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छह बेटियों के बाद बेटे की चाह में महिला ने दिल्ली अस्पताल से बेटा चुराया

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तीन वर्षीय लड़के को दिल्ली के एक अस्पताल से अगवा किया गया और बाद में बिहार के मुंगेर जिले से बरामद कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, बेटे की चाहत रखने वाली आरोपी महिला ने बच्चे को इस योजना के साथ अगवा किया था कि वह उसे अपना बेटा बनाकर पालेगी।

## अस्पताल परिसर से बच्चा लापता

पुलिस ने मामला तब दर्ज किया जब बच्चे की मां इलाज के लिए दिल्ली के Guru Gobind Singh Hospital गई थी और बच्चा अस्पताल परिसर में खेलते समय लापता हो गया। Deputy Commissioner of Police (West) ने पुष्टि की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई थी।

CCTV फुटेज में एक महिला बच्चे को ले जाती हुई दिखाई दी। इसके बाद वह एक ई-रिक्शा में बैठकर Madipur गांव की ओर चली गई।

## आरोपी महिला की पहचान

जांचकर्ताओं ने आरोपी की पहचान 31 वर्षीय **Chunri Devi** के रूप में की, जो बिहार के Banka जिले की रहने वाली है और उस समय Madipur में किराए के मकान में रह रही थी। दिल्ली पुलिस के उसे पकड़ने से पहले ही वह बिहार स्थित अपने गृह जिले भाग गई।

## मुंगेर जिले में बरामदगी

निगरानी और स्थानीय खुफिया जानकारी से मिले सुरागों के आधार पर Delhi Police ने जांच का रुख मुंगेर जिले के **Asnaha गांव** तक पहुंचाया। वहां पुलिस थाने के निर्देश पर की गई छापेमारी में बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

इसके बाद अधिकारियों ने बच्चे को विमान से दिल्ली वापस लाकर उसके परिवार से मिला दिया।

## पूछताछ के दौरान मकसद का खुलासा

पूछताछ में महिला ने बताया कि उसकी पहले से छह बेटियां हैं। उसने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उसके लिए गर्भधारण करना असंभव हो गया था और पुरुष बच्चे की उसकी इच्छा ने उसे लड़के का अपहरण करने के लिए प्रेरित किया।

Devi ने बच्चे को चुराने की बात स्वीकार की और बताया कि उसका इरादा उसे अपना बेटा बनाकर पालने का था।

## संभावित आरोप और कानूनी प्रभाव

Delhi Police ने पुष्टि की कि कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों में सटीक आरोप अभी आधिकारिक रूप से बताए नहीं गए हैं, लेकिन नाबालिग का अपहरण करना और धोखाधड़ी से उसे अपना बेटा बताना गंभीर आपराधिक अपराधों की श्रेणी में आते हैं। जांचकर्ताओं से अपेक्षा है कि वे अपने औपचारिक आरोपों में इन उल्लंघनों को शामिल करेंगे।

## व्यापक संदर्भ: लैंगिक पक्षपात और सामाजिक दबाव

यह मामला भारत के कुछ हिस्सों में कायम उस सामाजिक समस्या को उजागर करता है, जहां पुरुष बच्चों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति अब भी गहराई से जड़ें जमाए हुए है। लिंग-चयन संबंधी प्रथाओं पर रोक लगाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए देशव्यापी प्रयासों के बावजूद, कई महिलाओं पर परिवार या समाज की ओर से पुरुष उत्तराधिकारी पैदा करने का दबाव बना रहता है।

सरकार का कानूनी ढांचा—जैसे Pre-Conception & Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNT) Act—लिंग-चयन को हतोत्साहित करने का प्रयास करता है। फिर भी, लैंगिक भेदभाव अक्सर अन्य तरीकों से जारी रहता है, जैसे परिवार की संरचना को लेकर सामाजिक अपेक्षाओं को थोपना।

## घटनाक्रम

| तारीख | घटना |
|—|—|
| August 31, 2026 | बच्चे के लापता होने की सूचना दी गई; पुलिस ने उसके गायब होने की जांच शुरू की। |
| उसी दिन (August 31, 2026) | CCTV की मदद से एक महिला का Madipur तक ई-रिक्शा से जाना और फिर बिहार लौटना पता चला। |
| August 31, 2026 की देर रात | Munger police ने Asnaha गांव में छापेमारी कर बच्चे को सुरक्षित बरामद किया। |

## घटना के बाद और आगे की कार्रवाई

बच्चा अब दिल्ली में अपने परिवार की सुरक्षित देखरेख में है। इस बीच, पुलिस सबूत जुटाने और आरोप तय करने की तैयारी जारी रखे हुए है। कानूनी कार्यवाही में आरोपी की मंशा, चिकित्सा संबंधी पृष्ठभूमि और अपराध को अंजाम देने के तरीके को स्थापित करना होगा।

ऐसे मामलों को बढ़ावा देने वाले लैंगिक पक्षपात से निपटने के लिए सामाजिक अभियानों और नीतिगत पैरवी का महत्व बना हुआ है।

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