Source :- LIVE HINDUSTAN

‘आराश-ए-कमानगीर’ एक मोबाइल और कम लागत वाली स्वदेशी रक्षा प्रणाली है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रणाली पारंपरिक रडार साइटों पर निर्भर रहने के बजाय इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल या हीट-सीकिंग तकनीक का उपयोग कर सकती है।

ईरान-अमेरिका संघर्ष और तनातनी के बीच तेहरान ने दावा किया है कि उसने इस हफ्ते की शुरुआत में होर्मुज़ समुद्री मार्ग के पास अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने के लिए एक नई हवाई रक्षा प्रणाली तैनात की थी, जो स्थानीय तौर पर निर्मित थी। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि अमेरिकी ड्रोन जिसकी प्रति यूनिट कीमत 1.6 करोड़ डॉलर से 3 करोड़ डॉलर के बीच बीच है, को होर्मुज़ स्ट्रेट में क़ेशम द्वीप के पास ‘अराश-ए-कमानगीर’ नामक एक स्थानीय रूप से विकसित प्रणाली का उपयोग करके मार गिराया गया है।

अगर ईरान का ये दावा सही है, तो यह पहले तरह का ऐसा हथियार होगा जिसका उपयोग ईरान ने अमेरिकी ड्रोन को जमींदोज करने के लिए किया है। इस हथियार का नाम ईरान के एक प्रसिद्ध पात्र ‘अराश-द-आर्चर’ (तीरंदाज अराश) के नाम पर रखा गया है। इस हमले का अर्थ यह है कि मध्य पूर्व में महीनों से चल रहे युद्ध के बावजूद, तेहरान ने अमेरिका और इज़रायल के हमलों को रोकने की अपनी सैन्य क्षमता को बरकरार रखा है।

क्या है ‘अराश-ए-कमानगीर?

‘अराश-ए-कमानगीर एक नई इंटरसेप्टर प्रणाली है। इसका नाम फारसी पौराणिक कथाओं के महान धनुर्धर ‘आराश-द-आर्चर’ के नाम पर रखा गया है। लोककथाओं के अनुसार, आराश ने ईरान और मध्य एशिया के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए एक तीर चलाया था। इस प्रणाली की लागत बहुत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘आराश-ए-कमानगीर’ एक मोबाइल और कम लागत वाली स्वदेशी रक्षा प्रणाली है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रणाली पारंपरिक रडार साइटों पर निर्भर रहने के बजाय इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल या हीट-सीकिंग तकनीक का उपयोग कर सकती है।

क्या खासियत?

इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पारंपरिक वायु रक्षा नेटवर्क की तुलना में आसानी से छिपाया और कहीं भी ले जाया जा सकता है और तेजी से लॉन्च किया जा सकता है। किंग्स कॉलेज लंदन के सुरक्षा विशेषज्ञ मार्क हिलबोर्न का कहना है कि ईरान मिसाइल डिजाइन में आत्मनिर्भर हो गया है और वह युद्ध की आर्थिक रणनीति को बदल रहा है। उन्होंने बताया कि “सस्ती और सरल प्रणालियाँ अब बहुत अधिक जटिल और महंगी प्रणालियों के लिए खतरा पैदा कर रही हैं”। MQ-9 रीपर जैसे ड्रोन, जो मुख्य रूप से निगरानी के लिए उपयोग किए जाते हैं और धीमी गति से चलते हैं, ऐसी प्रणालियों के लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं।

ईरान की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में महीनों से तनाव जारी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन उनकी हवाई और समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए एक “स्पष्ट और निर्णायक संदेश” है। हालांकि, अभी तक किसी भी स्वतंत्र स्रोत ने ईरान के इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

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