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ईरान ने फिर बंद कर दिया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज; क्यों हुआ आगबबूला, टूट गया शांति समझौता?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान और अमेरिका के बीच बीते 4 महीने से चल रही जंग खत्म होने की घोषणा हुई थी। दोनों देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए और कहा गया कि सभी मोर्चों पर जारी युद्ध रोक दी जाएगी। हालांकि अब ईरान दोबारा भड़क गया है।

Strait of Hormuz Closed Again: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बीते बुधवार को हुए समझौते के कुछ घंटों के अंदर ही ईरान एक बार फिर आगबबूला हो गया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया है। इसकी वजह है इजरायल। दरअसल इजरायल ने युद्धविराम के बाद भी लेबनान में हमले जारी रखे हैं। इसे लेकर ही ईरान भड़क गया है। ईरानी सेना ने एक चेतावनी जारी कर कहा है कि इजरायल का लेबनान पर आक्रमण अमेरिका के साथ हुए समझौते के पूरी तरह खिलाफ है।

मैरीटाइम रेडियो चैनलों पर जारी एक बयान में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ कहा कि जब तक समझौते की शर्तों को नहीं माना जाएगा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा। IRGC द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “चूंकि लेबनान से इजरायल की वापसी, नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाना, और फारस की खाड़ी और इस क्षेत्र से अमेरिकी आतंकवादियों की वापसी ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते की मुख्य शर्तों में शामिल हैं; इसलिए जब तक ये शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज पूरी तरह से बंद रहेगा।”

ट्रंप ने किया था साइन

गौरतलब है कि बीते बुधवार को ही इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि अब ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल समझौते के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इजरायल ने लेबनान छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है और क्षेत्र में अमेरिकी सेना अभी भी डटी हुई है, जिसे ईरान अपनी सुरक्षा और समझौते की शर्तों के खिलाफ मान रहा है।

क्या कह रहा इजरायल?

इजरायल ने लेबनान में अपना अभियान रोकने से साफ मना कर दिया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी के बावजूद कहा है कि इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि IDF ने सीमा से 10 किलोमीटर अंदर तक कब्जा कर लिया है। खास बात यह है कि अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद यह नेतन्याहू की यह पहली टिप्पणी थी। नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा, “इजरायल को दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा जोन बनाए रखना होगा, और इसके लिए जरूरी है कि जब तक इजरायल की सुरक्षा के लिए जरूरी हो, हम वहां से न हटें।”

इससे पहले समझौते के ठीक एक दिन बाद लेबनान के नबातियेह जिले में गुरुवार रात हुए इजरायली हमले में 18 लोगों की मौत हो गई थी और 33 अन्य घायल हो गए। दूसरी ओर इजरायली सेना ने पुष्टि की है कि हिजबुल्लाह के साथ मुठभेड़ में उसके चार सैनिक मारे गए हैं। इजरायल का दावा है कि उसने ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्ला से जुड़े 80 ठिकानों पर हमला किया और उसके 10 से अधिक लड़ाकों को मार गिराया।

इजरायल-US के बीच बढ़ा तनाव

इस बढ़ते तनाव ने अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेदों को भी बढ़ा दिया है। ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि नेतन्याहू को लेबनान में जारी ऑपरेशन रोकना होगा। लेकिन नेतन्याहू मानने को तैयार नहीं हैं। इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायली कैबिनेट के कुछ मंत्रियों की आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें हकीकत को समझना चाहिए, क्योंकि 90 लाख की आबादी वाला देश सिर्फ हत्या के दम पर अपनी सुरक्षा समस्याओं को हल नहीं कर सकता।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने पर ग्रहण

इन सब के बीच समझौते के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर खुशबखबरी मिली थी। अमेरिका ने पुष्टि की थी कि वह क्षेत्र से नाकेबंदी हटाने को तैयार है। इससे पहले यह रास्ता युद्ध शुरू होने के बाद से ही बंद था। इससे भारत समेत कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया था। युद्ध शुरू होने से पहले इस रास्ते से वैश्विक तेल व्यापार का 20 फीसदी हिस्सा गुजरता था। ऐसे में ईरान और अमेरिका दोनों ही इसे लेकर अड़ गए थे। अब ईरान ने एक बार फिर टेंशन बढ़ा दी है

SOURCE : LIVE HINDUSTAN