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कलेजा चीर देने वाले ये 5 बेस्ट विदाई सॉन्ग इन गीतकारों ने लिखे थे, आज भी रुला देते हैं गाने

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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हिंदी फिल्मों में बने विदाई गीत आज भी आंखों में आंसू ले आते हैं। बेटी और पिता के बीच के गहरे रिश्ते को ये गाने खूबसूरती से बयां करते हैं। हिंदी सिनेमा के ये 5 खूबसूरत गाने आपको आज भी खास हैं।

हिंदी सिनेमा का म्यूजिक ही दुनियाभर में इसकी पहचान मानी गई है। बिना गानों के फिल्में अधूरी लगती हैं। फिल्मों में कई ऐसे खूबसूरत गाने बने जिन्होंने रिश्तों और तीज त्योहारों को खूबसूरती से बयां किया। इन्हीं फिल्मों में बेटी की विदाई के गीतों को भी गाया गया। ये ऐसे गाने बने जो आज भी आंखों में आंसू ले आते हैं। जब भी शादी के गानों की बात होती उसमें हम अक्सर विदाई सॉंग को भूल ही जाते। लेकिन आनंद बक्शी, साहिर लुधियानवी समेत कई मशहूर गीतकारों ने बेटी की विदाई का दर्द अपने इन 5 गानों में खूबसूरती से बयां किया है।

बाबुल की दुआएं लेती-नील कमल

1968 में नील कमल नाम की एक फिल्म आई थी। इस फिल्म में वहीदा रहमान और राज कुमार लीड रोल में थे। मनोज कुमार और बलराज साहनी ने भी अहम किरदार निभाया था। इस फिल्म में एक्टर बलराज साहनी ने एक पिता का किरदार निभाया था जो अपनी फूल जैसी बेटी को शादी के बाद विदा करते हैं। इस विदाई समारोह में गाना बजता है ‘बाबू की दुआएं लेती जा’ बजने लगता है। ऐसा कहा जाता है जब ये गाना बनकार तैयार हुआ था सुनने वाले अपने आंसू नहीं रोक पाते थे। एक्टर राजेंद्र कुमार ने ये गाना फिल्म रिलीज से पहले किसी शादी में सुना था और वो जब-जब ये गाना सुनते तो रोने लगते थे। ये गाना साहिर लुधियानवी ने लिखा था। उन्होंने खुद कभी शादी नहीं की और न ही बेटी के पिता बने। लेकिन उनके इस गीत ने उस दौर की हर शादी को खास बना दिया। इस गाने को आवाज मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से खास बना दिया था। रवि का म्यूजिक था।

ये गलियां ये चौबारा- प्रेम रोग

1982 में आई ऋषि कपूर की फिल्म प्रेम रोग के गाने आज भी एक खास एहसास पैदा करती हैं। इस फिल्म के सभी गाने खास थे। लेकिन पद्मिनी कोल्हापुरी पर फिल्माया गाना ‘ये गलियां ये चौबारा’ एक विदाई गीत के रूप में देखा जाता है। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था। इस गाए को संतोष आनंद ने लिखा था।

बाबुल का ये घर बहना-दाता
1989 में फिल्म आई थी ‘दाता’। इस फिल्म में एक खूबसूरत गाना था ‘बाबुल का ये घर बहना’। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती ने लीड किरदार निभाया था जो अपनी बहन को शादी के बाद विदा करते हैं। गाने के अंतरे में एक लाइन है ‘भैया तेरे आंगन की’। गाने की ये लाइन सुनने के बाद खुद एक्टर्स भी रोने लगे थे। ये गाना आज भी उतना ही खास है। किशोर कुमार और अल्का याग्निक ने इस गाने को अपनी आवाज दी थी। इस गाने को समीर अनजान के पिता अनजान ने लिखा था। ऐसा बताया जाता है कि उस समय उनकी बेटी विदेश में रह रही थीं और उनकी डिलीवरी होनी थी। बेटी की जुदाई में उनकी कलम से ये खूबसूरत गाना निकल गया।

बाबुल जो तुमने सिखाया-हम आपके कौन

बाबुल जो तुमने सिखाया 1994 में दशक की सबसे बड़ी फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ रिलीज हुई थी। इस फिल्म में वैसे तो कई खूबसूरत गाने थे। लेकिन एक सबसे खास गाना था जो रेणुका शहाने के किरदार पूजा की विदाई के दौरान बजता है। वो गाना है ‘बाबुल जो तुमने सिखाया’, इस गाने ने फिल्म के इस विदाई सीन को खूबसूरती से पेश किया था। गाने को रविंद्र रावल ने लिखा था और शारदा सिन्हा की खनकती आवाज में ते गाना गाया गया था।

दूल्हे का सेहरा- धड़कन

साल 2000 में धड़कन फिल्म रिलीज हुई थी। शिल्पा शेट्टी, सुनील शेट्टी और अक्षय कुमार की ये फिल्म आज भी पसंद की जाती है। फिल्म के सभी गाने अच्छे थे। लेकिन नुसरत फतेह अली खान की आवाज में एक विदाई सॉन्ग ने 2000 का दौर ही शानदार बना दिया था।

नदीम श्रवण के म्यूजिक में बना वो गाना था ‘दूल्हे का सेहरा’। इस गाने में शिल्पा शेट्टी के लुक ने कमाल कर दिया था। आज भी ये गाना ऑडियंस के दिल के करीब है।

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