Source :- LIVE HINDUSTAN
दिल टूटने की आवाज भले ही नहीं होती लेकिन दर्द काफी तेज होता है। ऐसे में अगर आप दर्दभरी शायरियां या शेर पढ़ते हैं, तो आज हम आपके लिए जौन एलिया साहब के 20 चुनिंदा शेर लेकर आए हैं।
दिल टूटने का दर्द सबसे गहरा होता है, जिसकी आवाज भले ही सुनाई न दे, लेकिन तकलीफ दिल में बहुत दूर तक महसूस होती है। किसी की याद में आंखें नम हों या जुदाई का दर्द सताए, ऐसे में कई बार शेर-ओ-शायरी दिल का बोझ हल्का कर देती है। अगर आप भी अल्फाजों में अपने जज्बात तलाशते हैं, तो पेश हैं जौन एलिया के कुछ खूबसूरत और दर्दभरे शेर, जो मोहब्बत, तन्हाई और बिछड़ने की कसक को बयां करते हैं।
जौन एलिया के 20 शेर-
1. ये वार कर गया है पहलू से कौन मुझ पर
था मैं ही दाएँ बाएँ और मैं ही दरमियां था
2. अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो
वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी
3. आज बहुत दिन ब’अद मैं अपने कमरे तक आ निकला था
जूं ही दरवाज़ा खोला है उस की ख़ुश्बू आई है
4. हर शख़्स से बे-नियाज़ हो जा
फिर सब से ये कह कि मैं ख़ुदा हूं
5. अब जो रिश्तों में बंधा हूं तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
6. मेरी बांहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
अब बहुत देर में आज़ाद करूंगा तुझ को
7. हासिल-ए-कुन है ये जहान-ए-ख़राब
यही मुमकिन था इतनी उजलत में
8. उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहां के थे ही नहीं
9. इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊं
वगरना यूं तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
10. क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
11. कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
12. बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
13. कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है
14. कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूं मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे
15. ये मुझे चैन क्यूं नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
16. जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
17. मैं भी बहुत अजीब हूं इतना अजीब हूं कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
18. इक अजब आमद-ओ-शुद है कि न माज़ी है न हाल
‘जौन’ बरपा कई नस्लों का सफ़र है मुझ में
19. हमला है चार सू दर-ओ-दीवार-ए-शहर का
सब जंगलों को शहर के अंदर समेट लो
20. सारी गली सुनसान पड़ी थी बाद-ए-फ़ना के पहरे में
हिज्र के दालान और आंगन में बस इक साया ज़िंदा था।
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