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कौन हैं दिनेश ठक्कर, जो मुंबई के जुहू में खरीद लिए ₹711 करोड़ का घर! किराए के मकान से ड्रीम होम तक की दास्तान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुंबई के जुहू में एक पूरा 8 मंजिला (G+7) रेजिडेंशियल टावर खरीदा जाए। कीमत? 711 करोड़ रुपये से भी ज्यादा। यह सिर्फ एक महंगा घर नहीं है बल्कि यह तीन दशक की जिद, अनुशासन और धैर्य की कहानी है। यह कहानी है एंजेल वन (Angel One) के फाउंडर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश ठक्कर की। ठक्कर ने करियर के शुरुआती दौर में घर खरीदने की जगह किराये पर रहना पसंद किया। उन्होंने कहा था कि वे लगभग 40 साल की उम्र तक किराये के घरों में रहे।

जुहू में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी का नया रिकॉर्ड

दिनेश ठक्कर ने जुहू तारा रोड पर बने एम्बेसी टेराजा में एक पूरा टावर खरीदा है। यह कोई आम लक्जरी फ्लैट नहीं है। टावर का RERA कारपेट एरिया है 63,000 वर्ग फुट। डील लगभग 1.13 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट पर हुई है, जो जुहू में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी का नया रिकॉर्ड है। एम्बेसी डेवलपमेंट्स इसे भारत का सबसे बड़ा सिंगल रेजिडेंशियल यूनिट ट्रांजैक्शन बता रही है।

तो कौन हैं दिनेश ठक्कर?

दिनेश ठक्कर एंजेल वन के फाउंडर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। कंपनी 1996 में बनी थी। शुरुआत में यह पारंपरिक स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी थी, लेकिन बाद में यह डिजिटल-फर्स्ट फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी बन गई। कंपनी का कहना है कि उसका डिजिटल सफर 2019 में शुरू हुआ, जब उसने एंड-टू-एंड डिजिटल इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशन देना शुरू किया।

आज एंजेल वन का कस्टमर बेस टियर-2 और टियर-3 शहरों तक फैल चुका है। ठक्कर लगभग तीन दशक से इस बिजनेस के केंद्र में हैं। यानी 711 करोड़ के इस घर की कहानी सिर्फ एक महंगी खरीद नहीं, बल्कि तीन दशक की मेहनत का नतीजा है।

शुरुआत में मिली थी बड़ी नाकामी

ठक्कर पहले भी कह चुके हैं कि बिजनेस बनाने में जल्दी रिजल्ट की सोच ठीक नहीं। उनका मानना है कि टिकाऊ बिजनेस बनाने में दशकों लग सकते हैं।

उन्होंने अपनी एक बड़ी असफलता के बारे में भी बताया है। साल 2001 के आसपास उन्होंने इंटरनेट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में भारी निवेश किया, लेकिन डॉट-कॉम बबल फूटने पर उनकी लगभग 80% पूंजी डूब गई।

उन्होंने इस असफलता को छिपाया नहीं। बल्कि एंजेल वन में “फेल्योर क्लब” शुरू किया। इसमें कर्मचारी उन प्रोजेक्ट्स पर चर्चा कर सकते थे जो सफल नहीं हुए। क्यों हुए, क्या गलती थी, और दूसरे लोग उसे सुलझाने में कैसे मदद कर सकते हैं।

किराये मकान से 711 करोड़ के घर तक की दास्तान

दिलचस्प बात यह है कि ठक्कर ने करियर के शुरुआती दौर में घर खरीदने की जगह किराये पर रहना पसंद किया। उन्होंने कहा था कि वे लगभग 40 साल की उम्र तक किराये के घरों में रहे। उनकी सोच थी कि शुरुआती दौर में पैसा रियल एस्टेट में फंसाने से बेहतर है उसे अपने बिजनेस में लगाना।

उन्हें लगता था कि उनका बिजनेस ज्यादा अच्छा रिटर्न दे रहा है।

बाद में जब करियर, लोकेशन और फैमिली लाइफ स्थिर हुई, तब उन्होंने घर खरीदना सही समझा, लेकिन अब जुहू का यह 711 करोड़ का टावर खरीदने की उनकी सोच का बहुत बड़ा और अलग चैप्टर है।

जुहू वाला टावर क्यों खास है?

यह डील सिर्फ कीमत से नहीं, बल्कि इससे भी खास है कि ठक्कर एक फ्लैट नहीं, पूरा टावर खरीद रहे हैं। एम्बेसी टेराजा पांच टावरों का प्रोजेक्ट है, जो 2 एकड़ से ज्यादा में फैला है। इसमें करीब 50 रेसिडेंस बनने हैं और अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ठक्कर ने अपने इस नए ड्रीम होम का नाम रखा है, “एंजेलस”। एम्बेसी के मुताबिक, ठक्कर को प्राइवेसी, खुली जगह, शानदार समुद्री व्यू और परिवार के लिए लंबे समय तक रहने लायक ठिकाना चाहिए था।

सिर्फ बिजनेस नहीं, फिटनेस और कारों के भी शौकीन

ठक्कर फिटनेस और अनुशासन पर भी खुलकर बात करते हैं। एक बार पीठ की चोट और स्लिप्ड डिस्क के बाद उन्होंने गंभीर वेट ट्रेनिंग शुरू की। उनके बेटे, जो सर्टिफाइड फिटनेस कोच हैं, ने उन्हें ओलंपिक बार और स्ट्रक्चर्ड वेट ट्रेनिंग से मिलवाया। ठक्कर फिटनेस को सिर्फ सेहत नहीं, बल्कि अनुशासन और लंबे लक्ष्यों तक पहुंचने की ताकत मानते हैं।

कारों का भी उन्हें खास शौक है। उनके पास या उन्होंने जिन कारों का जिक्र किया है, उनमें मिनी कूपर, AMG GT S, लैम्बर्गिनी हुराकान परफॉर्मांटे, AMG G-Wagon, फेरारी 488 पिस्टा और पोर्श GT3 RS जैसी गाड़ियां शामिल हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN