पूर्व राजस्थान मंत्री और पूर्व भरतपुर महाराजा विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी से आधिकारिक रूप से नाता तोड़ लिया। उन्होंने पार्टी के भीतर कुछ लोगों द्वारा अंतरात्मा के संघर्ष और सार्वजनिक अपमान का हवाला दिया। यह घोषणा हाल ही में हुए शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के बाद पैदा हुए कड़वे विवाद के बीच हुई।
## पार्टी छोड़ने का कारण बना घटनाक्रम
सिंह का यह फैसला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की तीखी आलोचना के बाद आया। उन्होंने आरोप लगाया था कि भरतपुर और डीग में जिला स्तर के नेताओं ने स्थानीय चुनावों के दौरान वफादार कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर पसंदीदा लोगों को टिकट दिए। यह असहमति सार्वजनिक रूप से बढ़ गई, जब सिंह ने डोटासरा से इस्तीफा देने की मांग की और विवादित भर्ती परीक्षाओं तथा डोटासरा के परिवार को कथित रूप से दिए गए लाभों की जांच की मांग की। कांग्रेस ने इसके जवाब में पार्टी में अंतर्कलह की खबरों को विरोधियों की ओर से फैलाया गया महज दुष्प्रचार बताया।
## उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया: गरिमा का सवाल
सोशल मीडिया पर सिंह ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने “श्रद्धेय गिरिराज महाराज” और अपनी अंतरात्मा की सलाह पर काम किया है। उन्होंने कहा कि “छोटे और तथाकथित नेताओं” के बयानों से पहुंची ठेस ने उनके समर्थकों को नाराज कर दिया है। सिंह ने कहा कि वह गलत बात का समर्थन नहीं कर सकते और न ही झूठ को सहन कर सकते हैं। उन्होंने अपने विश्वासघात और नैतिक रुख को रेखांकित करते हुए कहा, “घुट-घुटकर मरने से बेहतर है कि स्वाभिमान के साथ मरें।”
अपने कड़े शब्दों और घोषणाओं के बावजूद, कांग्रेस ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि सिंह ने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपा है या नहीं।
## राजनीतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ
सिंह डीग–कुम्हेर से पूर्व विधायक हैं और अशोक गहलोत सरकार में राजस्थान के पर्यटन मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनावों में वह अपनी सीट हार गए। उनका पार्टी से अलग होना कांग्रेस को निकाय चुनावों में हुए नुकसान के तुरंत बाद हुआ है: पार्टी ने 3,613 वार्ड जीते, जबकि BJP ने 4,179 वार्डों पर जीत हासिल की। सिंह ने टिकट वितरण में कुप्रबंधन के लिए राज्य स्तर के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया।
## कांग्रेस की प्रतिक्रिया
डोटासरा ने सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी में मतभेद होने के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने BJP पर असंतोष पैदा करने के लिए इन खबरों का व्यापक “टूलकिट” रणनीति के तहत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
## सिंह के लिए आगे की राह
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सिंह किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ जुड़ेंगे या स्वतंत्र रहेंगे। हालांकि, यह स्पष्ट है कि उनका मानना है कि जब सिद्धांत दांव पर हों, तब राजनीतिक जुड़ाव की तुलना में स्वाभिमान अधिक महत्वपूर्ण होता है।
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