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‘ आपन े गलत नंबर डायल किय ा है, जाइए और जाकर विरोध-प्रदर्शन कीजिए’, CJI सूर्यकांत न े किस े द ी सलाह?

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Source :- INDIATV NEWS

भारत क े मुख्य न्यायाधीश ( CJI ) सूर्यकांत न े एक याचिकाकर्त ा क ो हाज़िरजवाब ी भर ा जवाब दिय ा और कहा,” आप गलत नंबर डायल कर रह े हैं । यह विरोध-प्रदर्शन और नारेबाज ी करन े क ा अच्छ ा मौसम है । आप भ ी ऐस ा कर सकत े हैं ।” दरअसल, सुप्रीम कोर्ट मे ं एक याचिकाकर्त ा न े अनुसूचित जात ि (SC ) और अनुसूचित जनजात ि (ST ) क े लिए आरक्षित सीटो ं क ो रोटेट ( बारी-बार ी स े बदलने ) करन े क ी मांग क ी थी । इस पर सुप्रीम कोर्ट न े सुझाव दिय ा क ि इस मुद्द े क ो न्यायपालिक ा क े बजाय कानून बनान े वालो ं ( विधायकों/सांसदों ) क े सामन े उठाय ा जान ा चाहिए । पीठ न े कह ा क ि यह मामल ा विधायिक ा और संवैधानिक प्राधिकरणो ं क े दायर े मे ं आत ा है, और अनुच्छेद 32 क े तहत दायर याचिक ा क े जरिए इसक ा समाधान नही ं किय ा ज ा सकता।

सीजेआई न े कहा-थोड़ ी हिम्मत जुटाए ं

अनुसूचित जात ि (SC ) और अनुसूचित जनजात ि (ST ) क े लिए आरक्षित सीटो ं क ो रोटेट करन े वाल ी याचिक ा क ी सुनवाई क े दौरान CJI कांत न े कहा,” थोड़ ी हिम्मत जुटाएं, अपन ी आवाज ़ उठाए ं और कहे ं क ि अब समय आ गय ा ह ै क ि विधायिक ा इस दिश ा मे ं कुछ कदम उठाए ।” उन्होंन े यह भ ी संकेत दिय ा क ि यह मामल ा मूल रूप स े विधायिक ा क े निर्णय स े जुड़ ा है, इसलिए अदालत इसमे ं दखल नही ं द े सकती । बाद में, CJI और जस्टिस जॉयमाल्य बागच ी क ी एक बेंच न े उस अपील क ो खारिज कर दिया, जिसमे ं SC/ST निर्वाचन क्षेत्रो ं क े लिए बिन ा रोटेशन ( बारी-बार ी स े बदलाव ) क े आरक्षण जार ी रखन े क ो चुनौत ी द ी गई थी।

किस याचिक ा पर हुई सुनवाई
याचिकाकर्त ा न े तर्क दिय ा क ि कई निर्वाचन क्षेत्र 1972 स े ह ी आरक्षित चल े आ रह े हैं, और रोटेशन न होन े क ी वजह स े एक ह ी परिवार क े तीन-चार लोग बार-बार चुनाव लड़त े आ रह े हैं । याचिक ा मे ं परिसीमन आयोग की 2008 क ी रिपोर्ट क ी सिफारिशो ं क ा हवाल ा देत े हुए, आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रो ं मे ं समय-समय पर बदलाव ( रोटेशन ) क ी मांग क ी गई थी । याचिकाकर्त ा क ा तर्क थ ा क ि कई दशको ं तक निर्वाचन क्षेत्रो ं क ो एक ह ी समुदाय क े लिए आरक्षित रखन े स े मतदाताओ ं क े विकल्प सीमित ह ो जात े है ं और उनक े मतदान क े अधिकार क ा महत्व कम ह ो जात ा है।

‘ तीसर े सदन क ी भूमिक ा नही ं निभ ा सकत े ‘
जस्टिस बागच ी न े कह ा क ि निर्वाचन क्षेत्रो ं क ा आरक्षण एक ऐस ा विषय ह ै जिस पर संवैधानिक प्राधिकरणो ं और विधायिक ा क ो विचार करन ा चाहिए । उन्होंन े कह ा क ि भल े ह ी मतदाताओ ं क े पास सीमित विकल्प हों, लेकिन उनक ा वोट देन े क ा मौलिक अधिकार उनस े छीन ा नही ं गय ा है । उन्होंन े याचिकाकर्त ा क े वकील स े कहा,” विकल्प सीमित ह ो सकत े हैं, लेकिन आपक ा वोट देन े क ा अधिकार त ो कायम है ।”

जज न े आग े कह ा क ि अगर अदालत क ो किस ी प्रावधान मे ं स्पष्ट मनमान ी दिखत ी है, त ो वह उस े रद्द कर सकत ी ह ै य ा उसक ी व्याख्य ा मे ं बदलाव कर सकत ी है, लेकिन वह संवैधानिक प्रावधानो ं क ो फिर स े नही ं लिख सकत ी ताक ि ‘ रोटेशन मैकेनिज्म ‘ ( बारी-बार ी स े बदलाव क ी व्यवस्था ) लाग ू किय ा ज ा सके । जस्टिस बागच ी न े कहा,” हम संसद क े तीसर े सदन क ी भूमिक ा नही ं निभ ा सकते ।”

याचिकाकर्त ा क ी क्य ा थ ी दलील?
याचिकाकर्त ा न े दलील द ी क ि दशको ं स े एक ह ी परिवार आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रो ं स े चुनाव लड़त े आ रह े हैं, जिसस े मतदाताओ ं क े पास मौजूद विकल्प सीमित ह ो गए हैं । इस पर पीठ न े कह ा क ि मतदात ा इस मुद्द े क ो अपन े चुन े हुए प्रतिनिधियो ं क े सामन े उठ ा सकत े है ं और इस े चुनाव ी मांग बन ा सकत े हैं । CJI न े सुझाव दिय ा क ि मतदात ा अपन े प्रतिनिधियो ं स े कह सकत े है ं क ि जब तक परिसीमन और आरक्षण ढांच े मे ं बदलाव नही ं किय ा जाता, तब तक व े उन्हे ं वोट नही ं देंगे।

SOURCE : INDIATV NEWS