Source :- LIVE HINDUSTAN
https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/10/09/1200x900/dholida_1791543815080_6CWd_1791543819980_lyRx_760e05f6-7b63-4b12-b3ba-9ece9e2a9b0f_DFQf.png‘ढोलिडा ढोल रे वागाड़, मारे हिच लेवी छे’…गाना पढ़ते ही गरबा करने का मन कर रहा है न? हा हा हा, गरबा बाद में कीजिएगा अभी इस गाने का मतलब समझ लीजिए।
गुजराती गाना ‘ढोलिडा ढोल धीमो धीमो वागाड़’ के बिना आज गरबा अधूरा माना जाता है। गुजरात के पारंपरिक गरबे हों, बॉलीवुड की गरबा नाइट हो या फिर सोसायटी में होने वाला गरबा, इस गाने के बजते ही लोग थिरकने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस गाने पर आप झूमते हैं, उसके बोलों का मतलब क्या है? आखिर इस गाने में ढोल बजाने वाले से क्या कहा जा रहा है और किस देवी के दरबार में गरबा खेलने की बात हो रही है? अगर आप भी अब तक इसके बोलों का मतलब नहीं जानते, तो आइए आपको बताते हैं।
‘ढोलिडा ढोल रे वागाड़, मारे हिच लेवी छे’ का हिंदी में मतलब
ढोलिडा ढोल रे वागाड़, मारे हिच लेवी छे
हिंदी: ऐ ढोली (ढोल बजाने वाले)! ढोल बजा, मुझे ‘हिच’ (गरबा का एक पारंपरिक नृत्य रूप) लेना है।
ए हिच लेवी छे, रे मारे गरबे घुमवु छे
हिंदी: मुझे हिच लेना है और गरबा में घूमना (नृत्य करना) है।
हे थारे किया माने द्वारे आज हिच लेवी छे
हिंदी: तुम्हें आज किस माता (देवी) के द्वार पर हिच लेना है?
रे मारे अम्बे मां ने द्वार आज हिच लेवी छे
हिंदी: मुझे आज अंबा माता (मां जगदंबा) के द्वार पर हिच लेना है।
क्यों हर नवरात्रि में गूंजता है यह गाना?
गुजराती गानों की बात हो और ‘ढोलिडा ढोल धीमो धीमो वागाड़’ का जिक्र न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। यह गाना गरबा खेलने वालों के बीच खास पहचान बना चुका है। नवरात्रि के दौरान लोग कितने भी थके क्यों न हों जब यह गाना बजता है तब लोग गरबा खेलने के लिए उठ खड़े होते हैं।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा: इस गाने को लोकप्रिय बनाने में टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की भी अहम भूमिका रही है। शो में नवरात्रि और गरबा के दौरान यह गाना सुनने को मिलता है। इतना ही नहीं, जेठालाल के फोन की रिंगटोन भी यही है। यही वजह है कि टीवी पर इसे देखने वाले कई दर्शकों के लिए भी यह गाना नवरात्रि की खास यादों से जुड़ गया है।
यहां सुनिए पूरा गाना
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