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कौन हैं अमेरिकी नागरिक वैनडाइक जिनको अपने देश जाने देने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

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Source :- BBC INDIA

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक

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दिल्ली की राउज़ एवेन्यू की विशेष एनआईए कोर्ट ने कथित म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में गिरफ़्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश लौटने की इजाज़त दे दी है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, कोर्ट ने गुरुवार को सातों अभियुक्तों को कुछ शर्तों और औपचारिकताओं के तहत अपने मुल्क जाने की अनुमति दे दी.

गुरुवार को ही रात में मैथ्यू आरोन वैनडाइक को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया और वो अपने देश रवाना हो गए.

क़ानूनी मामलों को कवर करने वाले पोर्टल बार एंड बेंच के मुताबिक़, विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने 24 सितंबर को यह आदेश तब दिया, जब 18 सितंबर को ही सभी सात अभियुक्तों को डिफ़ॉल्ट ज़मानत मिल चुकी थी.

एनआईए तय समय में अपनी जांच पूरी करने और गैरक़ानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपपत्र दाखिल करने में नाकाम रही थी.

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एनआईए ने मार्च 2026 में गिरफ़्तार किया था. यूक्रेनी नागरिकों के नाम हुर्बा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफ़ानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर हैं.

उनके ख़िलाफ़ यूएपीए की धारा 18 के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई थी. उन पर टेरर एक्टिविटीज़ को अंजाम देने की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया था.

कांग्रेस पार्टी और कई लोगों ने इस मामले में अभियुक्तों की रिहाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं.

18 सितंबर को जब अभियुक्तों को डिफॉल्ट ज़मानत दी गई तो मैथ्यू के वकील रोहित डांड्रियाल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उम्मीद जताई थी कि उनके क्लाइंट ‘जल्द ही जेल से बाहर होंगे.’

वकील रोहित डांड्रियाल ने कहा था, “अदालत ने साफ़ तौर पर कहा कि अब मेरे मुवक्किल को ज़मानत पाने का अधिकार है, क्योंकि वह 180 दिनों से ज़्यादा समय से जेल में बंद हैं. यूएपीए मामले में एनआईए ने आरोप पत्र दाख़िल नहीं किया है. इस एक्ट में 180 दिन में आरोप पत्र दाख़िल करना अनिवार्य है.”

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़, कोर्ट ने अभियुक्तों को एक महीने की अवधि समाप्त होने के बाद भारत लौटने और 72 घंटे में कोर्ट को जानकारी देने का आदेश दिया है.

क्या थे आरोप

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक

बार एंड बेंच के अनुसार, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक समेत सातों अभियुक्तों पर आरोप था कि वे वैध परमिट के बिना मिज़ोरम में दाख़िल हुए और फिर अवैध रूप से सीमा पार करके म्यांमार पहुंचे.

वहां इस ग्रुप ने कथित तौर पर म्यांमार की सैन्य सरकार से लड़ रहे जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग दी.

बीबीसी इस मामले की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

शुरुआत में इस मामले में यूएपीए की धारा 18 के तहत केस दर्ज किया गया था. हालांकि, एनआई ने मामले में दाख़िल पहली चार्जशीट में सिर्फ़ इमिग्रेशन और फ़ॉरेनर्स एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का ज़िक्र किया.

बाद में एनआईए ने स्पष्ट किया कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ टेरर से जुड़े आरोप नहीं हटाए गए हैं.

कौन हैं मैथ्यू वैनडाइक

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक

एक मई 2022 को गेटी इमेजेज़ ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की एक तस्वीर जारी की थी.

तस्वीर के कैप्शन के मुताबिक़, “अमेरिका के ये पूर्व सैन्य अधिकारी रूस के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए यूक्रेनी सैनिकों को ट्रेनिंग दे रहे थे.”

“यूक्रेन के ल्वीव में एक होटल के कमरे की यह तस्वीर 1 मई, 2022 की है. इसमें मैथ्यू वैनडाइक एक एनजीओ सन्स ऑफ़ लिबर्टी इंटरनेशनल (सोली) के प्रमुख हैं. यह संगठन अमेरिका के पूर्व सैन्य प्रशिक्षकों को यूक्रेन की टेरिटोरियल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ और नेशनल गार्ड की इकाइयों के साथ काम करने के लिए भेजता है.”

“यूक्रेन में करीब 12 प्रशिक्षकों के साथ काम कर रहे सोली को सैन्य मदद देने का अनुभव है. संगठन ने पहले उत्तरी इराक़ में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों से लड़ने वाले ईसाई सैनिकों को इसी तरह की मदद दी थी. इसके अलावा, संगठन के सदस्य फ़िलिपींस और अफ़्रीका में भी काम कर चुके हैं.”

इसी कैप्शन में दावा किया गया था कि “जल्द ही वे बर्मा में भी काम करने वाले हैं.”

गेटी इमेजेज़ ने एक दूसरी तस्वीर जारी की जिसमें मैथ्यू वैनडाइक दो अन्य व्यक्तियों के साथ खड़े हैं.

कैप्शन में उनका परिचय कुछ इस तरह दिया गया है, “अमेरिकी मरीन कोर के पूर्व इन्फैंट्री सैनिक एरिक इनबॉडी, गैर-लाभकारी संगठन सन्स ऑफ़ लिबर्टी इंटरनेशनल (सोली) के प्रमुख मैथ्यू वैनडाइक और अमेरिकी सेना के पूर्व कॉम्बैट मेडिक जेसन 1 मई, 2022 को यूक्रेन के ल्वीव में एक होटल के कमरे की बालकनी में तस्वीर खिंचवाते हुए.”

कांग्रेस ने अमेरिकी दबाव का लगाया आरोप

कांग्रेस के वरिष्ट नेता जयराम रमेश का कोट

शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को एक महीने के लिए अपने देश जाने के लिए डिफ़ॉल्ट बेल पर रिहा किए जाने के बाद मोदी सरकार पर हमला बोला.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अभियुक्तों की रिहाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर अमेरिकी दबाव का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति अपनी टीम के साथ पर्यटक बनकर हमारे देश आता है. वह मिज़ोरम से म्यांमार की सीमा पार करता है, वहां उग्रवादियों को ट्रेनिंग देता है, वापस आता है और उसे गिरफ़्तार कर लिया जाता है. और अचानक उसे रिहा किया जा रहा है? सरेंडर मोदी से पूछिए, आप अमेरिका के सामने और कितना सरेंडर करेंगे?”

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस फ़ैसले के पीछे अमेरिका का दबाव था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में नाकाम रहे.

विपक्षी पार्टी ने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए कि इन संदिग्ध विदेशी नागरिकों को वीज़ा कैसे दिया गया और सबसे पहले उन्हें भारत के रास्ते म्यांमार जाने की अनुमति कैसे मिली.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को एक्स पर एक लंबी पोस्ट में आरोप लगाया कि 23 से 26 मई के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री के भारत दौरे के समय भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी के सामने यह मुद्दा उठाया था.

जयराम रमेश ने दावा किया, “16 मार्च को एनआईए कोर्ट में आरोप लगाया गया कि अभियुक्त भारत विरोधी विद्रोही ग्रुपों को मदद दे रहे थे. यह भी आरोप लगाया गया कि अभियुक्तों ने टेररिस्ट एक्टिविटीज़ की बात क़बूल की है.”

“उसके बाद आठ सितंबर को यूएपीए के आरोपों को हटा लिया गया और 24 सितंबर को उन्हें जेल से रिहा कर, घर जाने की इजाज़त दे दी गई.”

जयराम रमेश ने लिखा, “यह साफ़ है कि इस फ़ैसले के पीछे अमेरिका का दबाव था, लेकिन भारत को बदले में क्या मिला? सबसे अहम सवाल यह है कि इन संदिग्ध विदेशी नागरिकों को वीज़ा कैसे दिया गया और उन्हें भारत के रास्ते म्यांमार जाने की अनुमति कैसे मिली? गृह मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए. प्रधानमंत्री भारत के चुनावों, संस्थानों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं.”

केरल कांग्रेस ने आरोप लगाया, “उन्हें (मैथ्यू) अमेरिकी दूतावास की कार में सीधे हवाई अड्डे ले जाया गया. वहीं, हमारे नागरिकों को हथकड़ी लगाकर वापस भारत भेज दिया गया.”

एक्सपर्ट ने क्या कहा

ब्रह्मा चेलानी

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने विदेशी नागरिकों की रिहाई पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत, हमेशा से एक सॉफ़्ट स्टेट रहा है. अमेरिकी गुप्त अभियान चलाने वाले मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी ड्रोन विशेषज्ञों को चुपचाप भारत छोड़ने की अनुमति देने का फ़ैसला किसी एक मामले में क़ानूनी फ़ैसले को पलटने तक सीमित नहीं है.”

“यह उस लंबे और असहज सिलसिले का हिस्सा है, जिसमें नई दिल्ली सख़्त आपराधिक क़ानूनों का हवाला तो देती है, लेकिन भू-राजनीतिक दबाव बढ़ने पर पीछे हट जाती है.”

उन्होंने लिखा, “मध्य पूर्व और यूक्रेन में गुप्त अभियानों का अनुभव रखने वाले वैनडाइक को मार्च में यूक्रेन के छह सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त सहयोगियों के साथ गिरफ़्तार किया गया था. भारतीय अदालत में दाख़िल दस्तावेज़ों के मुताबिक, यह समूह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा था. यह नेटवर्क ड्रोन की तस्करी करके उन्हें भारत लाता था और फिर म्यांमार भेजता था.”

उन्होंने लिखा, “राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए लगाया था. यह भारत का प्रमुख आतंकवाद विरोधी क़ानून है. इसके बाद अचानक फ़ैसला बदल गया.”

“अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जब वैनडाइक की हिरासत का मुद्दा सीधे नई दिल्ली के सामने उठाया, तो एनआईए ने यूएपीए के तहत लगे आरोप हटा दिए. अब वैनडाइक और सभी छह यूक्रेनी नागरिकों को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है और उन्हें अपने देश लौटने की अनुमति मिल गई है.”

ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि हमेशा ही चर्चित आपराधिक मामलों में विदेशी नागरिक बच निकलते हैं.

उन्होंने लिखा, “यह मामला एक पुराने और पहचाने जाने वाले सिलसिले की याद दिलाता है. भोपाल गैस त्रासदी और पुरुलिया हथियार गिराने के मामले से लेकर इटली के मरीन से जुड़े एनरिका लेक्सी मामले और बोफ़ोर्स घोटाले में ओटावियो क्वात्रोची के देश से भागने तक, भारत में विदेशी नागरिकों या संस्थाओं के ख़िलाफ़ चल रही कई चर्चित आपराधिक कार्रवाइयों को कूटनीतिक या रणनीतिक दबाव में कमज़ोर किया गया, छोड़ दिया गया या उनका कोई ख़ास नतीजा नहीं निकला.”

“मामले अलग-अलग हैं और भारत की सरकारें भी अलग-अलग रही हैं, लेकिन सवाल आज भी बना हुआ है: भारत एक ऐसा नरम राष्ट्र क्यों है, जो ताक़तवर विदेशी हितों से जुड़े मामलों में अक्सर जवाबदेही तय करने में नाकाम रहता है?”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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