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त्योहारों में आलू से करनी है बंपर कमाई तो अभी करें ये काम, मालामाल होने का मौका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

किसानों के लिए बंपर कमाई का मौका आ गया है। दिसंबर में आलू की अच्छी कीमत का फायदा उठाकर कमाई करना चाहते हैं, तो इसकी तैयारी अभी से किसानों को अभी से शुरू करनी होगी। अगेती आलू की बुआई का समय आ गया है। एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक सितंबर में समय पर आलू बोने से फसल करीब 70 से 80 दिन में तैयार हो सकती है। ऐसे में किसान दिसंबर तक आलू की खुदाई कर बाजार में बेच सकते हैं। खास बात यह है कि आलू की खुदाई के बाद उसी खेत में पिछेती गेहूं की बुआई भी की जा सकती है।

जौनपुर जिला उद्यान अधिकारी डॉ सीमा सिंह राणा ने किसानों को अगेती आलू की बुआई समय से करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसान इतना आलू जरूर बोएं कि घर की जरूरत पूरी होने के साथ बाजार में बेचने के लिए भी उपज बची रहे। इससे बाजार में आलू के भाव बढ़ने पर किसानों को अच्छा फायदा मिल सकता है।

सितंबर में बुआई, दिसंबर में फसल तैयार

अगेती आलू की खेती में समय सबसे महत्वपूर्ण है। किसानों को 15 से 20 सितंबर के बीच बुआई पूरी कर लेने की सलाह दी गई है। मौसम साफ होते ही खेत की जुताई कर उसे तैयार करना चाहिए। समय पर बुआई होने पर आलू की फसल 70 से 80 दिन में पककर तैयार हो सकती है। यानी सितंबर में खेत में डाला गया आलू दिसंबर तक खुदाई के लिए तैयार हो सकता है। इसके बाद किसान खेत को गेहूं की अगली फसल के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह एक ही खेत से कम समय में दो फसलों का फायदा लेने का मौका मिल सकता है।

कैसी जमीन में आलू की पैदावार होगी अच्छी?

आलू की अच्छी उपज के लिए बलुई या हल्की दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है। मिट्टी में पर्याप्त जीवांश होना चाहिए और बुआई के समय वह भुरभुरी होने के साथ पर्याप्त नमी वाली हो। हल्की और भुरभुरी मिट्टी में हवा का संचार अच्छा रहता है, जिससे आलू के कंद का विकास बेहतर होता है। साथ ही खुदाई के समय भी किसानों को ज्यादा परेशानी नहीं होती। आलू के लिए जमीन का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना अच्छा माना जाता है। बुआई से पहले बीज का उपचार करने की भी सलाह दी गई है।

खाद में न करें लापरवाही

अच्छी उपज के लिए प्रति हेक्टेयर करीब 180 किलो नाइट्रोजन, 100 किलो फास्फोरस और 80 किलो पोटाश की जरूरत बताई गई है। इसके लिए करीब 315 किलो एनपीके और 350 किलो यूरिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। करीब 75 किलो यूरिया बेसल ड्रेसिंग के रूप में देने और बाकी यूरिया मिट्टी चढ़ाते समय इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। अगर पोटाश की अतिरिक्त जरूरत हो तो म्यूरेट ऑफ पोटाश से इसकी सप्लाई की जा सकती है।

पहली सिंचाई 15-18 दिन बाद

आलू की पहली सिंचाई बुआई के 15 से 18 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद खेत और मौसम की स्थिति के अनुसार 10 से 15 दिन के अंतर पर सिंचाई की जा सकती है। पूरी फसल अवधि में करीब 8 से 10 सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। जब पौधे 12 से 15 सेंटीमीटर के हो जाएं तो हल्की सिंचाई के बाद खेत में खरपतवार निकालें। मिट्टी को भुरभुरा करके यूरिया दें और उसके बाद पौधों पर मिट्टी चढ़ाएं। यूरिया का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि खेत में ओस न हो।

किसानों के लिए क्यों खास है अगेती आलू की खेती?

अगेती आलू की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि फसल जल्दी तैयार होती है और खेत भी समय से खाली हो जाता है। अगर दिसंबर में बाजार भाव किसानों के पक्ष में रहे तो समय पर तैयार हुई फसल से बेहतर दाम मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि बाजार भाव की गारंटी नहीं होती, इसलिए किसानों को सिर्फ अनुमानित कीमत के भरोसे खेती नहीं करनी चाहिए। फिलहाल सबसे जरूरी काम समय पर खेत तैयार करना और 15 से 20 सितंबर के बीच अगेती आलू की बुआई पूरी करना है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN