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जोनल काउंसिल बैठक में तमिलनाडु CM विजय ने दक्षिणी राज्यों के लिए न्यायसंगत व्यवहार मांगा

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने 20 अगस्त, 2026 को आयोजित 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान केंद्र सरकार से दक्षिणी राज्यों के साथ संतुलित और न्यायपूर्ण व्यवहार करने का आग्रह किया। चेंगलपट्टू जिले के कोवलम में आयोजित इस बैठक की मेजबानी करते हुए उन्होंने प्रस्तावित कानूनों और शक्तियों के आवंटन को लेकर चिंता जताई, जिनसे बेहतर मानव विकास और जनसंख्या नियंत्रण का रिकॉर्ड रखने वाले राज्यों को संभावित रूप से नुकसान हो सकता है।

## मुख्यमंत्री विजय की प्रमुख मांगें और चिंताएँ

### संसदीय प्रतिनिधित्व की सुरक्षा
विजय ने मांग की कि प्रस्तावित **परिसीमन विधेयक, 2026** के तहत किसी भी दक्षिणी राज्य की संसद में सीटों की हिस्सेदारी कम नहीं की जानी चाहिए, जबकि 1971 की जनगणना के आधार पर सीट आवंटन पर लगी रोक समाप्त होने के करीब है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुख्य रूप से अद्यतन जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने से उन राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है।

### राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति प्रतिबद्ध राज्यों के साथ निष्पक्षता
विजय के अनुसार, जनसंख्या स्थिरीकरण, आर्थिक प्रगति और उत्कृष्ट मानव विकास सूचकांकों के माध्यम से जिम्मेदार शासन का प्रदर्शन करने वाले राज्यों को दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से कानूनी आश्वासन देने की मांग की कि ऐसे राज्यों को प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

## एजेंडे में शामिल अन्य प्राथमिक मुद्दे

### NEET और शैक्षिक समानता
National Eligibility cum Entrance Test (NEET) की आलोचना करते हुए विजय ने दोहराया कि यह ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने तमिलनाडु को छूट देने का प्रस्ताव रखा, ताकि चिकित्सा, दंत चिकित्सा और AYUSH पाठ्यक्रमों में प्रवेश राज्य के मौजूदा मानदंडों के अनुरूप केवल कक्षा 12 के अंकों के आधार पर दिया जा सके।

### नदी जल बंटवारे को लेकर विवाद
मुख्यमंत्री ने अंतरराज्यीय नदी विवादों, विशेषकर कर्नाटक के साथ **कावेरी नदी** को लेकर चल रहे विवाद, के समाधान की तात्कालिकता पर जोर दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, न्यायाधिकरण के निर्णयों और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण जैसे वैधानिक निकायों के फैसलों का सख्ती से पालन करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सहयोग में कानूनी आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए।

### नियामकीय और वित्तीय सहायता पर जोर
विजय ने ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए कड़े नियमों, युवाओं को नशे के दुरुपयोग से बेहतर सुरक्षा और वित्तीय संसाधनों में उचित हिस्सेदारी की भी मांग की। ये मांगें राज्य अधिकारों और संघीय सहयोगात्मक शासन को लेकर व्यापक चिंताओं को दर्शाती हैं।

## व्यापक चर्चा और राज्यों के बीच समन्वय

– **1971 की जनगणना को लेकर मांगें:** कर्नाटक के मुख्यमंत्री D.K. Shivakumar ने परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को आधार बनाए रखने का आग्रह किया और दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत की रक्षा के लिए लोकसभा की 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक स्थिर रखने की वकालत की।
– **अन्य विषय:** परिषद ने प्रस्तावित **मेकदातु बांध परियोजना**, मुल्लापेरियार बांध, नदी न्याय—विशेष रूप से कावेरी—अंतरराज्यीय सुरक्षा समन्वय और प्रशासनिक सहयोग पर भी चर्चा की।

## संदर्भ: दक्षिणी राज्यों का रुख और संघीय संतुलन

तमिलनाडु और केरल सहित दक्षिणी राज्यों का मानना है कि हालिया प्रस्ताव उन राज्यों को दंडित करने का जोखिम पैदा करते हैं, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सक्रिय रूप से नियंत्रित किया है। इन राज्यों का तर्क है कि यदि परिसीमन में अद्यतन जनसंख्या आंकड़ों को अत्यधिक महत्व दिया गया, तो संसद में उनकी सीटों और प्रभाव में कमी आ सकती है।

विजय की मांगें वित्तीय संघवाद, कानूनी स्वायत्तता और नीतिगत मान्यता को लेकर लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के अनुरूप हैं। उनका रुख संवैधानिक सुरक्षा और राज्यों तथा केंद्र सरकार के बीच विश्वास की दिशा में व्यापक प्रयास को रेखांकित करता है।

## क्या दांव पर है

– तमिलनाडु की सीटों की हिस्सेदारी में संभावित बदलाव उसके संसदीय प्रभाव को कमजोर कर सकते हैं और केंद्र से मिलने वाले धन के प्रवाह में कमी ला सकते हैं, साथ ही राष्ट्रीय नीति-निर्माण में उसकी आवाज को सीमित कर सकते हैं।
– प्रतिनिधित्व में बदलाव से संसाधनों के आवंटन पर असर पड़ सकता है, जिसमें जनसंख्या-आधारित फार्मूलों के अनुसार वितरित की जाने वाली धनराशि और राज्य सरकारों में निहित कानूनी निर्णय लेने की शक्ति शामिल है।
– नीति या कानून में बदलाव के कारण छात्रों, ग्रामीण आबादी और कृषि समुदायों को अप्रत्यक्ष परिणामों का सामना करना पड़ सकता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि किस राज्य का दृष्टिकोण अधिक प्रभावी होता है।

## आगे क्या होगा

विजय ने केंद्र सरकार से **विधायी गारंटी** देने का आग्रह किया, ताकि परिसीमन विधेयक के तहत राज्यों की मौजूदा प्रतिनिधित्व हिस्सेदारी सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि इससे संघीय संतुलन कायम रहेगा और राज्यों को यह भरोसा मिलेगा कि राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुपालन को उनके लिए राजनीतिक नुकसान में नहीं बदला जाएगा।

दक्षिणी राज्य आगामी संसदीय सत्रों पर करीबी नजर रखेंगे। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया—चाहे वह संशोधनों, संवैधानिक स्पष्टीकरणों या राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के माध्यम से हो—भारत में केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों की दिशा तय कर सकती है।

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