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शहर के बड़े इलाकों, जैसे लियारी, ओरंगी, कोरंगी, मलीर, गुलशन-ए-इकबाल, DHA, क्लिफ्टन आदि में नल सूखे पड़े हैं। लोगों को पीने, नहाने, सफाई और जानवरों (कुरबानी) के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ा।

भारत द्वारा सिंधु जल समझौते (IWT) को स्थगित करने का असर पाकिस्तान पर साफ दिखने लगा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में पानी की भारी किल्लत से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। भीषण गर्मी के इस मौसम में ईद मना रहे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। इस समस्या को सिंधु जल समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस वाटर ट्रीटी को निलंबित कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान की पानी सुरक्षा, कृषि और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है, वहीं कराची जैसे शहरों में रोजमर्रा का पानी भी लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।

कराची के 70 फीसदी हिस्से में पानी की सप्लाई ठप

पाकिस्तानी मीडिया ‘एआरवाई न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची का जल संकट लगातार भयानक रूप लेता जा रहा है। शहर के करीब 70 फीसदी हिस्से में पानी की आपूर्ति लंबे समय से बाधित है। चिलचिलाती गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच कराची के निवासी महंगे प्राइवेट वॉटर टैंकरों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

शहर के बड़े इलाकों, जैसे लियारी, ओरंगी, कोरंगी, मलीर, गुलशन-ए-इकबाल, DHA, क्लिफ्टन आदि में नल सूखे पड़े हैं। लोगों को पीने, नहाने, सफाई और जानवरों (कुरबानी) के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ा। टैंकरों की कतारें लंबी लगी हैं, इंतजार 10 दिन तक का हो गया और निजी टैंकरों के दाम दोगुने हो गए हैं।

इन इलाकों में हालात सबसे बदतर

गुलिस्तान-ए-जौहर, गुलशन-ए-इकबाल, अजीजाबाद, लियाकतबाद, नॉर्थ नाजिमाबाद, नाजिमाबाद और नॉर्थ कराची जैसे इलाकों में पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से पानी की भयंकर किल्लत बनी हुई है। गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से उठाए गए दंडात्मक कदमों के कारण पाकिस्तान पर पहले से ही चौतरफा दबाव है। इसी बीच अब यह जल संकट पाकिस्तान के लिए एक और बड़ी मुसीबत बन गया है।

कराची में पानी का संकट कितना गंभीर?

कराची पाकिस्तान का आर्थिक केंद्र है और लगभग 2.5-3 करोड़ लोगों का घर है। यह सालों से पानी की दैनीय कमी झेल रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शहर की रोजाना पानी की मांग 1200 मिलियन गैलन से ज्यादा है, लेकिन सप्लाई मात्र 650 MGD के आसपास रह जाती है। कई इलाकों में पानी सप्लाई कई दिनों तक बंद रह जाती है। मई 2026 में पाइपलाइन फटने और पावर फेलियर के कारण संकट और गहराया। गरीब इलाकों (जैसे ओरंगी टाउन) में लोग हफ्तों तक पाइपलाइन से पानी नहीं देख पाते। महंगे टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। गंदा पानी पीने से डायरिया, हैपेटाइटिस और अन्य बीमारियां फैल रही हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में। टैंकर माफिया, पुरानी लीक वाली पाइपलाइनों, अवैध हाइड्रेंट्स और अनियोजित शहरी विकास ने स्थिति को बदतर बना दिया है। गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ संकट और विकराल हो जाता है।

सिंधु जल समझौते के निलंबन का पाकिस्तान पर असर

समझौते के तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का मुख्य हक मिला था, जो देश की 80% से ज्यादा सिंचाई और बिजली का आधार हैं। निलंबन के बाद पंजाब और सिंध प्रांतों में खरीफ फसलों पर असर पड़ा। पाकिस्तानी रिपोर्ट्स में 13% तक पानी की कमी बताई गई। भारत ने कुछ समय के लिए Baglihar और Kishanganga डैम्स से पानी का फ्लो नियंत्रित किया, जिससे पाकिस्तान में अनिश्चितता बढ़ी। लंबे समय में अगर भारत नए स्टोरेज और प्रोजेक्ट्स बनाता है तो पाकिस्तान को और नुकसान हो सकता है। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इससे 24 करोड़ लोगों की पानी सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

हाफिज नईम उर रहमान ने पीपीपी सरकार को घेरा

जमात-ए-इस्लामी (पाकिस्तान) के प्रमुख हाफिज नईम उर रहमान ने जल संकट को लेकर प्रतिद्वंद्वी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पर तीखा हमला बोला है। हाफिज नईम ने पीपीपी सरकार पर पानी के संकट को लेकर घोर कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 18 वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद पीपीपी के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार कराची में पानी की पुरानी किल्लत को दूर करने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि सिंध सरकार की विफलता के कारण ईद की छुट्टियों में भी हजारों लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कराची मेयर के दावों को किया खारिज

जमात-ए-इस्लामी के नेता ने कराची के मेयर मुर्तजा वहाब के उस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि शहर में पानी की कोई कमी नहीं है। ईद के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए हाफिज नईम ने बताया कि बढ़ती नागरिक समस्याओं और चुनौतियों के बावजूद कराची के लोग धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पार्टी ने लोगों की मदद के लिए शहर के 150 से अधिक स्थानों पर सामूहिक कुर्बानी की व्यवस्था की थी।

43 अरब का बजट, फिर भी सफाई नदारद

पानी के अलावा सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। हाफिज नईम ने सिंध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 43 अरब रुपये का भारी-भरकम बजट मिलने के बावजूद यह एजेंसी साफ-सफाई और कुर्बानी के जानवरों के अपशिष्ट (कचरे) का सही तरीके से निस्तारण करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने प्रांतीय प्रशासन पर जनता के पैसे का सही इस्तेमाल न करने का बड़ा आरोप लगाया।

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