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कोर्ट के फैसले पर ट्रंप ने जिनपिंग को क्यों दी बधाई? जन्मजात नागरिकता का चीन से क्या कनेक्शन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अदालत ने एक सदी से भी ज्यादा पुराने कानून को बरकरार रखते हुए साफ किया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले बच्चे स्वाभाविक रूप से अमेरिका के नागरिक हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को US सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के आदेश को दरकिनार करते हुए अमेरिका में जन्मजात नागरिकता के कानून को बरकरार रखा है। इस फैसले की ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इसे एक देश के लिए बहुत बुरा फैसला बताया है। इस दौरान उनका एक और रिएक्शन खूब चर्चा में है। जैसे ही अमेरिकी कोर्ट का फैसला आया, ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बधाई दे डाली। लेकिन ट्रंप ने अमेरिका के जन्मजात नागरिकता फैसले पर आखिर चीनी राष्ट्रपति को क्यों बधाई दी? जानते हैं इस सवाल का जवाब।

दरअसल ट्रंप के इस फैसले के पीछे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रति उनका गुस्सा और निराशा छिपी थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके महान देश चीन को उनकी बर्थराइट सिटीजनशिप पर बड़ी जीत के लिए बधाई देना चाहता हूं।” एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला बताया। उन्होंने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को बरकरार रखा है, जो हमारे देश के लिए बहुत बुरा है। हम राष्ट्रपति के समर्थन से संसद में कानून लाकर इसमें बदलाव कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान अब यह तय हो गया है। अब किसी लंबे और बोझल संवैधानिक संशोधन की जरूरत नहीं है।”

चीन और जिनपिंग को क्यों बधाई?

अब सवाल यह है कि ट्रंप ने आखिर चीन और शी जिनपिंग को बधाई क्यों दी? इसके लिए हमें थोड़ा पीछे चलना होगा। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने ट्रंप के कार्यकारी आदेश को खारिज करते हुए 1898 के ऐतिहासिक मामले ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम अर्क’ केस का हवाला दिया। यह मामला चीन से ही जुड़ा था। दरअसल वोंग किम अर्क चीनी का जन्म 1873 में सैन फ्रांसिस्को में हुआ था। उनके माता पिता दोनों चीनी प्रवासी थे। बाद में किम अर्क जब एक विदेश यात्रा से लौटे, तो अमेरिकी सरकार ने ‘चीनी बहिष्कार अधिनियम’ का हवाला देकर उन्हें नागरिक मानने से इनकार कर दिया और देश में एंट्री नहीं दी।

इसके बाद उन्होंने कोर्ट का रुख किया। 1898 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वोंग किम अर्क 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही अमेरिकी नागरिक हैं, भले ही उनके माता-पिता चीनी नागरिक थे। यही केस बाद में अमेरिका में ‘बर्थराइट सिटिजनशिप’ की कानूनी नींव बना।

लंबे समय से आलोचक रहे हैं ट्रंप

ट्रंप लंबे समय से चीनी और दूसरे विदेशी नागरिकों द्वारा अमेरिकी नागरिकता कानून के कथित दुरुपयोग की आलोचना करते रहे हैं। उनका सबसे प्रसिद्ध नारा भी ‘अमेरिका फर्स्ट’ है। इसके अलावा वह ‘एंकर बेबीज’ का भी विरोध करते रहे हैं। बता दें कि अमेरिका में एक बड़ा चलन रहा है जहां चीन और अन्य देशों के अमीर नागरिक अस्थाई वीजा या टूरिस्ट वीजा पर सिर्फ इसलिए अमेरिका आते हैं ताकि उनका बच्चा वहां पैदा हो और उसे स्वाभाविक रूप से अमेरिकी नागरिकता मिल जाए। इन बच्चों को अक्सर ‘एंकर बेबी’ कहा जाता है।

इसे लेकर ही ट्रंप ने शी जिनपिंग को बधाई देकर यह तंज कसा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा चीनी नागरिकों को मिलेगा, जो इस कानून का इस्तेमाल कर अपने बच्चों के लिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करते रहे हैं। उनके मुताबिक यह जीत अमेरिका की नहीं, बल्कि चीन की हुई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN