‘गोदी मीडिया’ की ओर से फैलाए जा रहे नफ़रत के माहौल को और बढ़ावा मिल रहा है.”

वहीं, वर्दी में रहते हुए नियम-कायदों को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जगमोहन भट्ट ने बीबीसी से कहा कि अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने अधिकारियों को ‘जय हिंद’ के अलावा कोई और अभिवादन करते हुए कभी नहीं सुना.

उन्होंने कहा, “राज्य पुलिस हो, सेना हो या सीमा सुरक्षा बल, किसी भी सरकारी एजेंसी या फ़ोर्स में वर्दी पहने अधिकारी आम तौर पर ‘जय हिंद’ कहते हैं. वर्दी में रहते हुए यही सबसे आम अभिवादन है. नौकरी के दौरान हम हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि किसी भी धार्मिक बात, जैसे ‘जय श्री राम’ या ‘राधे राधे’, या धार्मिक झंडे या चिह्न का इस्तेमाल न करें.”

बुशरा बानो

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कौन हैं बुशरा बानो?

बुशरा बानो की लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के मुताबिक़, उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मानव संसाधन प्रबंधन में पीएचडी की है. पुलिस प्रशासन में शामिल होने से पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी कलेक्टर के तौर पर काम किया था.

उन्होंने ‘यूपीएससी सिविल सर्विसेज़ परीक्षा’ दो बार पास की है. पहली बार परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने इंडियन रेलवे ट्रैफ़िक सर्विस में काम किया. दूसरी बार परीक्षा पास करने के बाद वह फ़िलहाल पश्चिम बंगाल पुलिस में हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS