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इस बैठक में ईरान के 3 बिलियन के फंड को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर शुरुआती सहमति बन गई है। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक इसे लेकर अमेरिका ने कुछ शर्तें भी लगा दी हैं।
पिछले कुछ महीनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद अब अमेरिका और ईरान कूटनीति के रास्ते पर लौटते दिख रहे हैं। कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक खत्म हुई है। बैठक में दोनों देशों के बीच हुए समझौते को लागू करने को लेकर अच्छी खासी हुई है। बातचीत के दौरान सबसे ज्यादा जोर अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरान के 3 बिलियन डॉलर के फंड को जारी करने पर रहा। अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका इस फंड को जारी करने पर सहमत हो गया है।
इसके अलावा बैठक में समझौते के उल्लंघन को रोकने के लिए एक ‘इमरजेंसी कम्युनिकेशन चैनल’ तैयार करने पर भी सहमति बनी है। ईरान के आधिकारिक डिप्टी विदेश मंत्री काजेम गारीबाबादी के मुताबिक यह बातचीत अप्रत्यक्ष रूप से हुई है। बैठक के दौरान अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल एक कमरे में आमने-सामने नहीं बैठे। रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने दोनों देशों के बीच मैसेज पहुंचाने का काम किया।
बैठक में किन मुद्दों पर सहमति
जानकारी के मुताबिक दोनों देश इस बात पर सहमत हो गए हैं कि जल्द ही एक इमरजेंसी कम्युनिकेशन चैनल स्थापित किया जाएगा, ताकि समझौते के किसी भी उल्लंघन को तुरंत रिकॉर्ड और रिपोर्ट किया जा सके। इसके अलावा बैठक में ईरान के 3 बिलियन डॉलर के फंड को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर शुरुआती सहमति भी बन गई। हालांकि अमेरिका ने इस पर कुछ शर्तें भी लगाई हैं।
एक अमेरिकी अधिकारी ने इस मामले पर बातचीत करते हुए कहा कि अल अरबिया से कहा कि फिलहाल ईरान को कोई धनराशि जारी नहीं की गई है और भविष्य में भी धनराशि तभी जारी होगी, जब ईरान समझौता ज्ञापन में तय सभी शर्तों को पूरा करेगा। अधिकारी ने कहा, “कोई भी फ्रीज्ड फंड जारी नहीं की गई है और जब तक ईरान समझौता ज्ञापन में तय शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक कोई राशि जारी नहीं की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि समझौता ज्ञापन के तहत अमेरिका यह तय करेगा कि जारी की गई धनराशि का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए होगा। अधिकारी के अनुसार, अगर ईरान की संपत्तियां जारी की जाती हैं, तो ईरान उनका उपयोग केवल अमेरिकी किसानों से कृषि उत्पाद खरीदने के लिए कर सकता है।
लेबनान और होर्मुज पर भी बातचीत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक भी हुई। बैठक में लेबनान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। ईरान ने आरोप लगाया कि इजराइल लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखकर गलती कर रहा है। बैठक में ईरान ने यह भी दोहराया कि होर्मुज ईरान और ओमान की संप्रभुता के दायरे में आता है।
अगली बैठक कब?
इस बीच कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने बताया कि ‘इस्लामाबाद समझौते’ को लेकर हुई इस वार्ता में काफी सकारात्मक प्रगति हुई है। अमेरिका की तरफ से ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर ने कतर के प्रधानमंत्री से मिलकर इस पूरी वार्ता की जमीन तैयार की थी। फिलहाल ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं चल रही हैं, इसलिए दोनों पक्षों ने सहमति जताई है कि जनाजे की रस्मों के ठीक बाद जल्द से जल्द अगली बैठक की तारीख तय की जाएगी। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस वार्ता पर संतोष जताते हुए कहा है कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही परमाणु मुद्दों पर भी चर्चा शुरू होगी।
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