Source :- LIVE HINDUSTAN
छोटे कारोबारियों के लिए UPI से जुड़े खर्च को लेकर राहत की उम्मीद बन रही है। 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में कुछ हाई-वैल्यू UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर GST से राहत देने के विकल्प पर चर्चा हो सकती है। खासतौर पर उन छोटे व्यापारियों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, जो GST के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं और इसलिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं उठा सकते।
GST नियमों के तहत सामान्य तौर पर वस्तुओं का कारोबार करने वाले ऐसे व्यवसाय जिनका सालाना टर्नओवर ₹40 लाख से कम है और सेवाओं से जुड़े कारोबार जिनका टर्नओवर ₹20 लाख से कम है, उन्हें GST रजिस्ट्रेशन से छूट मिल सकती है। ऐसे कारोबारी आमतौर पर ITC का दावा नहीं कर पाते। ऐसे में अगर UPI ट्रांजैक्शन पर MDR के ऊपर GST लगाया जाता है, तो यह टैक्स उनके लिए सीधे कारोबारी खर्च में बदल सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। इस MDR पर 18% GST लगाया जाएगा, न कि पूरे ट्रांजैक्शन मूल्य पर। MDR का भुगतान कारोबारी करता है और बैंक से भुगतान का निपटान होने के दौरान यह राशि सीधे काट ली जाती है। हालांकि, सभी ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर एक जैसी दर लागू नहीं होगी। रेलवे, कृषि और शिक्षा से जुड़े कुछ लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR प्रस्तावित है।
GST-रजिस्टर्ड कारोबारियों की स्थिति इससे अलग हो सकती है। अगर वे GST के तहत रजिस्टर्ड हैं और गैर-छूट वाली वस्तुओं या सर्विस की आपूर्ति करते हैं, तो MDR पर चुकाए गए GST का ITC के जरिए समायोजन किया जा सकता है। ऐसे मामलों में GST कारोबारी की अंतिम लागत नहीं बन सकता। दूसरी ओर बिना GST रजिस्ट्रेशन वाले छोटे व्यापारी इस टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं ले सकते, जिससे उनके लिए MDR पर GST अतिरिक्त खर्च बन सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि UPI MDR पर GST के लिए सभी कारोबारियों पर एक जैसी व्यवस्था लागू करना उचित नहीं होगा। AKM ग्लोबल के इनडायरेक्ट टैक्स एक्सपर्ट इकेश नागपाल (Ikesh Nagpal) के अनुसार, ऐसे व्यापारी जो GST रजिस्ट्रेशन के दायरे में नहीं आते, लेकिन MDR व्यवस्था के तहत GST का बोझ उठा सकते हैं, उनके लिए स्पष्ट समाधान जरूरी है। एक्सपर्ट ने यह भी कहा है कि इनवॉइस का प्रॉसेस सरल होनी चाहिए, ताकि छोटे व्यापारियों को टैक्स व्यवस्था समझने और उसका पालन करने में परेशानी न हो।
इसके अलावा एक्सपर्ट GST काउंसिल से MDR की टैक्स योग्य राशि को लेकर भी स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं। सवाल यह है कि GST सिर्फ वास्तविक रूप से लगाए गए MDR पर लगेगा या किसी निर्धारित MDR संरचना के आधार पर इसका कैलकुलेशन होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि घोषित MDR GST सहित है या GST से अलग। ऐसी स्पष्टता से बिलिंग, टैक्स कैलकुलेशन और ITC से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। अब 7 अक्टूबर की बैठक में इस मुद्दे पर क्या फैसला होता है, इस पर छोटे कारोबारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़े कारोबार की नजर रहेगी।
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