Home RSS HINDI जीतन राम मांझी ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर दलित-मुसलमान एंगल जोड़ा

जीतन राम मांझी ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर दलित-मुसलमान एंगल जोड़ा

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बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुए भरत तिवारी के कथित पुलिस मुठभेड़ ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। परिवार और स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह मुठभेड़ नहीं, बल्कि हत्या थी। उनका कहना है कि फेसबुक लाइव के दौरान भरत ने अपनी पिस्तौल पुलिस के सामने फेंककर आत्मसमर्पण किया था, फिर भी पुलिस ने गोली चला दी।

इस घटना के बाद, बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस मामले में दलित और मुसलमानों का एंगल जोड़ते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले दलितों और मुसलमानों के एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे, वही अब भरत तिवारी के एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं थे, जिनका समर्थन जातिवादी मानसिकता के लोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, भरत तिवारी पूर्व में भी आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हो चुके थे।

इस बीच, विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि कानून व्यवस्था के नाम पर यह कार्रवाई संदेह के घेरे में है, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, सत्ता पक्ष और पुलिस इस कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहरा रहे हैं।

इस मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि डीएसपी ने इस मुठभेड़ की साजिश रची है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मामले की अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से जांच कराई जाए।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में जातिवाद, पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता और विपक्षी दलों की निगाहें इस पर बनी हुई हैं।

इस बीच, बिलौटी गांव में एक ‘सर्वदलीय महापंचायत’ का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों लोग विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। इस महापंचायत में भरत तिवारी के परिवार और समर्थकों ने आरोप लगाया है कि यह घटना एक वास्तविक पुलिस मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक हत्या थी।

इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष इस कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है, वहीं विपक्षी दलों और स्थानीय निवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में जातिवाद, पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता और विपक्षी दलों की निगाहें इस पर बनी हुई हैं।

इस बीच, बिलौटी गांव में एक ‘सर्वदलीय महापंचायत’ का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों लोग विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। इस महापंचायत में भरत तिवारी के परिवार और समर्थकों ने आरोप लगाया है कि यह घटना एक वास्तविक पुलिस मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक हत्या थी।

इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष इस कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है, वहीं विपक्षी दलों और स्थानीय निवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में जातिवाद, पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता और विपक्षी दलों की निगाहें इस पर बनी हुई हैं।

इस बीच, बिलौटी गांव में एक ‘सर्वदलीय महापंचायत’ का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों लोग विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। इस महापंचायत में भरत तिवारी के परिवार और समर्थकों ने आरोप लगाया है कि यह घटना एक वास्तविक पुलिस मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक हत्या थी।

इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष इस कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है, वहीं विपक्षी दलों और स्थानीय निवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में जातिवाद, पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता और विपक्षी दलों की निगाहें इस पर बनी हुई हैं।

इस बीच, बिलौटी गांव में एक ‘सर्वदलीय महापंचायत’ का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों लोग विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। इस महापंचायत में भरत तिवारी के परिवार और समर्थकों ने आरोप लगाया है कि यह घटना एक वास्तविक पुलिस मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक हत्या थी।

इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष इस कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है, वहीं विपक्षी दलों और स्थानीय निवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच