Source :- LIVE HINDUSTAN
बच्चे के जन्म के बाद उसकी छोटी-छोटी हरकतों को प्रेगनेंसी के समय से जोड़कर देखा जाता है। डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने उनकी ओपीडी में आए एक मामले को शेयर किया है जिसमें बच्चे के मिर्च ना खाना पर घरवाले प्रेगनेंसी से जोड़ रहे हैं, जानिए इस बारे में क्या कहती हैं एक्सपर्ट।
बच्चे के जन्म के बाद जब उसके मुंह से लार टपकती है तो इसे प्रेगनेंसी से जोड़कर देखा जाता है। कहते हैं कि जब मां अपने मन का कुछ नहीं खा पाती है तो बच्चे की लार टपकती रहती है, लेकिन ये एक मिथक है। इसके अलावा भी बड़े बुजुर्ग बच्चे की कुछ हरकतों को प्रेगनेंसी के दौरान मां द्वारा की जाने वाली गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है। बच्चों की डॉक्टर माधवी भारद्वाज के पास एक पेरेंट्स ये शिकायत लेकर आए कि उनका बच्चा मिर्च नहीं खाता, इस पर पेरेंट्स का मानना है कि प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे की मां भी कुछ नहीं खाती थीं इसलिए ऐसा हुआ। आइए, जानते हैं इस बारे में डॉक्टर की राय।
क्या प्रेगनेंसी से जुड़ा बच्चे का मिर्च ना खाना
डॉक्टर के पास एक पेरेंट्स आए जिनकी शिकायत थी की उनका बच्चा मिर्ची नहीं खाता। वह डॉक्टर से सलाह मांग रहे थे कि कोई तरीका बताएं जिससे बच्चा मिर्ची वाला खाना खाने लगे। इस दौरान मां ने बताया कि हर कोई मां को ये कह रहा है कि क्योंकि प्रेगनेंसी में उन्होंने मिर्ची वाला खाना नहीं खाया इसी वजह से बच्चा भी अब मिर्ची नहीं खाता। डॉक्टर बताती हैं कि बहुत से लोग तो ऐसे हैं जो प्रेगनेंसी के समय पर कुछ भी नहीं खा पाते हैं और मिर्ची भी गट को इरिटेट करते हैं जिसकी वजह से गट को दिक्कत होती है और वह इसे बर्दाश्त नहीं कर पाती है। इसके अलावा हार्मोन की वजह से भी गट की मसल्स ऐसी हो जाती है कि खाना बार-बार ऊपर आ रहा होता है। जिसकी वजह से सीन में जलन होती है और बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। इससे बच्चे के मिर्ची ना खाने का कोई संबंध नहीं है। बच्चा मिर्ची नहीं खाता इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
बच्चे के मिर्ची नहीं खाने के पीछे कारण
1) जो चीजें आपको चटपटी और टेस्टी लगती हैं हो सकता है कि वह बच्चे के टेस्ट बड्स के लिए सेंसेटिव हों। बच्चे के टेस्ट बड्स के लिए ये सभी बहुत ज्यादा दर्दनाक और जलन वाली हो सकती हैं। बच्चे के लिए ये नोक्शियल सिम्यूलस की तरह हो सकता है।
2) कुछ बच्चों के लिए नियोफोबिया की तरह हो सकता है। जिसमें कड़वा या मिर्ची वाली चीजें खाते ही दिमाग में घंटियां बजने लग जाती हैं कि इससे दूर रहने की जरूरत है।
3) कुछ बच्चों के लिए तीखा खाना गट में उत्तेजक की तरह होता है। जब बच्चे इसे खाते हैं तो वह इसे जल्दी बाहर निकालने के चक्कर में रहते हैं। इसकी वजह से पेट में मरोड़ जैसा हो सकता है। इंटेस्टाइनल मोबिलिटी बहुत फास्ट हो जाती है और बच्चे को डायरिया भी हो जाता है। कितनी बार ऐसा बड़ों को भी हो जाता है, जब कोई जरूरत से ज्यादा मिर्च खा लेता है और पॉटी के समय पर जलन जैसा भी होता है। बच्चे ये सब नहीं बता पाते हैं लेकिन हो सकता है कि पूरे दिन जिस वजह से वह चिड़चिड़ा हो रहा है उसकी वजह पॉटी के रास्ते में जलन हो।
कैसे खिलाना शुरू करें बच्चे को मिर्च
6 महीने से आप हल्दी, अजवायन, जीरा, हींग जैसे मसाले जो आप अपने खाने में डालते हैं वह बच्चे के खाने में भी डाल सकते हैं।
9 महीने से 12 महीने के बच्चे के खाने में काली मिर्च से शुरुआत कर सकते हैं। बच्चे के पहले बर्थडे के बाद आप धीरे-धीरे घर में खाई जाने वाली मिर्चों को भी बच्चे के खाने में शामिल कर सकते हैं।
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