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त्योहारी सीजन में 4% सस्ती हुई चांदी की कीमत, 8 महीने के निचले स्तर पर भाव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में चांदी करीब 4 पर्सेंट टूट गया है
  • चांदी 31 दिसंबर, 2025 के 2.39 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से अब तक 31,500 रुपये यानी 13 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुकी है

दिवाली से पहले सोने और चांदी की खरीदारी करना चाहते हैं तो ये खबर आपको थोड़ी राहत दे सकती है। दरअसल, सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में चांदी करीब 4 पर्सेंट टूट गया है। चांदी में बड़ी गिरावट के कारण दिसंबर डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट 8,593 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 2,00,575 रुपये पर आ गया। यह करीब आठ महीनों का सबसे निचला स्तर है। चांदी 31 दिसंबर, 2025 के 2.39 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से अब तक 31,500 रुपये यानी 13.18 प्रतिशत गिर चुकी है।

वहीं, 29 जनवरी को दर्ज 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर से इसकी कीमत 1.97 लाख रुपये यानी 48.70 प्रतिशत नीचे आ चुकी है। इसके अलावा, सोने की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है। MCX पर सोना 2300 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर 1,43,600 रुपये पर आ गया, जो पिछले दो महीनों का सबसे निचला स्तर है। बता दें कि इस महीने अब तक सोने की कीमतों में 3.3% और चांदी की कीमतों में 10% की गिरावट आई है।

गिरावट की क्या है वजह?

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सऊदी अरब में घातक हमलों के बाद बाजार में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड का भाव 3.3 फीसदी बढ़कर 112.38 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह पांच महीने के उच्च स्तर पर भी गया। अक्टूबर में अब तक ब्रेंट क्रूड 97 से 112 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में उतार-चढ़ाव करता रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा, “पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर चिंताओं के बीच घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।” पीएल कैपिटल के जिंस प्रमुख आशीष राजोदिया ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनाए रखने की आशंका मजबूत हुई है और कीमती धातुओं के भाव पर इसका असर देखा जा रहा है।

राजोदिया ने कहा, “सोने के मुकाबले चांदी में अधिक गिरावट उसकी कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव के कारण आई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के संकेत भी दोनों धातुओं पर दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कीमती धातुओं को संभलने का मौका मिल सकता है।” ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक और आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर टिकी हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN