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इस बार महिलाएं करेंगी दुर्गा पूजा की पूरी तैयारी, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में पहली बार

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इस बार गाजियाबाद के क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में दुर्गा पूजा कुछ खास होने वाली है। यहां पहली बार पंडाल की सजावट से लेकर मां की मूर्ति, भोग और बाकी तैयारियों तक की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं की टीम संभाल रही है।

दुर्गा पूजा की तैयारियों में इस बार गाजियाबाद के क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में कुछ अलग देखने को मिलेगा। यहां ‘आवाहन’ दुर्गा पूजा महोत्सव की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं की टीम ने संभाली है। पंडाल की सजावट से लेकर मां दुर्गा की मूर्ति चुनने, भोग की तैयारी और बाकी कामों तक, हर चीज महिलाएं मिलकर कर रही हैं। खास बात यह है कि क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब पूरी दुर्गा पूजा महिलाओं की टीम संभाल रही है। समिति की अध्यक्ष राशि चोपड़ा और महासचिव रंजिता के अनुसार, यह सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि साथ मिलकर काम करने और महिलाओं की ताकत दिखाने की भी एक मिसाल है।

पहली बार महिलाओं के हाथों में पूरी पूजा की जिम्मेदारी

  • आमतौर पर दुर्गा पूजा की तैयारियों में घर और आसपास के लोग मिलकर काम करते हैं। लेकिन इस बार क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में इसकी कमान महिलाओं के हाथों में है। ‘आवाहन’ दुर्गा पूजा महोत्सव के लिए महिलाओं की पूरी टीम अलग-अलग काम संभाल रही है। कोई पंडाल की तैयारी देख रही है, तो कोई सजावट और बाकी इंतजामों पर ध्यान दे रही है।
  • इस पहल की खास बात यही है कि यहां महिलाओं को सिर्फ किसी एक काम तक सीमित नहीं रखा गया है। पूजा से जुड़े लगभग हर बड़े काम में उनकी सीधी भूमिका है। टीम मिलकर प्लान बना रही है और फिर उसी के हिसाब से काम पूरा किया जा रहा है।

पंडाल से लेकर मां की मूर्ति तक, हर काम में महिलाएं आगे

  • दुर्गा पूजा में पंडाल और सजावट का खास महत्व होता है। इसे खूबसूरत बनाने के लिए काफी पहले से तैयारी शुरू हो जाती है। इस बार क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में पंडाल की सजावट से लेकर उसे तैयार करने तक की जिम्मेदारी महिलाओं की टीम संभाल रही है।
  • इसके साथ ही मां दुर्गा की मूर्ति का चुनाव भी महिलाएं खुद कर रही हैं। भोग की तैयारी और उसे लेकर किए जाने वाले इंतजाम भी टीम की जिम्मेदारी में हैं। यानी पूजा के दौरान लोगों को जो कुछ भी देखने और अनुभव करने को मिलेगा, उसके पीछे महिलाओं की मेहनत दिखाई देगी।

साथ मिलकर काम करने पर दिया जा रहा जोर

समिति की अध्यक्ष राशि चोपड़ा और महासचिव रंजिता का कहना है कि इस पहल का मकसद सिर्फ दुर्गा पूजा करना नहीं है। इसके जरिए महिलाओं को साथ लाने और मिलकर काम करने का मौका भी मिल रहा है। एक साथ कई काम संभालने के लिए टीम के बीच जिम्मेदारियां बांटी गई हैं। इससे हर महिला अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान दे पा रही है और जरूरत पड़ने पर दूसरी महिलाओं की मदद भी कर रही है। यही टीमवर्क इस पूजा को बाकी आयोजनों से थोड़ा अलग बनाता है।

‘समुदाय द्वारा, समुदाय के लिए’ है सोच

इस दुर्गा पूजा की सोच है कि आसपास रहने वाले लोग मिलकर त्योहार की तैयारियों में हिस्सा लें और इसे अपना मानकर मनाएं। इसका मकसद बच्चों और नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और त्योहारों से जोड़ना है। महिलाओं का मानना है कि जब बच्चे अपने आसपास के लोगों को मिलकर त्योहार की तैयारी करते हुए देखते हैं, तो उनके मन में भी इन परंपराओं को लेकर जुड़ाव बढ़ता है। इसलिए पूजा के साथ नई पीढ़ी को इससे जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

मां दुर्गा के रूप से जुड़ा है खास संदेश

‘आवाहन’ दुर्गा पूजा को नारी शक्ति से भी जोड़ा गया है। मां दुर्गा का एक रूप ऐसा है, जो बच्चों के लिए प्यार और ममता से भरा है, लेकिन गलत चीजों और अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ा होता है। इसी सोच को इस पहल में भी दिखाने की कोशिश की गई है। महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं और अपने काम के जरिए यह संदेश दे रही हैं कि साथ मिलकर बड़ी जिम्मेदारियां भी आसानी से निभाई जा सकती हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN