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‘ग्लास स्किन’ क्या हक़ीक़त है? त्वचा के लिए पांच ज़रूरी सुझाव

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Source :- BBC INDIA

मुहासों से ग्रसित एक युवती अपने चेहरे को छू रही है. उसकी नीली आँखें और भूरे घुंघराले बाल हैं.

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सोशल मीडिया किशोरों में “बेदाग रंगत” और जटिल “ग्लास स्किन” रूटीन के चलन को बढ़ावा दे रहा है.

सोशल मीडिया पर कई लोग पेशेवरों की सलाह के बजाय ‘गेट रेडी विद मी’ (जीआरडब्ल्यूएम) वीडियो में इन्फ्लुएंसरों की सलाह को तरजीह दे रहे हैं.

लेकिन क्या टीनएजर्स को वाक़ई कई चरणों वाली स्किनकेयर रूटीन की ज़रूरत है?

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जोनाथन केंटली के मुताबिक़, सोशल मीडिया का सबसे चिंताजनक असर “अवास्तविक सुंदरता के मानकों की लगातार दिखाई देने वाली तस्वीरें” हैं.

डॉ. केंटली कहते हैं, “मैंने हज़ारों मरीज़ों को देखा है और मैंने कभी किसी को ‘ग्लास स्किन’ के साथ नहीं देखा. मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई त्वचा होती है, और ये बस फ़िल्टर के इस्तेमाल से तैयार की गई तस्वीरें हैं जो बच्चों को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि ऐसा संभव है जबकि ऐसा नहीं है.”

डॉ. केंटली कहते हैं कि टीनएजर्स की स्किन पर दिखाई देने वाले ब्लैकहेड्स, दाग-धब्बे, पिगमेंटेशन, लालिमा और निशान होना बहुत सामान्य बात है.

लेकिन वो आगे कहते हैं कि हर किसी के लिए सामान्य स्थिति अलग होती है.

डॉ. केंटली कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ भी असामान्य है.”

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मुंहासों की आख़िर वजह क्या होती है?

13 से 18 वर्ष की आयु के 80% से अधिक टीनएजर्स को मुंहासों की समस्या होती है.

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. ज़ैनब लाफ़्ताह बताती हैं कि किशोरावस्था के दौरान होने वाली अधिकांश तथाकथित समस्याएं टेस्टोस्टेरोन से संबंधित होती हैं, जो तेल उत्पादन और मुंहासों में बढ़ोतरी का कारण बनता है.

लड़कों को इन समस्याओं का सामना अधिक करना पड़ सकता है, लेकिन लड़कियों में भी टेस्टोस्टेरोन होता है, इसलिए उन्हें भी कई समान लक्षण दिखाई देते हैं.

डॉ. लाफ्ताह कहते हैं, “यह, साथ ही साथ ब्लैक हेयर फॉलिकल्स और सूजन, ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और सूजन वाले धब्बों का कारण बनता है. मुहांसे बहुत आम हैं और इनका इलाज संभव है.”

डॉ. लाफ़्ताह का कहना है कि सैलिसिलिक एसिड, एक सामान्य सक्रिय तत्व है जो तेल से भरे पोर्स (रोमछिद्रों) में प्रवेश करके सीबम और मृत त्वचा कोशिकाओं के जमाव को साफ करने में मदद करता है.

डॉ. लाफ़्ताह कहती हैं, “ये तैलीय या मुंहासे वाली त्वचा वाले किशोरों के लिए विशेष रूप से सहायक हो सकता है.”

लेकिन साथ ही वो चेतावनी देती हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल से सूखापन और जलन हो सकती है.

अगर आप गंभीर मुँहासे या त्वचा की किसी गंभीर समस्या से पीड़ित हैं, तो डॉ. केंटली कहते हैं कि सोशल मीडिया पर लोगों से सलाह लेने के बजाय अपने डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ से मदद लें.

एक युवती सौंदर्य उत्पादों से घिरी हुई, दर्पण के सामने बैठी है. उसने एक हेडबैंड और सफेद टी-शर्ट पहनी हुई है और वह एक मोबाइल फोन पर बात कर रही है जो कैमरे की रेंज से थोड़ा बाहर है.

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तो, टीनएजर्स की त्वचा की देखभाल का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

विशेषज्ञ डॉ. ज़ैनब लाफ़्ताह और डॉ. जोनाथन केंटली ने ये पाँच सबसे अहम सुझाव दिए हैं –

1. सिंपल रूटीन

अपनी स्किनकेयर रूटीन को सिंपल रखें. आपको तीन बुनियादी चीज़ों की ज़रूरत है: एक क्लींज़र, एक खुशबू रहित मॉइस्चराइज़र और एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन.

2. कम इस्तेमाल

ज़्यादा स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना हमेशा बेहतर नहीं होता. बार-बार एक्सफोलिएशन या तेज़ एसिड वाले जटिल स्किनकेयर रूटीन से युवा त्वचा में जलन हो सकती है. याद रखें कि इस उम्र में त्वचा की सुरक्षात्मक परत अभी विकसित हो रही है और इससे नुक़सान हो सकता है.

डॉ. केंटली का कहना है कि उन्होंने किशोरों में पेरिओरल डर्मेटाइटिस नामक समस्या में तेज़ी से वृद्धि देखी है, जो हाइड्रोक्सी एसिड और रेटिनॉइड जैसे त्वचा की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के अधिक उपयोग से जुड़ी हुई है.

डॉ. लाफ़्ताह आगे कहती हैं, “किशोर तेज़ी से वयस्कों जैसे स्किनकेयर रूटीन अपना रहे हैं, जिनमें कई सीरम, टोनर, मास्क और एक्टिव इंग्रीडिएंट्स शामिल हैं.”

“इन एक्टिव इंग्रीडिएंट्स से त्वचा की सुरक्षात्मक परत को नुक़सान पहुंच सकता है और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं.”

3. नींद और भोजन

पर्याप्त नींद और संतुलित आहार लेना महत्वपूर्ण है. सफेद कार्बोहाइड्रेट और चीनी से भरपूर आहार के साथ-साथ नींद की कमी से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, और इन दोनों का संबंध मुंहासों से जोड़ा गया है.

डॉ. लाफ़्ताह अच्छी नींद लेने की पक्षधर हैं.

वो कहती हैं, “हम जानते हैं कि नींद की कमी से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जो एक तनाव हार्मोन है और मुंहासों का कारण बन सकता है.”

वहीं, डॉ. केंटली का कहना है कि सफेद चावल और पास्ता जैसे कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ, चीनी युक्त आहार और प्रोटीन शेक में पाया जाने वाला व्हे प्रोटीन, इन सभी का संबंध अध्ययनों में मुंहासों के बढ़ने से पाया गया है.

लेकिन वो इस बात पर ज़ोर देते हैं कि हर किसी की त्वचा अलग होती है और “कुछ लोगों को अन्य चीज़ों से भी त्वचा में समस्या हो सकती है.”

4. मुंहासों को नोंचें नहीं

अपने मुंहासों को नोंचें या फोड़ें नहीं. इससे ख़तरा यह है कि मुंहासों का तरल पदार्थ त्वचा में गहराई तक चला जाता है, जिससे सूजन बढ़ सकती है और दाग-धब्बे और त्वचा का रंग बदल सकता है.

डॉ. लाफ़्ताह कहती हैं कि सोशल मीडिया पर पिंपल हाइड्रोकोलाइड स्टार पैच काफी लोकप्रिय हैं. वो बताती हैं, “ये पैच ऊपरी मुंहासों से तरल पदार्थ सोख लेते हैं और एक सुरक्षात्मक परत बनाते हैं जो नोंचने से रोकती है.”

5. डॉक्टर से सलाह लें

अगर आपको लगातार दर्दनाक सिस्टिक या निशान छोड़ने वाले मुंहासे हैं, तो किसी सामान्य चिकित्सक या त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें, क्योंकि अक्सर इसके लिए डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार की आवश्यकता होती है.

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SOURCE : BBC NEWS