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केंद्र की नई मोबाइल विनिर्माण योजना में शामिल होंगी चार घरेलू कंपनियां

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चार घरेलू स्मार्टफोन कंपनियां केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में अधिसूचित Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) के तहत मंजूरी हासिल करने का प्रयास करेंगी। यह भारत में स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने और निर्यात बढ़ाने की नई पहल को रेखांकित करता है। हाल ही में पेश की गई ₹62,500 करोड़ की MPMS को मोबाइल उपकरणों के लिए Production-Linked Incentive (PLI) scheme की जगह लाया गया है, जिसकी अवधि 2025-26 में पूरी हो गई थी।

## कौन-कौन होड़ में शामिल हो रहा है

MPMS में रुचि जताने वाली शुरुआती कंपनियों में Dilox Technologies (India), Amber Enterprises India, Lava International और NxtQuantum Shift Technologies (NxtQST) शामिल हैं। ये कंपनियां original equipment manufacturers (OEMs) से लेकर भारतीय ब्रांड्स तक विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जो इस योजना को व्यापक स्तर पर अपनाए जाने का संकेत देता है।

– **Amber Enterprises**: मुख्य रूप से एयर कंडीशनर के OEM कारोबार के लिए जानी जाने वाली Amber ने हाल ही में Oppo Mobiles India के साथ साझेदारी कर मोबाइल उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा है। इस सहयोग के तहत Oppo, Realme और OnePlus ब्रांड्स के नाम से फोन असेंबल किए जाएंगे।
– **Lava International**: भारत का घरेलू मोबाइल ब्रांड Lava ने पुष्टि की है कि वह अपनी खुद की उत्पाद श्रृंखला के लिए विशेष रूप से इस योजना के तहत आवेदन करेगा।
– **NxtQST (Ai+ brand)**: Realme के पूर्व अधिकारी Madhav Sheth द्वारा स्थापित NxtQST, Pulse (4G) और Nova (5G) जैसे किफायती स्मार्टफोन्स पर ध्यान केंद्रित करती है। योजना के तहत आवेदन करने से पहले कंपनी R&D में $10 million का निवेश कर चुकी है और 600 से अधिक इंजीनियरों की टीम तैयार कर चुकी है।
– **Dixon Technologies**: एक स्थापित OEM के रूप में Dixon इस योजना के तहत आवेदन करने की योजना बना रही है। यह पहले से ही Motorola, Xiaomi और Transsion जैसे प्रमुख कंपनियों के लिए फोन असेंबल करती है और US तथा Africa समेत कई बाजारों में फोन निर्यात करती है।

## Mobile Phone Manufacturing Scheme की प्रमुख विशेषताएं

MPMS में स्थानीयकरण को बढ़ावा देने और निर्यात प्रोत्साहित करने के लिए नए मानदंड पेश किए गए हैं। यह पिछली PLI scheme की तुलना में अधिक प्रोत्साहन प्रदान करती है। प्रतिभागी कंपनियों को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

– **IP और डिजाइन क्षमताएं अनिवार्य**: कंपनियों को भारत में R&D करने के साथ-साथ अपने डिजाइन और intellectual property पर स्वामित्व भी रखना होगा।
– **बहुमत हिस्सेदारी भारतीयों के पास**: कम से कम 51% इक्विटी भारतीय हितधारकों के पास होनी चाहिए।
– **पात्रता श्रेणियां**: “T2” श्रेणी भारतीय मोबाइल ब्रांड्स के लिए है — Lava और NxtQST इसी सेगमेंट के तहत आवेदन करेंगी।

इन नियमों के जरिए सरकार केवल निर्यात प्रोत्साहनों से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नवाचार और स्वामित्व भारत में ही बने रहें।

## उत्पादन योजनाएं और बाजार रणनीति

### Amber Enterprises

Amber को उम्मीद है कि मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में पहली बार कदम रखने के साथ उसकी परीक्षण उत्पादन प्रक्रिया March 2027 में शुरू हो जाएगी। कंपनी का लक्ष्य पहले वर्ष में 8–9 million फोन का उत्पादन करना और दूसरे वर्ष में इसे बढ़ाकर 13–15 million units करना है। इन लक्ष्यों को Oppo, Realme और OnePlus के साथ उसकी साझेदारी से समर्थन मिलेगा।

### Dixon Technologies

PLI scheme का पहले से अनुभव रखने वाली Dixon, MPMS के प्रोत्साहनों का लाभ उठाने के लिए अपने विनिर्माण और निर्यात बुनियादी ढांचे का उपयोग कर रही है। इसकी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं:

– Motorola, Xiaomi और Transsion जैसे ब्रांड्स के लिए फोन असेंबल करना।
– भारत में Google Pixel के लिए फोन की आपूर्ति करना। Google चीन से अपना अधिक उत्पादन बाहर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही है।
– Vivo के साथ joint venture को अंतिम रूप देना, जिसमें Dixon की 51% हिस्सेदारी होगी और वह भारत में Vivo के लाखों फोन असेंबल करेगी। उत्पादन का लक्ष्य हर वर्ष लगभग 20–22 million units है। इसके अलावा 3–4 million units विशेष रूप से निर्यात के लिए निर्धारित होंगी।

Lava और NxtQST भी T2 श्रेणी के तहत उत्पादन स्थापित करने की योजना बना रही हैं, जहां भारतीय ब्रांड्स के लिए विशेष समर्थन उपलब्ध है। सरकार को उम्मीद है कि इस श्रेणी के तहत लगभग तीन कंपनियां आवेदन करेंगी।

## यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है

MPMS का उद्देश्य केवल PLI पहल की जगह लेना नहीं, बल्कि उससे बेहतर परिणाम हासिल करना भी है। इसका विशेष जोर निम्नलिखित बिंदुओं पर है:

– **निर्यात को प्रोत्साहन**: वैश्विक पहुंच का विस्तार करने और भारत से बाहर के बाजारों में प्रवेश करने के लिए।
– **स्थानीयकरण**: घरेलू R&D, डिजाइन और भारतीय स्वामित्व की उच्च हिस्सेदारी को अनिवार्य बनाकर यह योजना घरेलू नवाचार को बढ़ावा देने और विदेशी IP पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखती है।

वित्तीय प्रोत्साहनों के साथ इन आवश्यकताओं को जोड़कर MPMS भारत को मोबाइल विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी केंद्र बनाने की व्यापक रणनीति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करती है।

भारत में मोबाइल विनिर्माण का परिदृश्य लगातार बदल रहा है और MPMS रणनीति में परिवर्तनकारी प्रगति का संकेत दे सकती है। Amber, Lava, NxtQST और Dixon जैसी कंपनियों के लिए यह योजना न केवल वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, बल्कि भारत में अपनी मौजूदगी गहरी करने और वैश्विक पहुंच बढ़ाने का रास्ता भी खोलती है।

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