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जेल की सलाखों के पीछे से चलता रहा नशे का कारोबार, ब्रिटेन में तीन भारतीयों को जेल की सजा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जेल की सलाखों के पीछे बैठकर ड्रग्स का साम्राज्य चलाने वाले भारतीय मूल के शातिर डीलर का आखिरकार भंडाफोड़ हो गया। हरदीप सिंह थिंद ने सजा काटते हुए भी मोबाइल फोन के जरिए पश्चिमी लंदन में कोकीन और हेरोइन की करोड़ों रुपये की सप्लाई का पूरा नेटवर्क संचालित किया।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में पश्चिमी इलाकों को नशे की लत में डुबोने वाले एक बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस नेटवर्क का नेतृत्व जेल की सलाखों के पीछे बैठे 48 वर्षीय हरदीप सिंह थिंद उर्फ हैरी सिंह कर रहा था, जो रिहाई के बाद भी अपनी आपराधिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ाता रहा। इस मामले में तीन भारतीय मूल के व्यक्तियों सहित कुल चार लोगों को दोषी ठहराया गया है।

मेट्रोपॉलिटन पुलिस की विशेष टीम ने जनवरी 2024 में थिंद को ‘हादी’ नाम से सक्रिय ड्रग रैकेट का सरगना चिन्हित किया था। उस समय वह हेरोइन और कोकीन की अवैध आपूर्ति की साजिश रचने तथा प्रतिबंधित स्वचालित हथियार (स्कॉर्पियन सबमशीन गन) रखने के आरोप में 17 वर्ष की जेल की सजा काट रहा था। पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि थिंद जेल में रहते हुए भी मोबाइल फोन हासिल कर गिरोह को निर्देशित करता रहा। अक्टूबर 2024 में रिहा होने के तुरंत बाद उसने नेटवर्क का विस्तार किया, हेज और साउथॉल जैसे इलाकों में नए डीलर भर्ती किए और पश्चिमी लंदन में कई ड्रग लाइनों को सक्रिय कर दिया।

गिरोह के सदस्य और आपराध

  • हरदीप थिंद (48 वर्ष): गिरोह का मुख्य सरगना। जेल से रिहाई के बाद वह सभी प्रमुख सदस्यों से नियमित संपर्क में रहा, ड्रग सप्लाई लाइनों का समन्वय किया और ‘द प्लग’ के नाम से जाना जाने लगा। फोन रिकॉर्डिंग में उसकी वॉइस नोट्स बरामद हुईं, जिसमें वह ड्रग्स की सप्लाई और वितरण के बारे में विस्तार से निर्देश देता दिखाई दिया।
  • पुरुषोत्तम ढिल्लों (59 वर्ष): पूर्व मजिस्ट्रेट। हाउन्सलो के लैम्पटन एवेन्यू स्थित अपने आवास के बाहर हेरोइन भरी वैन पार्क करने और घर के अंदर ड्रग्स का वजन व पैकेजिंग करने की अनुमति दी। उसने खुद को नशे का आदी बताया है।
  • बिक्रमजीत बराड़ (46 वर्ष): हेज के नेस्टल्स एवेन्यू का निवासी। ड्रग्स के भंडारण, पैकिंग और वितरण की प्रमुख जिम्मेदारी उसके ऊपर थी।
  • लिएंड्रिया लिंच (49 वर्ष): हेज के डॉली रोड निवासी। गिरोह की संदेशवाहक के रूप में काम करती थी। आपूर्ति समन्वय और संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्या है पूरा मामला?

1 जुलाई 2025 को मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने पश्चिमी लंदन के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में हेरोइन, क्रैक कोकीन, नकदी, कई मोबाइल फोन और ड्रग लेन-देन को दर्ज करने वाली हस्तलिखित ‘टिक लिस्ट’ बरामद की गई। फोरेंसिक जांच में थिंद को उसके वाहन से बरामद हेरोइन से सीधे जोड़ा गया। पुलिस को वही दुर्लभ ड्रग-काटने वाला उपकरण भी मिला, जिसका इस्तेमाल गिरोह करता था।

फोन से प्राप्त रिकॉर्डिंग और लोकेशन डेटा ने मामले को और मजबूत किया। जांचकर्ताओं को पता चला कि चारों आरोपी नियमित रूप से एक-दूसरे से मिलते थे और सक्रिय संपर्क में रहते थे। थिंद को ‘द प्लग’ कहकर संबोधित किया जाता था, जो उच्च स्तर के ड्रग सप्लायर के लिए इस्तेमाल होने वाला कोड वर्ड है।

कोर्ट का फैसला

3 जुलाई 2025 को चारों पर क्लास ए ड्रग्स की आपूर्ति, आपूर्ति के इरादे से ड्रग्स रखने और आपत्तिजनक हथियार रखने के आरोप लगाए गए। थिंद और बराड़ ने कोकीन व हेरोइन की आपूर्ति से जुड़े दो-दो मामलों में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। ढिल्लों और लिंच ने मुकदमे का सामना किया, जिन्हें 8 मई 2026 को क्रॉयडन क्राउन कोर्ट की जूरी ने सर्वसम्मत फैसले से दोषी ठहराया।

25 जून 2026 को सुनाई गई सजा

  • हरदीप थिंद: 12 वर्ष 6 माह की जेल
  • पुरुषोत्तम ढिल्लों: 7 वर्ष की जेल
  • बिक्रमजीत बराड़: 3 वर्ष 4 माह की जेल
  • लिएंड्रिया लिंच: 2 वर्ष 6 माह की जेल (पूरी सजा निलंबित)

मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इस सफल ऑपरेशन को ड्रग्स की अवैध आपूर्ति पर लगाम कसने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। अधिकारियों का कहना है कि जेल के अंदर से चलाए जा रहे ऐसे नेटवर्क को चिन्हित कर उन्हें समाप्त करना भविष्य के लिए मिसाल बनेगा। इस गिरोह ने पश्चिमी लंदन के कई इलाकों को प्रभावित किया था, जहां युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN