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कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़: पुलिस और आयोजकों पर क्यों उठ रहे सवाल?

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Source :- BBC INDIA

सरकारी शवगृह के बाहर मौजूद एक पीड़ित परिवार, जिनके क़रीबी की शनिवार को भगदड़ में मौत हो गई

दुर्गा पूजा के दौरान भारी भीड़ को संभालने के लिए कोलकाता पुलिस की कई लोगों ने तारीफ़ की है.

हालांकि, इस साल दुर्गा पूजा की सप्तमी की रात उत्तर कोलकाता के सबसे बड़े सार्वजनिक पूजा पंडालों में से एक, चोरबागान में भगदड़ से 19 लोगों की मौत होने के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में दिख रहा है कि शनिवार की शाम बारिश होने के बाद पंडाल में घोषणा की गई कि बारिश की वजह से पंडाल गिर सकता है. इसके तुरंत बाद वहां अफ़रा-तफ़री मच गई.

कई चश्मदीदों और स्थानीय लोगों ने इस घटना के बारे में स्थानीय मीडिया को जानकारी दी.

सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और चश्मदीदों के बयानों में यह शिकायत भी की गई है कि भीड़ को संभालने में दिक्कतें थीं और पंडाल में आने-जाने के रास्ते संकरे थे. दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में भारी भीड़ होना कोई नई बात नहीं है.

30 सितंबर, 2025 को प्रकाशित एएनटी कॉर्पोरेशन नाम की एक संस्था के सर्वे के मुताबिक़, मध्य कोलकाता में सियालदह के पास संतोष मित्रा पार्क में हर घंटे 48,000 लोग पूजा देखने पहुंचे.

त्रिधारा अकालबोधन और बेहाला नूतन दल जैसी लोकप्रिय पूजा समितियों के पंडालों में हर घंटे 25,000 से ज़्यादा लोग पहुंचे.

हालांकि, कोलकाता के निवासियों का कहना है कि उनकी याद में दुर्गा पूजा के दौरान इतना बड़ा हादसा पहले कभी नहीं हुआ.

राजनीतिक विश्लेषक पॉलमी नाग ने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, “वामपंथियों के 34 साल के शासन और तृणमूल के 15 साल के शासन में दुर्गा पूजा के दौरान कुचलकर एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. वामपंथी कुछ भी कर लें, तृणमूल कुछ भी कर ले, वे इस राज्य के सबसे बड़े त्योहार के दौरान ऐसा नहीं कर पाए.”

इस साल कोलकाता पुलिस ने घोषणा की थी कि दुर्गा पूजा के दौरान पूरे शहर में 12,000 पुलिसकर्मी तैनात होंगे. हालांकि, चोरबागान में मौजूद कई लोगों ने शिकायत की कि हादसे के समय घटनास्थल पर कोई पुलिसकर्मी दिखाई नहीं दिया.

कोलकाता पुलिस ने पूजा के आयोजन से जुड़े सात लोगों को गिरफ़्तार किया है. उन पर ग़ैर-इरादतन हत्या के आरोप लगाए गए हैं.

इनमें से ज़्यादातर लोग सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे.

भीड़ प्रबंधन में कहां हुई चूक?

चोरबागान पूजा मंडप की ओर जाने वाली संकरी सड़क, रविवार सुबह की तस्वीर

पंचमी के दिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था. इसमें भीड़ को बैरिकेड तोड़कर चोरबागान सार्वजनिक पूजा पंडाल में घुसते और पुलिसकर्मियों को धक्का देते हुए देखा जा सकता है. कई लोगों को हादसा होने का डर सताने लगा था.

पंडाल देखने आए अनॉय गुप्ता ने बीबीसी बांग्ला को बताया, “सड़क से पंडाल तक पैदल जाने में 10 मिनट लगते हैं, लेकिन लोगों को लाइन में एक घंटे तक इंतज़ार कराया गया. लाइन आगे नहीं बढ़ रही थी. लेकिन हर पल लाइन में और लोग जुड़ते जा रहे थे. लाइन में लोगों के आगे बढ़ने का कोई ‘फ़्लो’ नहीं था.”

उन्होंने कहा, “डेढ़ घंटे इंतज़ार करने के बाद जब लाइन आगे बढ़ी, तो लोगों को देखने और मूर्ति के दर्शन के लिए ऊपर जाने के लिए काफ़ी घूमकर जाना पड़ता था. वहां भी लोगों की लंबी कतारें थीं. अगर वहां किसी की तबीयत ख़राब हो जाती, तो उसे बाहर निकालने का कोई रास्ता नहीं था.”

गुप्ता ने कहा, “मेरे पीछे लाइन में खड़ा एक आदमी पानी मांगते हुए बेहोश हो गया, लेकिन उसके पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था.”

चंदननगर के निवासी सप्तर्षि मजूमदार 17 अक्तूबर को हुए हादसे से पहले पंडाल देखने गए थे.

उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि इस साल पिछले कुछ सालों के मुक़ाबले भीड़ ज़्यादा थी और आयोजकों को इसे संभालने में मुश्किल हो रही थी. इसके चलते सड़कों पर लंबी कतारें लग गई थीं.

‘फ़ोरम फ़ॉर दुर्गोत्सव’ नाम की एक संस्था हर साल दुर्गा पूजा से पहले कोलकाता में रक्तदान शिविर आयोजित करती है.

इस शिविर में रक्तदान करने वालों को एक वीआईपी कार्ड दिया जाता है. इस कार्ड की मदद से वे कोलकाता के कई पूजा पंडालों में बिना लाइन में लगे दर्शन कर सकते हैं.

मजूमदार ने बताया कि इस साल चोरबागान सार्वजनिक पूजा समिति वीआईपी पास स्वीकार नहीं कर रही थी.

इसके चलते भीड़ काफ़ी बढ़ गई, क्योंकि सभी लोगों को एक ही लाइन में खड़ा होना पड़ रहा था.

दो दिन पहले ‘फ़ोरम फ़ॉर दुर्गोत्सव’ ने कहा था, “इस साल फ़ोरम के कार्ड पर ग़लती से चोरबागान का नाम छप गया था. हम अनुरोध करते हैं कि कोई भी हमारे कार्ड को दिखाकर चोरबागान पंडाल में प्रवेश करने की कोशिश न करे.”

सप्तर्षि मजूमदार के मुताबिक़, “इस साल बनाए गए पंडालों में अंधेरा और उदासी का माहौल था. इससे शनिवार को हुआ हादसा और भी दुखद हो गया.”

चोरबागान इलाके की स्थानीय निवासी रुमा रुद्र ने कहा, “जैसे ही बारिश शुरू हुई, बाहर के लोग अंदर आने के लिए दबाव बनाने लगे. वहीं, अंदर मौजूद लोग बारिश की वजह से बाहर नहीं निकलना चाहते थे.”

“अंदर भीड़ इतनी बढ़ गई कि चार लोग एक लड़की के ऊपर गिर गए. यह तो सिर्फ़ एक घटना है, ऐसी कई घटनाएं हुई हैं.”

उन्होंने कहा, “चोरबागान के पंडाल में हर बार भीड़ होती है, लेकिन इस साल भीड़ कुछ ज़्यादा ही थी.”

हालांकि, कई लोगों ने शिकायत की है कि पंडाल में आने-जाने के संकरे रास्तों ने स्थिति को और डरावना बना दिया था.

कोलकाता पुलिस की भूमिका पर सवाल

चोरबागान दुर्गा पूजा समिति पंडाल से बाहर निकलने का रास्ता

दुर्गा पूजा के दौरान हर साल भीड़ और ट्रैफ़िक संभालने के लिए कोलकाता पुलिस की तारीफ़ की जाती रही है.

यहां तक कि दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता पुलिस के प्रबंधन को देश के कई राज्यों में एक ‘केस स्टडी’ के तौर पर भी पेश किया गया है.

लेकिन कई लोगों का कहना है कि इस साल स्थिति बिल्कुल अलग है.

सॉल्ट लेक इलाके के एक निवासी ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि उन्होंने लालबाज़ार हेल्पलाइन पर फ़ोन करके यह जानना चाहा कि चितपुर स्थित कोलकाता स्टेशन जाने के लिए सड़क खुली है या बंद. लेकिन हेल्पलाइन पर उन्हें यह नहीं बताया जा सका कि सड़कों का क्या हाल है.

उन्होंने कहा, “सड़क बंद है, लेकिन पुलिस को ख़ुद इसकी जानकारी नहीं है. कोलकाता के निवासी के तौर पर मेरे लिए यह घटना नई है.”

दूसरी ओर, कोलकाता के कई निवासियों ने इस साल दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं.

उनका आरोप है कि पिछले साल के मुक़ाबले इस साल ट्रैफ़िक जाम ज़्यादा है और लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही कि कौन-सी सड़क कब और कहां बंद होगी.

कोलकाता पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी सनाउल्लाह ख़ान ने बीबीसी बांग्ला को बताया, “पहले कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को अब बंगाल के दूसरे हिस्सों में भेज दिया गया है.”

“फ़िलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार के कैडर के कई अधिकारियों को कोलकाता पुलिस में पद दिए गए हैं. उनमें से ज़्यादातर को कोलकाता में पूजा के दौरान भीड़ संभालने का कोई अनुभव नहीं है.”

क्या पांच मिनट की मूसलाधार बारिश ज़िम्मेदार थी?

चोरबागान का पूजा मंडप बंद कर दिया गया है, पुलिस तैनात की गई है, रविवार सुबह की तस्वीर

चश्मदीदों के मुताबिक़, शाम के समय हज़ारों लोग चोरबागान सार्वजनिक पूजा पंडाल में जमा थे.

शाम करीब 7.30 बजे तेज़ बारिश शुरू हुई, तो कई लोग संकरी गलियों के बीच बने इस पूजा पंडाल के अंदर शरण लेने के लिए दौड़ पड़े.

दूसरी ओर, पंडाल के अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल पा रहे थे. बारिश में बाहर फंसे लोग भी अंदर जाने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे.

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने कहा, “बारिश की वजह से प्रेशर कुकर जैसी स्थिति बन गई थी. जब अचानक बारिश शुरू हुई, तो स्थिति नाज़ुक हो गई.”

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद सहायक पुलिस आयुक्त से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक़, एक निजी सुरक्षा एजेंसी की घोषणा और कुछ लोगों के सीटी बजाने के बाद घटना शुरू हुई.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे घटनास्थल के कई वीडियो में पंडाल के भीड़ प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों को लाउडस्पीकर पर यह घोषणा करते हुए सुना जा सकता है कि ‘बारिश की वजह से पंडाल गिर सकता है. इसके बाद भगदड़ मच गई.’

पूजा समिति पर कब्ज़े का आरोप, नई समिति पर सवाल

कोलकाता मेडिकल कॉलेज में एक घायल महिला

चोरबागान इलाके के निवासियों का दावा है कि दुर्गा पूजा से पहले चोरबागान यूनिवर्सल दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया था.

इसके बाद एक नई समिति बनाई गई, जिसमें बीजेपी के क़रीबी देवदीप अधिकारी भी शामिल थे. वह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भतीजे हैं.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ख़ुद इस पंडाल का उद्घाटन किया था.

चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के पूर्व सचिव जयंत बनर्जी के क़रीबी अनिंद्य भौमिक और उनकी बेटी प्रत्युषा बनर्जी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “प्रत्युषा किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ी नहीं थीं. उन्हें ज़बरन बाहर निकाल दिया गया. पूर्व समिति ने पहले पूजा की थी, लेकिन बीजेपी नेताओं ने क्लब पर कब्ज़ा कर लिया और नई पूजा की और पहले लगाई गई प्रतिमा को बुलडोज़र से तोड़ दिया.”

चोरबागान इलाके के एक निवासी ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर कहा, “यह नई समिति शुरुआत से ही भीड़ संभालने में नाकाम हो रही थी. कुछ पुलिसकर्मी और भगवा टी-शर्ट पहने वालंटियर भीड़ को संभालने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन इस नई समिति के वालंटियर्स की संख्या बहुत कम थी.”

पंडाल के पीछे रहने वाले एक निवासी ने अपना नाम बताए बिना बीबीसी बांग्ला से कहा कि हर बार की तरह इस बार भी पंडाल से बाहर निकलने का रास्ता उनके घर के सामने बनाया गया था.

लेकिन हर बार की तरह इस बार भी वहां पूजा समिति का कोई वालंटियर लोगों की मदद के लिए मौजूद नहीं था.

चोरबागान पब्लिक क्लब से फ़ोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने फ़ोन नहीं उठाया.

शहरी विकास और नगर नियोजन विभाग के राज्य मंत्री उमेश रॉय ने कहा कि कोलकाता पुलिस इस घटना की जांच कर रही है और इसमें शामिल लोगों को बख़्शा नहीं जाएगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS