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गारंटी और वारंटी में क्या है अंतर? सामान खरीदने से पहले जरूर जान लें ये 5 बातें

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कोई भी सामान खरीदते समय आपने वारंटी या गांरटी जैसे शब्द जरूर सुने होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं दोनों के बीच क्या अंतर होता है। चलिए आज आपको दोनों के बीच का फर्क बताते हैं।

आजकल मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन या कोई भी सामान खरीदते समय गारंटी-वारंटी शब्द जरूर सुने होंगे। दुकानदार अक्सर प्रोडक्ट को बेचते समय इनका जिक्र करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं वारंटी और गारंटी में क्या अंतर होता है? किस सामान पर आपको गारंटी दी जाती है और किस पर वारंटी मिलती है। अगर आपको भी इन दोनों के बीच अंतर नहीं पता है, तो हम आपको विस्तार से पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। इसके बाद आप जब भी सामान खरीदने जाएंगे तो आपको कोई भी कन्फ्यूजन नहीं रहेगा।

गारंटी और वारंटी में क्या अंतर है?

गारंटी (Guarantee) आमतौर पर कंपनी की ओर से दिया गया ऐसा आश्वासन होता है, जिसके तहत तय शर्तों के अनुसार प्रोडक्ट में खराबी आने पर मरम्मत, रिप्लेसमेंट या कभी-कभी पैसे वापस करने की सुविधा मिल सकती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर गारंटी में नया सामान या पूरा पैसा वापस मिले। इसका फैसला कंपनी की लिखित शर्तों के आधार पर होता है।

वहीं, वारंटी (Warranty) में कंपनी तय समय के दौरान प्रोडक्ट में आने वाली कुछ तरह की खराबियों को ठीक करने का वादा करती है। इसके तहत खराब पार्ट की मरम्मत या उसे बदलने की सुविधा मिल सकती है। हालांकि, वारंटी में क्या-क्या शामिल होगा, यह प्रोडक्ट और कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है। कई बार वारंटी आप एक्स्ट्रा पैसे देकर बढ़वा भी सकते हैं।

सामान खरीदने से पहले जरूर चेक करें ये 5 बातें

1. गारंटी और वारंटी कितने समय की है?

कोई भी सामान खरीदते समय सबसे पहले यह देखें कि उस पर कितने समय की गारंटी या वारंटी मिल रही है। कुछ प्रोडक्ट पर 1 साल की वारंटी होती है, जबकि कुछ पर अलग-अलग पार्ट्स के लिए अलग अवधि तय हो सकती है। किसी फ्रिज की पूरी यूनिट और उसके कंप्रेसर की वारंटी अवधि अलग-अलग हो सकती है। इसी तरह, लैपटॉप या मोबाइल के कुछ एक्सेसरीज पर अलग शर्तें लागू हो सकती हैं। ये सभी चीजें कंपनी के ऊपर निर्भर होती हैं।

2. खराब सामान बदलने या पैसे वापस मिलने की शर्तें जानें

सामान खरीदते समय यह समझना जरूरी है कि प्रोडक्ट खराब होने पर कंपनी क्या सुविधा देगी। क्या कंपनी उसकी मरम्मत करेगी, खराब पार्ट बदलेगी, पूरा प्रोडक्ट रिप्लेस करेगी या कुछ परिस्थितियों में पैसे वापस करेगी? खासतौर पर एसी, फ्रिज, टीवी, माइक्रोवेव जैसी चीजों के लिए ऐसी शर्तें जरूर पूछें। अगर नया मिक्सर ग्राइंडर खरीदने के कुछ दिनों बाद काम करना बंद कर देता है, तो रिप्लेसमेंट की सुविधा कंपनी की पॉलिसी और लागू नियमों के अनुसार होगी।

3. वारंटी में क्या-क्या कवर होता है?

हर वारंटी में प्रोडक्ट की सभी तरह की खराबियां शामिल नहीं होतीं। कई कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट या तकनीकी खराबी को कवर करती हैं, लेकिन गिरने, पानी में भीगने, गलत इस्तेमाल या मरम्मत से हुए नुकसान को वारंटी से बाहर रख देती हैं। अगर मोबाइल में इस्तेमाल के दौरान कोई ऐसी तकनीकी खराबी आती है जो वारंटी के तहत कवर है, तो कंपनी उसे ठीक कर सकती है। लेकिन फोन गिरने से स्क्रीन टूटने पर मुफ्त मरम्मत नहीं होगी।

4. बिल, वारंटी कार्ड और जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें

सामान खरीदने के बाद उसका बिल और वारंटी से जुड़े दस्तावेज सही से रखना बेहद जरूरी है। खराबी आने पर कंपनी आपसे खरीदारी का पर्चा या बिल, प्रोडक्ट का सीरियल नंबर या वारंटी से संबंधित जानकारी मांग सकती है। कई कंपनियां अब डिजिटल बिल और ऑनलाइन वारंटी रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी देती हैं।

5. सर्विस सेंटर और छिपे हुए खर्चों की जानकारी लें

कई बार प्रोडक्ट की वारंटी तो मिल जाती है, लेकिन खराबी आने पर सर्विस सेंटर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले यह जान लें कि आपके शहर में कंपनी का सर्विस सेंटर कहां है और शिकायत दर्ज करने का तरीका क्या है। इसके अलावा, यह भी पूछें कि वारंटी के दौरान मरम्मत के लिए कोई सर्विस चार्ज, विजिट चार्ज या अन्य चार्ज देना होगा या नहीं। कुछ मामलों में पार्ट्स की मरम्मत या बदलाव कवर होने के बावजूद कुछ खर्च अलग से देने पड़ सकते हैं।

गारंटी या वारंटी का क्लेम कैसे करें?

अगर खरीदा हुआ सामान खराब हो जाता है, तो सबसे पहले उसका बिल और वारंटी से जुड़े दस्तावेज निकालें। इसके बाद कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर या सर्विस सेंटर से संपर्क करें।

क्लेम करते समय इन बातों का ध्यान रखें-

प्रोडक्ट का बिल और वारंटी कार्ड या डिजिटल रिकॉर्ड तैयार रखें।

खराबी की पूरी जानकारी दें और जरूरत पड़ने पर फोटो या वीडियो उपलब्ध कराएं।

कंपनी से शिकायत का नंबर या लिखित रिकॉर्ड जरूर लें।

मरम्मत या रिप्लेसमेंट से पहले पता करें कि कोई शुल्क देना होगा या नहीं।

अगर कंपनी वारंटी की शर्तों के विपरीत शिकायत का समाधान नहीं करती, तो लिखित शिकायत दर्ज कराएं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN