Source :- LIVE HINDUSTAN
AI के सबसे बड़े एक्सपर्ट्स और कंपनियों के CEO अब इसके संभावित खतरों को लेकर खुलकर चेतावनी दे रहे हैं। सवाल यह नहीं कि AI कितनी शक्तिशाली बनेगा, बल्कि यह भी है कि इंसान उसका इस्तेमाल कितनी जिम्मेदारी से करेंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मानव इतिहास के सबसे क्रांतिकारी बदलावों में से एक माना जा रहा है। यह हेल्थ, एजुकेशन, साइंस और बिजनेस जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं लेकर आया है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि AI के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई बड़े नाम अब इससे जुड़े खतरों को लेकर खुलकर चेतावनी दे रहे हैं। AI के ‘गॉडफादर’ जेफ्री हिंटन से लेकर OpenAI के CEO सैम आल्टमैन, Anthropic के CEO डारियो अमोडेई और Google CEO सुंदर पिचाई तक, सभी का मानना है कि AI का भविष्य जोखिमों से भी भरा हुआ है और यह इंसानों पर हावी होने की क्षमता रखता है।
इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान AI का डर
AI के ‘गॉडफादर’ जेफ्री हिंटन लंबे समय से चेतावनी दे रहे हैं कि दुनिया पहली बार ऐसी टेक्नोलॉजी बना रही है जो भविष्य में इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हो सकती है। उनका मानना है कि अगर AI सिस्टम ह्यूमन इंटेलिजेंस को पीछे छोड़ देते हैं, तो उन्हें कंट्रोल करना बेहद कठिन हो सकता है। हिंटन का कहना है कि AI की क्षमता बढ़ाने की रेस में सुरक्षा को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, सुपरइंटेलिजेंट AI इंसानियत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
नौकरियों और सामाजिक स्थिरता पर खतरा
Anthropic के CEO डारियो अमोडेई की चिंताएं नजदीकी भविष्य से जुड़ी हैं। उनका मानना है कि AI अगले कुछ साल में बड़ी संख्या में एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर जॉब्स को प्रभावित कर सकती है।कस्टमर सपोर्ट, डाटा एनालिसिस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और लीगल रिसर्च जैसे क्षेत्रों में AI तेजी से इंसानों की जगह ले रहा है। अमोडेई का मानना है कि अगर सरकारें और कंपनियां पहले से तैयारी नहीं करतीं, तो बेरोजगारी बढ़ सकती है।
दिक्कत AI नहीं, दिक्कत इंसानों का बिहेवियर
OpenAI के CEO सैम आल्टमैन का नजरिया कुछ अलग है। उनका मानना है कि सबसे बड़ा खतरा केवल AI नहीं है, बल्कि इंसानों का उस पर बढ़ता अंधविश्वास भी है। आल्टमैन ने कई बार कहा है कि लोग ChatGPT और अन्य AI टूल्स पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने लगे हैं। उनके मुताबिक, अगर लोग अपनी सोच, एनालिसिस और फैसले लेने की क्षमता को AI के हवाले कर देंगे, तो यह समाज के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने डीपफेक, मिसइन्फॉर्मेशन और AI के गलत इस्तेमाल को आने वाले साल की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया है।
आग या बिजली जैसा शक्तिशाली है ये टेक
Google और Alphabet के CEO सुंदर पिचाई भी AI के संभावित रिस्क को लेकर कई बार चेतावनी दे चुके हैं। पिचाई ने AI की तुलना ‘आग’ और ‘बिजली’ जैसी क्रांतिकारी तकनीकों से की है। उनका कहना है कि AI इंसानियत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल गंभीर रूप से नुकसान भी पहुंचा सकता है। पिचाई ने एक इंटरव्यू में कहा था कि AI के प्रभाव का दायरा इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है। उन्होंने डीपफेक, मिसइन्फॉर्मेशन और अनियंत्रित AI सिस्टम्स को लेकर चिंता जताई है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि AI का विकास जिम्मेदारी और रेग्युलेशंस के साथ होना चाहिए।उनका मानना है कि टेक कंपनियों, सरकारों और समाज को मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे जो इनोवेशंस को बढ़ावा दें और रिस्क को कम करें।
Microsoft AI CEO ने भी दी है चेतावनी
Microsoft AI के CEO मुस्तफा सुलेमान का मानना है कि AI कई क्षेत्रों में काम के बड़े हिस्से को ऑटोमेट कर सकती है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि भविष्य केवल नौकरियों के खत्म होने का नहीं, बल्कि काम करने के तरीके के बदलने का है। उनके मुताबिक, इंसानों और AI को साथ मिलकर काम करना सीखना होगा।
AI को लेकर फैला जरूरत से ज्यादा डर?
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI के खतरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। Microsoft हेड ब्रैड स्मिथ जैसे लीडर कहते हैं कि AI को केवल खतरे के तौर पर नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और नए मौके पैदा करने वाले मौके के रूप में भी देखा जाना चाहिए। यही वजह है कि आज AI को लेकर दुनिया में दो तरह की चर्चाएं- एक सेफ्टी और कंट्रोल की, दूसरी इनोवेशन और डिवेलपमेंट की चल रही है। आप AI एडवांसमेंट को जैसे देखना चाहें, देख सकते हैं।
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