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छत्तीसगढ़ के बलौदा बाज़ार-भाटापारा ज़िले के एक गांव में मामूली रंज़िशों और व्यक्तिगत शिकायतों के चलते ज़हर मिलाकर शराब पिलाने का मामला सामने आया है. पुलिस ने गांव के आठ लोगों की हत्या करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.
पुलिस का दावा है कि अभियुक्त ने पूछताछ के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया है. इस मामले में अलग-अलग महीनों में मारे गए लोगों के शवों को कब्र से निकालकर उनका पोस्टमार्टम कराया गया था.
हालांकि, गांव के लोगों का आरोप है कि गड़ा धन पाने के लिए अभियुक्त ने इन हत्याओं को अंजाम दिया था. लेकिन पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है.
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है. अभियुक्त ने भी पूछताछ के दौरान इस तरह की कोई बात नहीं कही है.
वहीं, अभियुक्त के बेटे ने दावा किया कि उसके पिता को फंसाया जा रहा है और वे बेगुनाह हैं.
ज़िले के पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा ने कहा, “कसडोल के खर्वे गांव के लोगों ने गांव के आठ लोगों की संदिग्ध मौत को लेकर 6 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. जांच और पूछताछ के आधार पर अभियुक्त रामसहाय जायसवाल को गिरफ़्तार किया गया. अभियुक्त ने स्वीकार किया है कि उसने छोटी-छोटी रंजिशों के कारण लोगों को शराब में ज़हर मिलाकर उनकी हत्या की.”
सभी के साथ आखिरी बार अभियुक्त को देखा गया
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खर्वे गांव के लोगों का कहना है कि इस साल 6 फ़रवरी से 14 मई के बीच गांव के आठ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी.
ग्रामीणों के मुताबिक़, सभी की मौत शराब पीने के बाद हुई थी और उन्हें आख़िरी बार गांव के ही रामसहाय जायसवाल के साथ देखा गया था.
गांव के कामता प्रसाद साहू के भाई छत्तूराम की मौत 12 मार्च को हुई थी, जबकि उनके भतीजे विनोद साहू की मौत 31 मार्च को हुई थी.
कामता प्रसाद साहू कहते हैं, “गांव में एक के बाद एक लोगों की मौत के बाद यह बात सामने आई कि रामसहाय जायसवाल गड़ा धन पाने के लालच में 21 लोगों की बलि देने वाला है. इसके बाद 6 जून को हम लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.”
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उन्हें जानकारी मिली है कि रामसहाय जायसवाल अंधविश्वास के चलते ज़मीन में गड़ा धन मिलने के लालच में 21 लोगों की हत्या करने की योजना बना रहा था.
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के कार्तिक नाम के एक व्यक्ति को भी अभियुक्त ने शराब में ज़हर मिलाकर पिलाया था. लेकिन थोड़ी-सी शराब पीने के बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे उल्टियां होने लगीं.
परिजनों ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जिससे उसकी जान बच गई. ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना के बाद गांव के लोगों का संदेह और गहरा गया.
शराब में ‘सुहागा’ मिलाने का आरोप
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ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने सबसे पहले एक मृतक का शव कब्र से निकलवाकर रायपुर स्थित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय भेजा, जहां उसका पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच कराई गई. बाद में संदेह गहराने पर अन्य शवों को भी निकलवाकर जांच के लिए भेजा गया.
पुलिस के अनुसार, 6 फ़रवरी से 14 मई के बीच जिन आठ लोगों की मौत हुई थी, उनमें से एक बुधराम जायसवाल का दाह संस्कार कर दिया गया था, जबकि बाकी सात लोगों के शव दफ़नाए गए थे.
गांव में अधिकांश लोग कबीरपंथी हैं, जिनमें शवों को दफ़नाने की परंपरा है. इन्हीं सात शवों को निकालकर विशेष मेडिकल टीम से पोस्टमार्टम कराया गया.
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान एक टीम लगातार गांव में रहकर लोगों से पूछताछ कर रही थी, जबकि दूसरी टीम तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी थी.
इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि अभियुक्त ने गांव के एक व्यक्ति से चूहे मारने की दवा के तौर पर ‘सुहागा’ नामक जहरीला पदार्थ हासिल किया था.
पुलिस के मुताबिक, अभियुक्त ने सबसे पहले इस जहरीले पदार्थ का परीक्षण एक कुत्ते पर किया था. इसके बाद उसने कथित तौर पर शराब में सुहागा मिलाकर अलग-अलग लोगों को पिलाना शुरू किया.
क्या कहती है पुलिस जांच?
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पुलिस के अनुसार, हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर अभियुक्त ने शुरुआत में आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में उसने अपराध स्वीकार कर लिया.
पुलिस का कहना है कि अभियुक्त ने पुरानी रंजिश, गाली-गलौज, व्यक्तिगत शिकायतों, चरित्र पर संदेह और टोने-टोटके से जुड़े संदेहों के कारण अलग-अलग लोगों को निशाना बनाने की बात कही है.
पुलिस के मुताबिक, मृतकों में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिनसे अभियुक्त का ज़मीन का विवाद था. कुछ से उसका आर्थिक लेन-देन जुड़ा था, जबकि कुछ के प्रति उसे व्यक्तिगत शिकायतें थीं. पुलिस का दावा है कि अभियुक्त ने इन कारणों से एक-एक कर लोगों को शराब में ज़हर मिलाकर पिलाया.
पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ आठ लोगों की हत्या और एक व्यक्ति की हत्या के प्रयास सहित कुल नौ आपराधिक मामले दर्ज किए हैं. मामले की जांच अभी जारी है.
वहीं अभियुक्त रामसहाय जायसवाल के बेटे रुद्रेश्वर जायसवाल ने कहा, “मेरे पिता को फंसाया जा रहा है. उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं. लेकिन कानून पर हमें पूरा भरोसा है और आज नहीं तो कल, सच सामने आएगा.”
पुलिस के अनुसार हत्या का कारण
- 6 फ़रवरी 2026: बद्री की मौत हुई. पुलिस का दावा है कि अभियुक्त ने शराब में ज़हर मिलाकर उसे पिलाया था. अभियुक्त के अनुसार बद्री उससे अक्सर गाली-गलौज करता था और शराब पिलाने के लिए दबाव डालता था.
- 20 फ़रवरी 2026: बुठालु की मौत हुई. पुलिस के अनुसार अभियुक्त ने समाज को गाली देने और विधानसभा चुनाव के दौरान हुए विवाद का हवाला देते हुए उसे निशाना बनाया.
- 12 मार्च 2026: छत्तूराम साहू की मौत हुई. पुलिस का कहना है कि अभियुक्त को संदेह था कि छत्तूराम उसकी पत्नी पर बुरी नज़र रखता था.
- 20 मार्च 2026: बुधराम जायसवाल की मौत हुई. पुलिस के मुताबिक, ज़मीन के लेन-देन और सामाजिक रंजिश को लेकर अभियुक्त ने उन्हें निशाना बनाया.
- 31 मार्च 2026: विनोद कुमार साहू की मौत कसडोल अस्पताल में हुई. पुलिस का दावा है कि अभियुक्त ने गाली-गलौज का बदला लेने के लिए उन्हें ज़हरीली शराब दी थी.
- 28 अप्रैल 2026: गजानंद की मौत हुई. पुलिस के अनुसार अभियुक्त को संदेह था कि गजानंद उस पर टोना-टोटका करता था, जिसके कारण उसके जीवन में परेशानियां थीं.
- 29 अप्रैल 2026: चैतूराम की मौत हुई. पुलिस का कहना है कि अभियुक्त ने उनसे लिया गया 50,000 रुपये का कर्ज़ और उसका ब्याज चुकाने से बचने के लिए हत्या की योजना बनाई थी.
- 14 मई 2026: महेतरू राम की मौत हुई. पुलिस के मुताबिक, अभियुक्त ने 2023 के चुनाव के दौरान हुए विवाद और बाद में ताने मारने की बात को लेकर उन्हें निशाना बनाया.
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SOURCE : BBC NEWS




