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चीन के बैन से रिलायंस और JSW परेशान, लेकिन टाटा ने निकाल लिया ‘काट’

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Source :- LIVE HINDUSTAN

टाटा ग्रुप की बैटरी बनाने वाली कंपनी अग्रतास एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस अब पहली बार अपनी खुद की तकनीक का इस्तेमाल करके सेल बनाने की तैयारी में जुट गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि, चीन ने महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग तकनीक के निर्यात पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। इससे भारतीय कंपनियों के लिए चीनी कंपनियों से तकनीक हासिल करना लगभग नामुमकिन हो गया है।

सीएनबीसी टीवी-18 के सूत्रों के अनुसार, अग्रतास के अधिकारियों ने यह आकलन कर लिया था कि किसी चीनी फर्म के साथ तकनीकी समझौता होने की संभावना लगभग शून्य है। इसलिए अब कंपनी ने आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना है।

गुजरात में पायलट प्रोडक्शन लाइन की स्थापना

अग्रतास गुजरात के साणंद स्थित अपनी आगामी बैटरी फैक्ट्री में लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) सेल की पायलट प्रोडक्शन लाइन बना रही है। इस पायलट लाइन पर भारतीय, दक्षिण कोरियाई और चीनी इंजीनियरों की एक टीम मिलकर काम करेगी। इन इंजीनियरों का मुख्य काम मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को बेहतर बनाना और एलएफपी सेल के पहले बैच को मान्य करना होगा, ताकि जब कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो तो सब कुछ सही ढंग से काम कर सके।

रिलायंस और जेएसडब्ल्यू जैसी कंपनियों को भी आ रही परेशानी

सिर्फ टाटा ही नहीं, बल्कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और जेएसडब्ल्यू ग्रुप जैसी कई बड़ी भारतीय कंपनियों को भी स्थानीय स्तर पर सेल बनाने के लिए जरूरी तकनीक हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा लाइसेंसिंग समझौते ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे इन कंपनियों की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

खुद की तकनीक विकसित करने में लगेगा ज्यादा समय और खर्च

अग्रतास का एलएफपी सेल के लिए रणनीति बदलने का फैसला कंपनी के लिए अतिरिक्त लागत और समय बढ़ाने वाला साबित होगा। हालांकि, दूसरे प्रकार के सेल यानी निकल मैंगनीज कोबाल्ट (NMC) के मामले में कंपनी को जापान की ऑटोमोटिव एनर्जी सप्लाई कॉर्प से तकनीक लाइसेंस करने में मदद मिली है।

यह जापानी कंपनी हांगकांग स्थित एनविजन एनर्जी इंटरनेशनल की इकाई है। इस साझेदारी ने अग्रतास को एनएमसी सेल के शुरुआती विकास चरण को छोड़कर सीधे उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने का मौका दिया था, लेकिन एलएफपी सेल के लिए कंपनी को शून्य से शुरुआत करनी होगी, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

एलएफपी बैटरी क्यों है खास

एलएफपी बैटरियां एनएमसी बैटरियों की तुलना में सस्ती होती हैं, हालांकि इनकी रेंज आमतौर पर कम होती है। ये बैटरियां स्टेबल स्टोरेज के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं। अग्रतास के लिए यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि भारत ग्रिड-स्तरीय बैटरी एनर्जी स्टोरेज मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। देश महत्वाकांक्षी रिन्युअल एनर्जी के लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में एलएफपी बैटरियां इस क्षेत्र में कंपनी की मदद कर सकती हैं।

बेंगलुरु में रिसर्च सेंटर में 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश

अग्रतास बेंगलुरु में 400 मिलियन डॉलर से अधिक का R&D सेंटर भी स्थापित कर रहा है, जो खासतौर पर एलएफपी और लिथियम मैंगनीज आयरन फॉस्फेट बैटरी तकनीकों पर केंद्रित होगा। ब्लूमबर्ग ने मई में यह रिपोर्ट किया था कि यह केंद्र कंपनी के भविष्य के तकनीकी विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

उत्पादन की समयसीमा और जगुआर लैंड रोवर को सप्लाई

अग्रतास की भारत स्थित सुविधा 2027 की शुरुआत तक एनएमसी बैटरी सेल का उत्पादन शुरू कर देगी। वहीं, इंग्लैंड के समरसेट में कंपनी की फैक्ट्री अगले साल के मध्य तक उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार है। इन दोनों सुविधाओं से शुरुआत में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की यूके बेस्ड यूनिट जगुआर लैंड रोवर को उसकी आगामी रेंज रोवर इलेक्ट्रिक एसयूवी के लिए सेल की सप्लाई की जाएगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN