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चेतावनी: इस स्टोरी के कुछ विवरण पाठकों को विचलित कर सकते हैं.
भारत के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में से एक आईआईटी दिल्ली में एमएससी फ़िज़िक्स के एक छात्र की कथित आत्महत्या के बाद शुरू हुए प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी हैं.
मंगलवार देर रात तक सैकड़ों विद्यार्थी प्रदर्शन और नारेबाज़ी करते रहे. विद्यार्थियों ने आईआईटी कैंपस में कैंडल मार्च भी निकाला. बुधवार को भी विद्यार्थियों का प्रोटेस्ट जारी रहा.
आईआईटी प्रशासन ने बाहरी लोगों के कैंपस में दाख़िल होने पर रोक लगा दी है और मीडिया को भी कैंपस में दाख़िल नहीं होने दिया जा रहा है.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की ‘जीवन आस्था’ हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
इसी बीच, कैंपस के कई हिस्सों में सुरक्षा सख़्त की गई है और सेमिनार हॉल में फ़ुल फ़ैकल्टी मीटिंग भी बुलाई गई.
विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद आईआईटी प्रशासन ने 31 साल के एमएससी फ़िज़िक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्य बाहरी जांच समिति गठित की है और दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है.
प्रदर्शनकारी स्टूडेंट की क्या हैं मांगें

ऋषिकेश कुमार की शनिवार को आईआईटी कैंपस में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. ख़बरों के मुताबिक़, उन्होंने कैंपस में आत्महत्या की थी.
आईआईटी प्रशासन के अभी तक के जवाबों से प्रदर्शनकारी स्टूडेंट संतुष्ट नहीं हैं.
आईआईटी दिल्ली प्रशासन के जवाब से असंतुष्ट विद्यार्थियों ने 24 अगस्त की देर रात हुई बैठक में प्रशासन के रुख़ को “अपर्याप्त और टालमटोल वाला” बताया है.
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने एक बयान जारी कर ऋषिकेश की मौत को केवल उनकी मेडिकल हिस्ट्री तक सीमित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि उनके परिवार, दोस्तों और सहपाठियों ने प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता के जो आरोप लगाए हैं उनकी भी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए.
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने बाहरी जांच समिति के गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसकी अध्यक्षता किसी रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश से कराने और विद्यार्थी प्रतिनिधियों के नाम प्रदर्शनकारियों द्वारा सामूहिक रूप से तय किए जाने की मांग की है.
इसके अलावा विद्यार्थियों ने ऋषिकेश के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग को दोहराया है.
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मौजूदा प्रोटोकॉल को सार्वजनिक करने, एसोसिएट डीन स्टूडेंट वेलफ़ेयर प्रोफ़ेसर श्रीदेवी के इस्तीफ़े और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के ख़िलाफ़ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई की गारंटी न होने की मांग दोहराई है.
स्टूडेंट्स का कहना है कि इन मांगों पर स्पष्ट और संतोषजनक जवाब मिलने तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
ऋषिकेश की मौत का पूरा मामला
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मूल रूप से बिहार के रहने वाले 31 साल के ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में एमएससी फ़िज़िक्स में दाख़िला लिया था.
इससे पहले उन्होंने पाटलीपुत्र यूनिवर्सिटी से बीएससी फ़िज़िक्स और एनआईटी राउरकेला से बीटेक किया था.
आईआईटी में दाख़िले के लिए हुई एंट्रेंस परीक्षा में ऋषिकेश ने 40वीं रैंक हासिल की थी.
ऋषिकेश कुमार का पहले सेमेस्टर में प्रदर्शन अच्छा रहा था. आईआईटी दिल्ली के मुताबिक़, मार्च 2026 में उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी थीं.
फ़िलहाल वह आईआईटी कैंपस के बाहर अपनी मां के साथ रह रहे थे. कुमार ने 22 अगस्त को आईआईटी परिसर में ही कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी.
पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. दिल्ली पुलिस ने अब अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है.
विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन

आईआईटी दिल्ली में जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं उनके केंद्र में ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या का मामला ही है. इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल ऋषिकेश की मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर है.
आईआईटी डायरेक्टर के प्रदर्शनकारी स्टूडेंट को लिखे ईमेल के मुताबिक़, “मार्च 2026 में ऋषिकेश को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं और संस्थान के काउंसलर और मनोवैज्ञानिक ने उन्हें लगातार अभिभावकीय निगरानी में रहने की सलाह दी थी.”
ईमेल मुताबिक़, “उनके जुलाई में परिसर लौटने के बाद भी यह सलाह दोहराई गई और उनके तीसरे सेमेस्टर छोड़ने को मंज़ूरी दी गई.”
“जुलाई में लौटने के बाद उनके मेडिकल रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा की गई और फिर से अभिभावकीय निगरानी की सलाह दी गई.”
“मौत के समय ऋषिकेश अपनी मां के साथ कैंपस से बाहर रह रहे थे और फ़िज़िक्स विभाग ने उनके मौजूदा सेमेस्टर से बाहर रखने का अनुरोध भी मंज़ूर कर दिया था.”
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का आरोप है कि ऋषिकेश कुमार को संस्थान की तरफ़ से पर्याप्त सहायता नहीं मिली और उन्हें दोबारा से हॉस्टल भी नहीं दिया गया था.
हालांकि इन आरोपों पर आईआईटी ने जवाब नहीं दिया है और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
आईआईटी का अभी तक दिया गया जवाब

ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली प्रशासन ने बाहरी जांच समिति गठित करने, बेनेवोलेंट फ़ंड के ज़रिए आर्थिक सहायता देने और विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों से स्वैच्छिक योगदान के लिए अलग फ़ंड बनाने की घोषणा की है.
हालांकि, प्रशासन ने विद्यार्थियों के इस्तीफ़े और निश्चित मुआवज़े से जुड़ी मांगों को स्वीकार नहीं किया है.
बुधवार को हुई बैठक में विद्यार्थियों ने प्रशासन के जवाब को “अपर्याप्त और टालमटोल वाला” बताते हुए आंदोलन जारी रखने का फ़ैसला किया.
विद्यार्थियों ने समिति में पूर्व उत्तराखंड डीजीपी अशोक कुमार को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई थी. बाद में अशोक कुमार ने समिति की अध्यक्षता से खुद को अलग कर लिया. संस्थान अब समिति का नया अध्यक्ष तय करेगा.
आईआईटी निदेशक प्रोफ़ेर रंगन बानर्जी का कहना है कि समिति ऋषिकेश की मौत तक पहुंचने वाली परिस्थितियों की जांच करेगी और दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी.
संस्थान ने परिवार के चिकित्सा ख़र्च की प्रतिपूर्ति, बेनेवोलेंट फंड से सहायता, लंबित शिकायतों के लिए बाहरी ओम्बड्सपर्सन और विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहयोग देने के लिए फैकल्टी-मेंटर व्यवस्था का भी प्रस्ताव दिया है.
लेकिन विद्यार्थी इस मेंटर सिस्टम को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं और उनका कहना है कि उन्हें “साथियों तक पहुंच, ट्रांस्पेरेंट अकादमिक अवसर और एक सहयोगी एवं संवेदनशील कैंपस” चाहिए.
आईआईटी दिल्ली में कैसा है माहौल?

मीडिया या बाहरी लोगों के आईआईटी कैंपस में प्रवेश पर रोक है. पूछताछ और जांच के बाद ही किसी भी वाहन या व्यक्ति को कैंपस में दाख़िल होने दिया जा रहा है.
कैंपस के भीतर विद्यार्थियों का प्रदर्शन जारी है जबकि चुनिंदा स्टूडेंट बाहर आकर मीडिया से बात कर रहे हैं.
भारत के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में शामिल आईआईटी दिल्ली में पहले भी प्रदर्शन हुए हैं लेकिन इस बड़े पैमाने पर प्रोटेस्ट असामान्य हैं.
मंगलवार दोपहर पांच सौ से अधिक स्टूडेंट संस्थान के सेमिनार हॉल के बाहर जुटे रहे और रह-रहकर यहां नारेबाज़ी होती रही. कई प्रोफ़ेसर ने विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश भी की.
बीटेक के एक स्टूडेंट ने अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए कहा, “एमएससी फ़िज़िक्स के स्टूडेंट की आत्महत्या एक ट्रिगर प्वाइंट है, इसलिए प्रोटेस्ट हो रहे हैं. समस्याएं इससे कहीं ग़हरी है. कई विद्यार्थियों को लगता है कि एडमिनिस्ट्रेशन उनकी नहीं सुनता है.”
एक छात्रा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “मैं ख़ुद इस तरह के अनुभव से गुज़री हूं, मानसिक अवसाद की स्थिति में सपोर्ट हासिल करना मुश्किल हो जाता है.”
पीएचडी स्कॉलर मनीष ने बीबीसी से कहा, “जो छात्र मानसिक रूप से परेशान है उनकी पहचान के लिए एक सॉफ्ट सेल बनाया जाए, अगर ये ज़रूरत महसूस हो कि उन्हें परिजनों के साथ रहना है तो उनके परिजनों के साथ रहने की व्यवस्था पर विचार होना चाहिए.”
वहीं एक और पीएचडी स्कॉलर शेखर ने बीबीसी से कहा, “कैंपस में प्रोफ़ेसर विद्यार्थियों का ध्यान रखते हैं, प्रशासन भी बात कर रहा है लेकिन अभी ऐसा लगता है कि और अधिक क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है. जैसे छात्रों की एक बॉडी है, प्रोफ़ेसर्स की एक बॉडी है ऐसी ही एक और बॉडी होनी चाहिए जिसके सामने अपनी बात रखने में छात्र सहज हों, एक सॉफ़्ट कम्यूनिकेशन कॉरिडोर होना चाहिए.”
प्रोटेस्ट में शामिल बीटेक स्टूडेंट सक्षम ने बीबीसी से कहा, “अगर कोई स्टूडेंट अपनी जान देने के लिए तैयार है तो इसका यही मतलब है कि वो बहुत दुखी है और उसका सिस्टम में भरोसा नहीं रह गया है. आगे किसी और स्टूडेंट के साथ ऐसा ना हो इसलिए ही हम प्रोटेस्ट नहीं कर रहे हैं और जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होता है हम प्रोटेस्ट जारी रखेंगे.”
आत्महत्या का प्रयास करने वाले स्टूडेंट का अनुभव
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ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य और स्टूडेंट सहायता व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
इसी बीच, इस संस्थान के एक ऐसे छात्र ने बीबीसी से अपनी कहानी साझा की है, जिसने ख़ुद आत्महत्या की कोशिश की थी.
छात्र ने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर बीबीसी से बातचीत में बताया कि संकट के शुरुआती दिनों में संस्थान का रवैया मदद करने वाला था, लेकिन बाद में उसे लगा कि यही व्यवस्था उसके लिए दबाव का कारण बन गई.
2025 में आत्महत्या का प्रयास करने वाले इस छात्र ने बीबीसी से कहा, “शुरुआत में संस्थान ये दिखाता है कि वह आपकी मदद करेगा लेकिन बाद में आपको पता चलता है कि संस्थान ब्लफ़ कर रहा था.”
इस छात्र ने बीबीसी से कहा, “शुरुआती सपोर्ट के बाद संस्थान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मैं कैंपस छोड़ दूं और अपने परिजनों के साथ रहूं.”
बीबीसी से बातचीत में इस छात्र ने दावा किया कि उसके परिजनों से एडमिन स्टाफ़ ने कहा था, “आपसे एक बच्चा नहीं संभाला जा रहा, हम हज़ारों को संभालते हैं, अगर आपके बच्चे ने कुछ किया तो ये आपकी वजह से होगा.”
बीबीसी से बात करते हुए इस छात्र ने कहा, “मैंने जेईई के लिए बहुत तैयारी की थी, बहुत सख्त अनुशासन में रहा था. तब लगता था कि कॉलेज जाऊंगा तो लाइफ़ थोड़ी बेहतर होगी लेकिन यहां आकर पता चला कि यहां कंपटीशन और दबाव और भी ज़्यादा है. इसी दबाव में मैंने सुसाइड का प्रयास किया था.”
इस छात्र ने बीबीसी से कहा, “एडमिन ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि मैं कैंपस में बहुत तनाव में हूं और कैंपस छोड़कर बाहर जाकर हील करूं, मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझे सपोर्ट करने के बजाए संस्थान मुझसे पीछा छुड़ाना चाहता है.”
अभी ये छात्र आईआईटी में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए है. लेकिन इस छात्र ने एक दस्तावेज़ (नोटिस) बीबीसी को दिखाया है जो इसे दिया गया था.
छात्र ने बीबीसी से कहा, “मेरे डॉक्यूमेंट में बहुत सारे क्लॉज़ हैं. जैसे सातवां क्लॉज़ है कि अगर आपने हमारे इंस्ट्रक्शन को फॉलो नहीं किया तो आईआईटी मेरे मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए हर ज़रूरी क़दम उठाएगा. ये थोड़ा ब्लैंक चेक जैसा पॉइंट है”.
छात्र ने कहा, “इसका इनडायरेक्ट मतलब ये है कि अगर आपने हमारी बात नहीं मानी तो हम जो मन चाहे वो कर सकते हैं, आपको सस्पेंड भी करा सकते हैं. लेकिन थैंकफुली मैंने उस डॉक्यूमेंट को साइन नहीं किया था.”
बीबीसी ने इस छात्र के आरोपों पर आईआईटी के जनसंपर्क अधिकारी के ज़रिए प्रशासन का जवाब जानना चाहा लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
हमने जनसंपर्क कार्यालय के लैंडलाइन पर फ़ोन कॉल किया तो हमें कहा गया कि इस विषय पर बात करने के लिए कोई उपलब्ध नहीं है.
महत्वपूर्ण नोट:
मानसिक बीमारियों का इलाज दवा और थेरेपी से किया जा सकता है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए.
अगर आप या आपका कोई परिचित इस प्रकार की मानसिक बीमारियों के लक्षणों का अनुभव कर रहा है, तो आप सहायता के लिए इस हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं.
हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई – 022-24131212
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय – 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान – 9868396824, 9868396841, 011-22574820
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान – 080-26995000
विद्यासागर इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेज़, 24×7 हेल्पलाइन- 011-2980 2980
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