Source :- LIVE HINDUSTAN
कॉपर (Copper) की कीमतों ने सोमवार को नया रिकॉर्ड बना दिया। दुनिया के प्रमुख कमोडिटी बाजार लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर की कीमत बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इसने जनवरी में बने 14,527.50 डॉलर प्रति टन के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, बाद में कीमत थोड़ी नरम हुई और 0.7% की बढ़त के साथ करीब 14,518 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करती रही। कॉपर की कीमत में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के बाहर सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता है। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी मेटल्स की कीमतों को सपोर्ट दिया है। डॉलर कमजोर होने पर दूसरी करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाले मेटल अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे डिमांड को सपोर्ट मिलता है।
अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर कॉपर का स्टॉक
कॉपर की ग्लोबल सप्लाई को लेकर सबसे दिलचस्प स्थिति अमेरिका और बाकी दुनिया के बीच देखने को मिल रही है। अमेरिका में कॉपर का स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। COMEX के गोदामों में कॉपर का स्टॉक करीब 7,66,795 शॉर्ट टन, यानी लगभग 6.96 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि संभावित अमेरिकी आयात शुल्क की आशंका के चलते ट्रेडर्स और प्रोड्यूसर्स ने बड़ी मात्रा में कॉपर अमेरिका भेजना शुरू कर दिया था। जानकारों के मुताबिक, जब तक टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तब तक कॉपर की कीमतें ऊंची रह सकती हैं और अमेरिका की ओर मेटल का फ्लो जारी रह सकता है।
गोदामों में कॉपर का स्टॉक घटा
दूसरी तरफ अमेरिका के बाहर कॉपर की उपलब्धता कम होती दिखाई दे रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज में कैंसल्ड वारंट्स का स्तर 51% तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि 1.21 लाख टन से ज्यादा कॉपर आने वाले हफ्तों में एक्सचेंज के सिस्टम से बाहर जा सकता है। वहीं, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के गोदामों में कॉपर का स्टॉक मार्च के मध्य से करीब 85% घटकर 63,000 टन रह गया है। यह जनवरी 2024 के बाद सबसे निचला स्तर है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता है, इसलिए वहां घटते स्टॉक ने सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
दूसरे बेस मेटल्स पर भी असर
कॉपर की कीमतों में तेजी का असर दूसरे बेस मेटल्स पर भी दिखाई दिया। जिंक 1.1% चढ़कर 3,988 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया, जबकि एल्युमिनियम 0.7% बढ़कर 3,315 डॉलर और टिन 0.4% बढ़कर 55,100 डॉलर प्रति टन हो गया। दूसरी ओर, निकेल 0.7% गिरकर 16,725 डॉलर और लेड 0.3% कमजोर होकर 1,903 डॉलर प्रति टन पर आ गया। कुल मिलाकर, अमेरिका में बढ़ते स्टॉक और अमेरिका के बाहर घटती उपलब्धता ने कॉपर मार्केट में एक बड़ा अंतर पैदा कर दिया है। अगर वैश्विक सप्लाई पर दबाव आगे भी बना रहता है, तो कॉपर की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी रहने की संभावना पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
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