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ब्रिटेन ने इसराइल के क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक की यहूदी बस्तियों को लेकर एक अहम फ़ैसला लिया है जिस पर इसराइल ने पलटवार किया है.
इसराइल के विदेश मंत्री ने घोषणा की है कि यरूशलम में यूके का वाणिज्य दूतावास बंद किया जाएगा.
इसराइल ने ये घोषणा तब की है जब मंगलवार को ही ब्रिटेन ने इसराइल के क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियों से आयात होने वाले सामान पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री एडवर्ड मिलिबैंड ने संसद में इसकी घोषणा की. उन्होंने ये भी बताया था कि फ़्रांस और कनाडा भी ऐसी ही घोषणा करेंगे.
अब 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने अवैध बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध को लेकर अपने इरादे के बारे में साझा बयान जारी किया है.
ब्रिटेन ने ये फ़ैसला ऐसे समय पर लिया है जब इसराइल की क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में 1200 नए घर बनाने की योजना है.
वहीं इसराइल ने ब्रिटेन के इस फ़ैसले को “बहुत बड़ी ग़लती” बताया था.
दूसरी ओर अमेरिका ने इसराइल का साथ देते हुए कहा है कि ऐसा करने वाली ब्रिटिश कंपनियों के ऊपर अमेरिका के राज्यों में व्यापार करने पर ‘प्रतिबंध’ लगाया जाएगा.
इसराइल ने और भी सख़्त क़दम उठाए
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ब्रिटेन की घोषणा के बाद इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने एक घोषणा की.
उन्होंने बताया कि इसराइल यरूशलम में यूके कॉन्सुलेट को बंद कर देगा.
ब्रिटिश सरकार के मुताबिक़, “यरूशलम में ब्रिटिश कॉन्सुलेट जनरल यरूशलम, वेस्ट बैंक और ग़ज़ा में यूके सरकार का प्रतिनिधित्व करता है” और “यूके और फ़लस्तीन के बीच राजनीतिक, व्यापारिक, सुरक्षा और आर्थिक हितों” पर काम करता है.
इसराइली विदेश मंत्री ने कहा कि लेबर सरकार के “इसराइल-विरोधी फ़ैसलों की एक श्रृंखला” के बाद ऐसा हुआ है और उन्होंने विदेश मंत्री एडवर्ड मिलिबैंड पर “बेहद शर्मनाक झूठ” बोलने का आरोप लगाया है.
उन्होंने लेबर सरकार को “दुश्मन जैसा” बताते हुए कहा कि वह “इसराइल राज्य के ख़िलाफ़ सुनियोजित तरीक़े से काम कर रही है.”
उन्होंने ब्रिटिश सरकार पर “एक संप्रभु देश और उसकी चुनावी प्रक्रिया के मामलों में खुलेआम दख़ल देने” का आरोप लगाया और कहा कि इसमें “यहूदी-विरोधी युद्धों” की “झलक” मिलती है.
इसराइली विदेश मंत्री ने यूके कॉन्सुलेट बंद करने के अलावा ब्रिटेन के ख़िलाफ़ और भी कई फ़ैसलों की घोषणा की है, जैसे-
- दक्षिणी इसराइल के किरयात गैट में मौजूद ‘इंटरनेशनल ग़ज़ा सपोर्ट सेंटर’ से ब्रिटिश प्रतिनिधियों को हटाना.
- ‘रामल्लाह में ब्रिटिश सपोर्ट टीम’ के तहत जूडिया और सामरिया [इसराइली सरकार वेस्ट बैंक को इसी नाम से बुलाती है] में फ़लस्तीनी अथॉरिटी की फ़ोर्स को ट्रेनिंग देने वाली ब्रिटिश गतिविधियों को बंद करना.
- 12 चुने हुए ब्रिटिश प्रतिनिधियों और अन्य ब्रिटिश नागरिकों को इसराइल में घुसने से रोकना, जो यहूदी-विरोधी और इसराइल-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, या जो इसराइल देश के अस्तित्व को ही नहीं मानते हैं.
ब्रिटेन ने क्या लिया है फ़ैसला
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ब्रिटेन के विदेश मंत्री एडवर्ड मिलिबैंड ने मंगलवार को हाउस ऑफ़ कॉमन्स में वेस्ट बैंक के उन इलाक़ों से आने वाले सामान पर आयात प्रतिबंध और अन्य प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिन पर इसराइल ने ग़ैर-क़ानूनी रूप से कब्ज़ा कर रखा है.
मिलिबैंड ने आयात प्रतिबंध की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि “ब्रिटिश लोग यह चाहते हैं कि हम अपनी दुकानों में बस्तियों से आए उत्पादों को स्वीकार करके कब्ज़े का समर्थन करें.”
उन्होंने कहा कि एक “व्यापक प्रतिबंध व्यवस्था” लागू की जाएगी, जिसमें “धार्मिक आधार पर उचित छूट” भी शामिल होगी.
ग़ैर-क़ानूनी बस्तियों को बढ़ावा देने वालों को संबोधित करते हुए मिलिबैंड ने कहा, “आपको यूके के प्रतिबंधों का पूरा सामना करना पड़ेगा.”
उन्होंने सांसदों को यह भी बताया कि ब्रिटेन इस बात से सहमत है कि वेस्ट बैंक के कुछ इलाकों में जातीय सफ़ाया हो रहा है. उन्होंने “बस्ती में रहने वाले आतंकवादियों” पर फ़लस्तीनियों को उनकी ज़मीन से बेदख़ल करने का आरोप लगाया. साथ ही कहा, “अक्सर, इसराइली सरकार ने इस पर आँखें मूँद ली हैं.”
उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि वेस्ट बैंक पर इसराइल का कब्ज़ा “गैर-कानूनी” है.
मिलिबैंड ने बताया है कि फ़्रांस और कनाडा भी इसी तरह की घोषणा करेंगे. वे नीदरलैंड्स, आयरलैंड, बेल्जियम, स्पेन और नॉर्वे के साथ शामिल होंगे, जिन्होंने या तो सामान पर प्रतिबंध लगा दिया है या ऐसा करने की प्रक्रिया में हैं.
उन्होंने बताया कि डेनमार्क, फ़िनलैंड, आइसलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन ने वादा किया है कि वे आगे की कार्रवाई का समर्थन करेंगे.
इसराइल और अमेरिका आए साथ
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ब्रिटेन के फ़ैसले को लेकर इसराइल और अमेरिका की ओर से काफ़ी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है.
इसराइल के राष्ट्रपति का कहना है कि क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियों पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का ब्रिटेन सरकार का फ़ैसला “बहुत बड़ी ग़लती” है.
मंगलवार को यरूशलम से बात करते हुए इसराइली राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने कहा कि यह फ़ैसला “इतिहास में ग़लत साबित होगा.”
उन्होंने कहा, “मौजूदा हालात में, यह एक संप्रभु देश के लोकतांत्रिक चुनावों में बहुत बड़ा दख़ल होगा.”
हर्ज़ोग का कहना है कि इस क़दम से फ़लस्तीनियों को सीधा नुक़सान होगा.
उन्होंने विदेशी सरकारों से “रचनात्मक बातचीत” और सहयोग का रास्ता अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा, “प्रतिबंध कोई समाधान नहीं हैं.”
वहीं इसराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने बीबीसी के ‘न्यूज़डे’ प्रोग्राम में कहा है कि उन्हें पूरा यक़ीन है कि अगर ब्रिटेन वेस्ट बैंक में अवैध इसराइली बस्तियों पर संभावित व्यापार प्रतिबंध लगाता है, तो अमेरिका की ओर से प्रतिक्रिया ज़रूर होगी.
उनका कहना है कि यह प्रतिक्रिया राज्य और संघीय, दोनों स्तरों पर हो सकती है.
हकाबी ने कहा कि “साझेदार देश इसराइल के साथ ऐसा कुछ करने” से “ब्रिटिश व्यवसायों पर भारी आर्थिक असर” पड़ सकता है.
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें अमेरिका के “कई राज्यों” में व्यापार करने से “रोका” जा सकता है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नम ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फ़ोन पर बात की थी. इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व में ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-देश समाधान) के महत्व पर ज़ोर दिया था.
ब्रिटेन प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बातचीत के आधिकारिक ब्यौरे में यह साफ़ नहीं किया गया कि बर्नम ने ट्रंप को प्रतिबंधों के बारे में जानकारी दी थी या नहीं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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